चेतना यात्रा-10

शुभारम्भ
गो ग्रीन गो डिजीटल, भाग-1
एनॉलाग टैक्ॅनालाजी में बदलाव लाने की जरूरत अब से 15 साल पूर्व महसूस की गई थी, क्योंकि पे चैनलों के लगातार बढ़ते जा रहे आर्थिक बोझ को सहन करने की सारी सीमाएँ केबल टी-वी- ऑपरेटर लांघने लगे थे।अपने वश से जब बाहर हो गया तब पे चैनलों के बढ़ते आर्थिक बोझ में केबल टी-वी- ऑपरेटरों को भी सहभागी बनाने का निर्णय केबल टी-वी- ऑपरेटरों को लेना पड़ा था। मात्र 12 रूपए प्रतिदिन के हिसाब से कुल 360/- रूपय मासिक केबल टी-वी- शुल्क उपभोक्ताओं से लेना जब तय किया गया,तब देश में एन-डी-ए- की सरकार थी एंव श्रीमति सुषमा स्वराज देश की सूचना व प्रसारण मन्त्री हुआ करती थी। केबल टी-वी- उपभोक्ताओं के लिए यकायक 360/-रूपए का भुगतान करना निगला नहीं जा सका, अतः केबल टी-वी- ऑपरेटरों के निर्णय के विरूद्ध उन्होंने चिल्लाना शुरू किया। उपभोक्ताओं की आवाज भारत सरकार के कानों तक शीघ्र ही पहुंच भी गई, तत्कालीन सूचना व प्रसारण मन्त्री श्रीमति सुषमा स्वराज जी ने तुरन्त केबल टी-वी- ऑपरेटरों के प्रतिनिधियों को मन्त्रलय बुलाया और उन्होंने केबल टी-वी- की दरों में की गई वृद्धि पर पूरी जानकारी ली। सूचना व प्रसारण मन्त्री श्रीमति सुषमा स्वराज जी के समक्ष केबल टी-वी- ऑपरेटरों की राष्ट्रीय सस्ंथा ‘आल इण्डिया आविष्कार डिश एण्टिना संघ’ के अध्यक्ष डॅा-ए-के- रस्तोगी जी ने केबल की दरों में वृद्धि के कारणों को स्पष्ट तरीके से रखा कि पे चैनलों की सख्ंया के साथ-साथ उनके द्वारा की जाने वाली उगाही में निरन्तर वृद्धि होती जा रही है, जिसे अब और बर्दाश नहीं किया जा सकता है, इसीलिए उपभोक्ताओं को सहभागी बनाने का निर्णय लिया गया था। जैसे कि भोजन की थाली में नाना प्रकार के व्यंजन परोसे जा रहे थे, लेकिन उनकी कीमत नाम मात्र ही वसूली जा रही थी, जबकि अब कई और व्यंजनो को भी उनकी थाली में परोसा जा रहा था, लेकिन शुल्क वही पुराना वाला लिया जाता रहा, ऐसा अब सम्भव नहीं रह गया है। अतः या तो व्यंजनों की कटौती की जाए या फिर उनसे व्यंजनों का पूरा पैसा लिया जाए। माननीय मन्त्री महोदया जी ने केबल टी-वी- आपरेटरों की समस्याओं को गम्भीरता से समझते हुए इसका समाधान पूछा तब उन्हें बताया गया कि समाधान यह है, कि पूरी थाली परोसने की जरूरत ही नहीं है। उपभोक्ताओं को वही परोसा जाए जिसकी उसे जरूरत हो, अर्थात फ्री टु एयर चैनलों को तो मिनिमन मासिक शुल्क में प्रत्येक केबल टी-वी- उपभोक्ता को उपलब्ध करवाया जाए, लेकिन पे चैनल केवल उन्ही उपभोक्ताओं को उपलब्ध करवाएं जाए जो उनकी मांग करे।
इसके लिए टैक्नॉलाजी उपलब्ध है जिसे कण्डीश्नल एक्सेस सिस्टम (ब्।ै) कहा जाता है, उसे अपने देश में भी लाया जाए तो समस्या का समाधान निकल जाएगा। माननीय मन्त्री महोदया जी ने देश के करोड़ों केबल टी-वी- उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए इस समस्या के समाधान के लिए तुरन्त 12 सदस्यों की टास्क फोर्स का गठन किया। टासक फोर्स में ब्राडकास्टर्स एम-एस-ओ- एंव केबल टी-वी- आपरेटरों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया। देश भर के केबल टी-वी- आपरेटरों का प्रतिनिधित्व इस टास्क फोर्स में डॅा-ए-के- रस्तोगी ने किया। कण्डीश्नल एक्सेस सिस्टम पर बनाई गई टास्क फोर्स में बाद में कुछ अन्य सदस्यों के शामिल होते जाने से सख्ंया बढ़ती गई। अनेक मीटिंगो के बाद कण्डीश्नल एक्सेस सिस्टम पर एक कानून का प्रारूप बनकर तैयार था, जिसे संसद में पास करवा लेने के बाद माननीय राष्ट्रपति जी के हस्ताक्षर हो जाने के बाद जारी की गई अधिसूचनानुसार 14 जनवरी 2005 को प्रथम चरण लागू किया जाना तय हुआ। केबल टी-वी- एक्ट 1995 में संशोधन कर 2003 में कण्डीश्नल एक्सेस सिस्टम को लागू करवाए जाने की शुरूआत हुई थी, जिसका ब्राडॅकास्टर अन्दर ही अन्दर पूरा विरोध कर रहे थे। लेकिन ब्राडॅकास्टर्स के अड़ियल रवैये से छुटकारा पाने के लिए देश के प्रमुख एम-एस-ओ- कैस की पूरी तैयारी मे जुटे हुए थे।
कैस कानून एंव टैक्नॉलाजी के बारे में देशभर के केबल टी-वी- आपरेटरों को जागरूक करना आवश्यक हो गया था, अतः केबल टी-वी- ऑपरेटरों की राष्ट्रीय सस्ंथा के अध्यक्ष होने के नाते डॅा-ए-के- रस्तोगी ने देशभर के केबल टी-वी- ऑपरेटरों को कण्डीश्नल एक्सेस सिस्टम कानून एंव टैक्नॉलाजी के प्रति जागरूक करने का दायित्व स्वंय उठाते हुए देशभर के केबल टी-वी- आपरेटरों के पास जाकर उन्हें जानकारी देने के लिए एक चेतना यात्र करने का निर्णय लिया। कण्डीश्नल एक्सेस सिस्टम को लागू करवाए जाने में अड़ंगे लगाए जाने लगे थे। भिन्न समाचार चैनलों पर डैस को लेकर उपभोक्ताओं को भ्रमित किए जाने का काम ब्रॉडकास्टर कर रहे थे, जबकि देश में आम चुनाव भी होने वाले थे, फिर भी बामुश्कित जब तत्कालीन सूचना व प्रसारण मन्त्री श्रीमति सुषमा स्वराज जी ने माननीय संसद के दोनो सदनों में कण्डीश्नल एक्सेस सिस्टम पर बनाया गया कानून पास करवा लिया तब श्रीमति सुषमा स्वराज को सूचना व प्रसारण मन्त्री पद से हटना भी पड़ा था। सुषमा जी के स्थान पर श्री रविशंकर प्रसाद जी को सूचना व प्रसारण मन्त्रलय का दायित्व सौपा गया था, लेकिन बहुत कोशिशों के बावजूद भी कैस कानून को लागू नहीं करवाया जा सका था। कैस को लेकर आपरेटरो में भी भ्रम की स्थिती थी, आखिरकार आम चुनाव में एन-डी-ए- को हार का मुंह देखना पड़ा और फिर से यू-पी-ए- की सरकार आ जाने से कैस ठण्डे बस्ते में चला गया था। एम-एस-ओ- ने कैस लागू करवाए जाने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय की शरण ली थी।
कैस के प्रति केबल टी-वी- ऑपरेटरों को जागरूक करना बहुत जरूरी हो गया था, अतः सन् 2005 में ‘चेतना यात्र’ की शुरूआत हुई थी। देशभर के केबल टी-वी- ऑपरेटरों को कैस की सही जानकारी देने के लिए आरम्भ हुई ‘चेतना यात्र’ का सिलसिला अभी भी जारी है, क्योंकि वहां से हुई शुरूआत की दिशा ही बदल गई थी। एन-डी-ए- सरकार द्वारा जिस कारण से कण्डीश्नल एक्सेस सिस्टम कानून बनाया गया था, उसका साफ-साफ मतलब था कि जिसे पे चैनल चाहिए सिर्फ उन्हीं उपभोक्ताओं को पे चैनल परोसे जाएँ, सभी उपभोक्ताओं को जबर्दस्ती पे चैनल परोसने की कोई आवश्यक्ता नहीं है। उन्हें फ्री टु एयर चैनल बहुत ही कम कीमत में उपलब्ध करवाए जाए। सभी एम-एस-ओ- इसके लिए पूरी तरह से तैयार थे एंव उन्होंने कैस अपनाने के लिए बहुत बड़ा इन्वेष्टमैंट कर दिया था, जबकि विदेशी पे चैनल ब्रॉडकास्टर्स किसी भी तरह से भारतीय कानून के अर्न्तगत नहीं आना चाहते थे, वह स्वंय को भारतीय कानूनों से मुक्त रखते हुए अपनी धांधली चलाए रखना चाहते थे। अतः उन्हें श्रीमति सुषमा स्वराज जी द्वारा बनाया गया कैस कानून बिल्कुल भी गले नहीं उतर रहा था। एन-डी-ए- सरकार चले जाने के बाद तो जैसे उनकी लाटरी ही लग गई थी। एक प्रकार से एन-डी-ए- सरकार को हटाने में उनकी भी काफी कोशिशें रही थी। भारत में भारत के हितों की रक्षा के लिए भी भारत सरकार अपने कानून नहीं बना सकी और बना भी ले तो उसे लागू नहीं करवा सकी, यह मकसद अब देशभर के केबल टी-वी- ऑपरेटरों को अपनी मातृभूमि के प्रति समर्पित भावना पैदा करना हो गया था। कैस पर टनो धूल पड़ चुकी थी, लेकिन मामला क्योंकि अदालत में चल रहा था अतः यू-पी-ए- सरकार ने कैस की जगह डैस कानून बना दिया। इसी बीच सन् 2004 में डी-टी-एच- की भी शुरूआत हो चुकी थी एंव दिल्ली उच्च न्यायालय में चल रहे कैस के मामले में यू-पी-ए- सरकार को कैस का प्रथम चरण लागू करवाए जाने के लिए बाध्य होना पड़ा। 1 जनवरी 2007 का कैस का प्रथम चरण भी लागू हो गया, क्योंकि एम-एस-ओ- पहले से ही इसकी तैयारी में थे।
इसका लाभ डी-टी-एच- ने भी पूरा बटोरा। मामला यहां से और आगे बढ़ता हुआ डिजीटल एड्रेसिबल सिस्टम (क्।ै) पर पहुंच गया। 2005 से आरम्भ हुई ‘चेतना यात्र’ लगातार देश के कौने-कौने में विध्मान केबल टी-वी- ऑपरेटरों को जगाने व जोड़ने का प्रयास करती आ रही है। देश के हालातों में अब केबल टी-वी- ऑपरेटरों की भी एक अलग भूमिका तय हो चुकी थी, जिसे वह बाखूबी निभाने लगे।
सिर्फ चैनल परोसने तक ही वह सीमित नहीं रहे, बल्कि समाज के लिए भी वह बहुत कुछ करने लगे। ‘चेतना यात्र’ के अर्न्तगत उन्हें ‘ग्लोबल वार्मिग’ के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के कार्य में लगाया गया। उनके द्वारा वृक्षा रोपण का विशेष अभियान चलाया गया। इस प्रकार उन्हें उनके उपभोक्ताओं के और निकट लाकर राष्ट्रीयहित में उनके दायित्व को अन्जाम दिया गया। लम्बे समय तक जहां बिल्कुल उम्मीदें ही खत्म हो चुकी थी, वहीं से आशाओं की किरणें भी केबल टी-वी- ऑपरेटरों के प्रयासों से दिखने लगी थी। बारहाल! यू-पी-ए- सरकार ने भारतीय मीडिया पर पूरी तरह से कब्जा जमाने के लिए डिजीटल एड्रेसिबल सिस्टम (क्।ै) का कानून बनाया और इस कानून में देशभर के केबल टी-वी- ऑपरेटरों के हितों का कोई स्थान नही रखा गया। केवल डीटीएच ऑपरेटरों ब्रॉडकास्टर्स एंव एम-एस-ओ- के ही हितो की रक्षा के लिए डैस कानून बनाया गया, जिसे लागू करवाने में उन सबके साथ मिलकर सरकार ने भी बहुत तत्पश्चता दिखलाई।
डैस का प्रथम चरण पूर्ण नहीं हो सका, लेकिन सरकार इसके द्वितीय चरण को लागू करवाने पर पहुंच गई, जो कि अब सितम्बर के बाद तृतीय एवं दिसम्बर 2014 तक पूरे भारत में लागू हो जाना था। फिर से देश में आम चुनाव हुए है, फिर एन-डी-ए- सरकार का राज आया है, अतः यू-पी-ए- की सरकार द्वारा धकेले जा रहे डैस कानून पर थोड़ा ब्रेक सा लगा है। अब 2014 में नहीं बल्कि इसकी अन्तिम समय सीमा फिलहाल 2016 में की गई है जबकि तृतीय चरण के लिए 2015 कहा गया है। केबल टी-वी- ऑपरेटरों ने बहुत बड़ी राहत की सांस ली है, लेकिन एम-एस-ओ- की सांसे बीच में अटक गई है। जबकि वही ब्रॉडकास्टर बीच में लटक गए है और विदेशी कम्पनियां जो घात लगाए बैठी थी, उन्हें सांप सूंघ गया प्रतीत होता है।
यात्र अभी भी जारी है, जबकि केबल टी-वी- ऑपरेटर फिर से सवालों की गठरी लिए देशभर में चेतना यात्र की बाट जोह रहे है। लगातार की जा रही ‘चेतना यात्र’ का यह दसवां वर्ष है। इसकी शुरूआत पूर्व में की गई यात्रओं से कई मामलों में अलग हटकर हुई है। इतने सालों से लगातार की जा रही ‘चेतना यात्र’ में पहली बार ऐसा हुआ है कि स्वंय सूचना व प्रसारण मन्त्री श्री प्रकाश जावडेकर जी ने फ्रलैगाफ कर यात्र की रवानगी की। माननीय मन्त्री महोदय जी ने यात्र के साथ अपना विशेष सन्देश भी विडियो रिकार्डिंग करवा कर दिया है, मन्त्री जी का सन्देश सुन कर वाकई ऑपरेटरों में सकारात्मक उर्जा का संचार होते हम महसूस कर रहे है। पूरी तरह से निराशा के अंधेरे में डूब चुके केबल टी-वी- ऑपरेटरों में एक नया उत्साह व जोश देखा जा रहा है।
ऑपरेटर भी अपना संदेश अब मन्त्री जी तक पहुंचाने की मांग करने लगे है, अतः उनके द्वारा लिखे गए सन्देशो को भी हम माननीय मन्त्री जी को पहुँचाने का प्रयास करेंगे।
इतिफाक कहें या फिर प्राकृति की नीयति कि सूचना प्रसारण मन्त्री श्री प्रकाश जावडे़कर जी ही पर्यावरण वन एंव ससंदीय कार्यमन्त्री का दायित्व भी सम्भाल रहे है। जबकि चेतना यात्र 10 ‘गो ग्रीन,गो डिजीटल’ के अर्न्तगत की जा रही है। माननीय मन्त्री जी ने डिजीटल इण्डिया के साथ-साथ पर्यावरण बचाने के लिए भी अपने सन्देश में सबको योगदान देने के लिए आहवाहन किया है। देशभर में इस तरह से एक बहुत अच्छा संदेश पहुँचाने का इस चेतना यात्र को अवसर मिला है। सभी जगह बड़ी गम्भीरता के साथ माननीय मन्त्री श्री प्रकाश जावड़ेकर जी का संदेश सुना जा रहा है। साथ ही देशभर के दूरदर्शन केन्द्रों को भी इस ‘चेतना यात्र’ में सहभागी बनने के लिए दिए गए निर्देश के कारण जिन क्षेत्रें से भी यात्र गुजर रही है उसके आस-पास के क्षेत्रें से भी दूरदर्शन अधिकारी यात्र में मिल रहे है। दूरदर्शन अधिकारियों के साथ केबल टी-वी- ऑपरेटरों की बैठक के परिणाम आश्चर्यजनक सफलता की ओर बढ़ रहे है। दोनो के बीच बहुत ही बेहतर सामंजस्य स्थापित हो रहा है, जिसकी जरूरत बीते 20-25 सालों से थी, लेकिन कहीं से भी इसकी शुरूआत नहीं हो सकी थी सिवाए शिकायतों के। केबल टी-वी- ऑपरेटरों में भी मन्त्री जी का सन्देश सुनकर उत्साह पैदा हो रहा है कि आखिर कोई तो है जो उनके भविष्य के बारे में भी सोच रहा है।
ऑपरेटर अपनी बात भी माननीय मन्त्री जी को पहुँचाने का आग्रह करने लगे तब हमने बाकायदा उनसे अपना पक्ष मन्त्री जी के सम्मुख रखने के लिए लिखने का निमन्त्रण दिया। इसी के साथ-साथ देश के प्रधानमन्त्री माननीय श्री नरेन्द्र मोदी जी के ड्रीम प्रोजक्ट डिजीटल इण्डिया में देश भर के केबल टी-वी- ऑपरेटरों की भागीदारी के लिए ऑपरेटर बहुत उत्साहित दिखाई दे रहे है, अतः ऑपरेटरों को अपने नैटवर्क को ब्राडबैण्ड हेतु अपग्रेड किए जाने की जरूरत भी स
दिए गए अपने सन्देश में पर्यावरण पर बहुत स्पष्ट कहा गया है, उन्होंने सबसे वृक्ष लगाने की अपील भी की है।
इसी सन्दर्भ में आगे बढ़ते हुए इस यात्र में पृथ्वी दिवस (28 मार्च -2015) के अवसर पर सभी से ऊर्जा बचाओ के अर्न्तगत एक घण्टे के लिए बिजली को उपयोग ना करने के लिए शपथ भी दिलाई जा रही है।
दूरर्शन अधिकारी हो या फिर केबल टी-वी- ऑपरेटर एम-एस-ओ- सभी से 28 मार्च 2015 को पृथ्वी दिवस के अवसर पर एक घण्टे के लिए पूरी तरह से बिजली से चलने वाले सभी उपकरण टी-वी-, फ्रिज, एयर कण्डीशन, स्टुडियो आदि बन्द रखने के साथ-साथ उनसे जुड़े समस्त लोगो से भी (केबल टी-वी- उपभोक्ताओं) उर्जा बचाओं योजना में शामिल होने के लिए प्रेरित करने का प्रयास करेगे। इस तरह से बहुउद्देश्यों को साथ लेकर की जाने वाली चेतना यात्र 10 निरन्तर अपने मार्ग पर आगे बढ़ती जा रही है।
सूचना व प्रसारण मन्त्री श्रीमति सुषमा स्वराज जी के समक्ष केबल टी-वी- आपरेटरों की राष्ट्रीय सस्ंथा ‘आल इण्डिया आविष्कार डिश एण्टिना संघ के अध्यक्ष डॅा-ए-के- रस्तोगी जी ने केबल की दरों में वृद्धि के कारणों को स्पष्ट तरीके से रखा कि पे चैनलों की सख्ंया के साथ-साथ उनके द्वारा की जाने वाली उगाही में निरन्तर वृद्धि होती जा रही है, जिसे अब और बर्दास्त नहीं किया जा सकता है, इसीलिए उपभोक्ताओं को सहभागी बनाने का निर्णय लिया गया है। जैसे कि भोजन की थाली में नाना प्रकार के व्यंजन परोसे जा रहे थे, लेकिन उनकी कीमत नामात्र ही वसूली जा रही थी, जबकि अब कई और व्यंजना को भी उनकी थाली में परोस दिया जा रहा है, लेकिन शुल्क वही पुराना वाला लिया जाता रहे, ऐसा अब सम्भव नहीं रह गया है।

डैस का प्रथम चरण पूर्ण नहीं हो सका, लेकिन सरकार इसके द्वितीय चरण को लागू करवाने पर पहुंच गई, जो कि अब सितम्बर के बाद तृतीय एंव दिसम्बर 2014 तक पूरे भारत में लागू हो जाना था। फिर से देश में आम चुनाव हुए है, फिर एन-डी-ए- सरकार का राज आया है, अतः यू-पी-ए- की सरकार द्वारा धकेले जा रहे डैस कानून पर थोड़ा ब्रेक सा लगा है। अब 2014 में नहीं बल्कि इसकी अन्तिम समय सीमा फिलहाल 2016 की गई है जबकि तृतीय चरण के लिए 2015 कहा गया है। केबल टी-वी- आपरेटरों ने बहुत बड़ी राहत की सांस ली है, लेकिन एम-एस-ओ- की सांसे बीच में अटक गई है। जबकि वही ब्रॉडकास्टर बीच में लटक गए है और विदेशी कम्पनियां जो घात लगाए बैठी थी, उन्हें सांप सूंध गया प्रतीत होता है। यात्र अभी भी जारी है, जबकि केबल टी-वी- आपरेटर फिर से सवालों की गठरी लिए देशभर में चेतना यात्र की बाट जोह रहे है। लगातार की जा रही ‘चेतना यात्र’ का यह दसवां वर्ष है।

दिल्ली से शिमला (भांग-2)
मननीय मन्त्री महोदय श्री प्रकाश जावड़ेकर जी द्वारा फ्रलैगअॅाफ के बाद आरम्भ हुई ‘चेतना यात्र-10’ दिल्ली एन-सी-आर- व केबल टी-वी- ऑपरेटरों से विदाई एंव शुभकामनाएँ लेते हुए अपने क्षेत्र के निगम पार्षद व विधायक सहित रैजीडैन्शल वैल्फैयर एसोसिएशन और परिवार से भी शुभकामनाएँ प्राप्त कर 5जी सितम्बर 2014 की सुबह अपने गंतव्य की और रवाना हो गई। दिल्ली से निकलकर यात्र पड़ोसी राज्य हरियाणा में पहुंची सबसे पहले रोहतक में सिटी केबल के मि- नरेश जैन के साथ आमन्त्रित वहां के अन्य केबल टी-वी- ऑपरेटरों ने गर्म जोशी के साथ स्वागत किया। यात्र के स्वागत कार्यक्रम के साथ-साथ दूरदर्शन अधिकारियों के साथ केबल टी-वी- ऑपरेटरों की बैठक भी सिटी केबल रोहतक के स्टूडियों में रखी गई। हरियाणा में दूरदर्शन केन्द्र केवल हिसार में ही है अतः दूरदर्शन अधिकारी हिसार से रोहतक पहुँचे। केबल टी-वी- ऑपरेटरो के साथ इस तरह की पहली बार दूरदर्शन अधिकारियों की बैठक आयोजित की गई थी, अतः दोनो ओर कोतुहल भी बराबर ही था। दोनो यह जानने के लिए बहुत उत्सुक थे कि ऐसी बैठक का प्रयोजन क्या है\ यात्र का स्वागत तो केबल टी-वी- ऑपरेटरों ने पूर्व में भी किया है लेकिन इस बार दूरदर्शन अधिकारियों को भी बुलाया गया है यह जानने की केबल टी-वी- ऑपरेटरो में बहुत उत्सुकता थी, जबकि दूरदर्शन अधिकारियों के लिए तो सब कुछ बिल्कुल नया-नया ही था। उन्हें इस यात्र के बारे में ऊपर से निर्देश क्यों आया है, यह जानने के लिए वह भी बहुत ज्यादा उत्सुक थे।
स्वागत-सत्कार के बाद केबल टी-वी- ऑपरेटर एवं दूरदर्शन अधिकारियों के साथ पहली बार आपसी तालमेल व दोनो के बीच साम्ंजस्य स्थापित करने का श्रेय मन्त्री श्री प्रकाश जावड़ेकर जी को जाता है कि उन्होंने केबल टी-वी- ऑपरेटरों के विरूद्ध की गई दूरदर्शन अधिकारियों की शिकायत पर 8 अगस्त को सूचना व प्रसारण मन्त्रलय में एक विशेष बैठक बुलाकर इस सन्दर्भ में समस्या को जानने की कोशिश ही नहीं की बल्कि तुरन्त समाधान की ओर भी कदम बढ़ा दिए। उस बैठक में डी-टी-एच- ऑपरेटरों के साथ एम-एस-ओ- को भी मन्त्रलय बुलाया गया एंव देशभर के केबल टी-वी- ऑपरेटरों का प्रतिनिधित्व केबल टी-वी- ऑपरेटरों की राष्ट्रीय सस्ंथा (सन् 1993 में स्थापित) ‘आल इण्डिया आविष्कार डिश एण्टिना संघ के अध्यक्ष डॅा- ए-के-रस्तोगी जी ने किया था। दूरदर्शन की समस्या के अतिरिक्त देश भर के केबल टी-वी- ऑपरेटरों का पक्ष भी डॅा-रस्तोगी जी ने वहां बड़ी मजबूती के साथ रखा था।
माननीय मन्त्री जी ने बड़ी गम्भीरता के साथ सब की बातों को सुना समझा एंव तुरन्त ही समाधान की दिशा मे बढ़ते हुए जो भी आवश्यक था निर्देश दे दिए थे। उसी के अर्न्तगत उन्होंने ‘चेतना यात्र 10’ की शुरूआत स्वंय करने की सहमति के साथ-साथ एक विशेष सन्देश भी रिकार्ड करवा कर साथ में दिया, जिसे देश के कौने-कौने में विध्मान केबल टी-वी- ऑपरेटरों तक पहुँचाने का निर्देश भी उन्होंने दिया।
केबल टी-वी- ऑपरेटरों एंव दूरदर्शन अधिकारियों के बीच सामंजस्य स्थापित करने एंव उनकी समस्याओं का निदान करने के साथ-साथ माननीय प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के द्वारा स्वतन्त्रता दिवस के अवसर पर लालकिले की प्राचीर से कहा गया ‘डिजीटल इण्डिया’ के ड्रीम प्रोजक्ट पर आगे बढ़ने के लिए भी सबको प्रोत्साहित करने का दार्यित्व ‘गो ग्रीन गो डिजीटल’ के अर्न्तगत की जाने वाली ‘चेतना यात्र 10’ के सुपुर्द किया गया। मन्त्री महोदय द्वारा दिए गए सन्देश में पर्यावरण बचाने के लिए भी सब से सहयोंग देने के लिए भी आहवाहन किया गया है, जिसका प्रभाव सन्देश सुनने वालों पर स्पष्ट दिखाई दे जाता है, क्योंकि मन्त्री जी का सन्देश सुनने के बाद सुनने वालो की प्रतिक्रिया में डिजीटल इण्डिया के साथ पर्यावरण की रक्षा पर भी बाते की जाती है। वृक्षारोपण पर चर्चाए होती है। हरेक बैठक में दूरदर्शन अधिकारियों को पूर्णतया सन्तुष्टि होती है, उन्हे प्रतीत होता है कि ऑपरेटरों के साथ उनकी ऐसी बैठक इतनी देर से क्यों हुई यह तो बहुत पहले होनी चाहिए थी। दोनो पक्ष आपस में बड़ी आसानी से खुलकर अपनी-अपनी बातों को रख रहे है एंव इस प्रयास के द्वारा दोनो को एक दूसरे के बहुत निक्ट आने का अवसर मिला है। अभी तक की गई दोनो की मीटिंग के परिणाम आश्चर्यजनक और सकारात्मक प्राप्त हुए है।
रोहतक यात्र के दौरान भारी बारिश होती रही, जो कि रोहतक से रवाना हो जाने तक भी जारी थी। हरियाणा में दूरदर्शन केन्द्र केवल हिसार में ही है, वहां से मीटिंग में भाग लेने के लिए श्री जिले सिंह झाकड़ व कैमरामैन अश्वनी शर्मा के साथ रोहतक पहुंचे। बहुत ही गम्भीर वार्तालाप दोनो पक्षो में हुआ, मीटिंग के सकारात्मक परिणाम भविष्य में दिखाई देंगे।
क्क् द्वारा मीटिंग की कवरेज भी की गई। शीघ्र ही लगातार हो रही बारिश में रोहतक से सबकी शुभकामनाएँ समेट कर यात्र जींद पहुंची, जहां केबल टी-वी- ऑपरेटर मि- रामफूल फोर अन्य साथियों के साथ स्वागत के लिए प्रतीक्षारत थे। जींद के ऑपरेटरों की शुभकामनाएँ साथ लिए यात्र हरियाणा से सीधे पंजाब की ओर बढ़ चली जहां फास्टवे प्रमुख श्री गुरदीप सिंह एंव पंजाब दूरदर्शन केन्द्र जालन्धर
अधिकारी श्री सतीश भाटिया के साथ लुधियाना में मीटिग रखी गई थी। विशेष दौरे पर दूरदर्शन अधिकारी श्री सतीश भटिया जी जालन्धर से लुधियाना पधार रहे थे। किसी सरकारी आफिसर के लिए अपनी रैग्यूलर ड्यूटी के बाद रात्रि मे दूसरे शहर जाना पड़े तो परेशानी होना स्वाभाविक है, लेकिन मि- भाटिया जी के साथ भेंट होने पर ऐसा बिल्कुल नहीं लगा। हरियाण से पंजाब में लुधियाना पहुंचने तक लगातार बारिश भी जारी रही अतः थोडी देर से यात्र लुधियाना पहुंची जहां बड़ी बेसब्री से सभी यात्र की प्रतीक्षा कर रहे थे। पंजाब केबल टी-वी- ऑपरेटर एसोसिएशन के अध्यक्ष स- सन्नी गिल के साथ वहां के अन्य ऑपरेटरो द्वारा यात्र का गर्म जोशी के साथ स्वागत किया गया।
फास्टवे प्रमुख श्री गुरदीप सिंह भी यात्र की प्रतीक्षा में अभी ऑफिस में ही मौजूद थे एंव वहां के अन्य प्रमुख सरनजीत सिंह राजू, राजवन्त सिंह (राजा), बाबा जी आदि सहित पियूष (सी-ई-ओ- फास्टवे) जी भी वही प्रतीक्षारत थे। दिल्ली के मन्नी भाई जी, एस ओबराय भी गुरदीप जी के साथ मीटिंग में शामिल रहे। दूरदर्शन जालधर से लुधियाना पधारे श्री सतीश भाटिया जी ही वहां के नोडल ऑफिसर का भी दायित्व सम्भाल रहे है। भाटिया जी ने बताया कि फास्टवे पूरी तरह से केबल टी-वी- एक्ट के अनुसार दूरदर्शन चैनलों का प्रसारण कर रहे है, उनसे कोई शिकायत नहीं है। वैसे भी फास्टवे डिजीटल पर चले गए है तो डिजीटल में स्पेस की तो कोई कमी नहीं होती है। प्रॉब्लम ज्यादातर एनॉलाग में होती है। भाटिया जी ने बताया कि पंजाब में कहीं-कहीं एनॉलाग प्रसारण भी हो रहा है वहां से शिकायते मिल रही है कि दूरदर्शन चैनलों का प्रसारण कानून के अनुसार नहीं किया जा रहा है। फास्टवे नैटवर्क पर प्रसारित किए जाने वाले चैनलों का ताजा चैनल मैपिंग चार्ट दूरदर्शन अधिकारियों को दिए जाने एंव भविष्य में भी आपस में सामंजस्य बनाए रखने के लिए सहमति बनी। पूर्णतया सकारात्मक परिणाम भविष्य में आंएगे इस प्रयास से ऐसा दूरदर्शन अधिकारी श्री सतीश भाटिया जी ने देर रात मीटिंग से वापिस जालंधर जाते हुए कहा, जबकि गुरदीप जी का कहना था कि हमारा प्रसारण डिजीटल मोड़ में है, हमे दूरदर्शन के 24 चैनल क्या ज्यादा भी हो तो प्रसारण में कोई परेशानी है ही नहीं, हमारे पास स्पेस की कोई कमी नहीं है।
हम तो अपने कई लोकल चैनल भी प्रसारित कर रहे है। हमने पंजाब के प्रमुख गुरूद्वारो, मन्दिरों सहित अन्य अनेक ऐसे सस्थानो को प्रसारण से जोड़ा हुआ है, जिसे लोग देखना चाहते है। फाइबर आप्टिक के द्वारा वह 24 सौ घंटों गांव-2 तक जुड़े हुए है। पंजाब में होने वाली तमाम एक्टिविटीज को वह कवर करते है।
शनिवार-रविवार को पंजाब में इन्टरनेश्नल कबड्डी प्रतियोगिता में गुरदीप सिंह व्यस्त हो जांएगे, क्योंकि वह आर्गेनाइज टीम में शामिल है, अतः देर रात तक वह स्वंय मीटिंग में शामिल रहे। मीटिंग आधी रात के बाद खत्म हुई तब पंजाब केबल टी-वी- ऑपरेटरों की एसोसिएशन के अध्यक्ष स- सन्नीगिल हमे होटल फार्चून में रात्रि विश्राम के लिए प्रबन्ध कर रात को ही अपने घर लुधियाना से दूर शहर मोगा के लिए रवाना हो गए। जाते-जाते उन्होंने गुरदीप सिंह जी के द्वारा दिए गए विशेष निदेंश पर एक लाख रूपए का एक चैक भी भेट किया। चेतना यात्र के दौरान यात्र में अपनी आहुती भी डालने की जिम्मेदारी देश के अनेक ऑपरेटर उठाते है, इसी के अर्न्तगत फास्टवे की भेट को स्वीकार कर यात्र लुधियाना से आगे रवाना होने से पूर्व पंजाब के केबल टी-वी- ऑपरेटरों के साथ भी एक मीटिंग अगली सुबह तय हो गई।
फास्टवे के आफिस में ही पंजाब के तमाम केबल टी-वी- ऑपरेटरों का इकट्ठे होने का सिलसिला सुबह से ही शुरू हो गया था। सुबह 11 बजे तक बड़ी संख्या में ऑपरेटर मीटिंग में पहुंच चुके थे, अतः सबसे पहले उन्हे माननीय मन्त्री सूचना व प्रसारण मन्त्रलय के मन्त्री श्री प्रकाश जावड़ेकर जी द्वारा दिया गया सन्देश सुनाया। मन्त्री जी का सान्देश हरियाणा में रोहतक व जींद की मीटिंग में भी सुनाया गया था। सन्देश के बाद केबल टी-वी- ऑपरेटरों के साथ उनकी परेशानियों पर बाते हुई। पंजाब के ऑपरेटरो ने बताया कि वह अपने उपभोक्ताओं से 260/- मासिक ले रहे है, कोई कॉम्पिटिशन भी अब नहीं रहा है, लेकिन फास्टवे उनसे 110/- प्रति सैट्टॉप बॉक्स वसूल करता है। जबकि अन्य राज्यों में कम लिया जाता है। आदि अनेक तरह की उनकी परेशानियों को सुनने के बाद उन्हें तमिलनाडू की स्थिती से अवगत करवाया गया, जहां मात्र 70/- रूपए ही उपभोक्ता से लिए जा सकते है और 70/- में से 20/- रूपए अरासु केबल को भी भुगताने होते है। जबकि पंजाब जैसी स्थिती तो देश में कहीं भी नहीं है। कम्प्टीशन भी देश के हर हिस्से में आए दिन होता ही रहता है। पंजाब के ऑपरेटरों को परेशान होने का कोई कारण नहीं दिखाई देता, क्योंकि 280/-में से 110/-लेन के बाद भी ऑपरेटरों को 150/-रूपए प्रति उपभोक्ता मिल रहा है तो यह फिलहाल कम नहीं है।
केबल टी-वी- ऑपरेटरों को तकलीफ केबल देने की है, क्योंकि एनॉलाग में वह लमसम भुगतान करता आ रहा था। कनैक्शनों की पूरी संख्या के हिसाब से उसने कभी कोई भुगतान किया ही नहीं था, लेकिन डिजीटाइजेशन के बाद प्रति सेट्टॉप बॉक्स के हिसाब से उसे भुगतान करना पड़ रहा है। ऑपरेटरों को यह समझना चाहिए कि मुफ्रत में अब कोई भी अपना माल नहीं देगा। आपरेटरों को यह भी समझना होगा कि अब सरकार भी उनके व्यवसाय में हिस्सेदार बन गई है, अतः सरकार ने कानून को कुछ इस तरह से बनाया है कि गुंजाईश ही ना रहे। डिजीटल को दूसरे शब्दों में पारदर्शिता भी कहा जा सकता है। केबल टी-वी- व्यवसाय में डिजीटाईजेशन के अर्न्तगत जब पूर्णरूप से पारदर्शिता आ जाएगी तब एक भी कनैक्शन छुपा नही रह सकता है। एंव किस उपभोक्ता से कितना लिया जा रहा है, यह भी स्पष्ट हो जाएगा तब सबको अपना-अपना हिस्सा भी मिल जाएगा। अतः झगड़े की गुंजाईश ही नहीं रहेगी। केेन्द्रीय सरकार के हिस्से के मामले में भी सरकार ने तो अपना हिस्सा 12-36 सर्विस टैक्स के रूप में तय कर रखा है, जबकि राज्य सरकार अपने हिसाब से मनोरंजन कर वसूल कर रही है।
प्रति उपभोक्ता अर्थात प्रत्येंक सैट्टॉप बाक्ॅस के अनुसार कितनी राशि प्राप्त हुई, उसमे से सरकार का हिस्सा निकाल देने के बाद पे चैनलों का हिस्सा दे देने के बाद कण्डीश्नल एक्सेस सिस्टम (कैस) एंव एस-एम-एस- (ेउे) का भी मासिक भुगतान जाना है। इसके बाद सैट्टॉप बॉक्स पर लिए गए लोन की किश्त चुका देने के बाद एम-एस-ओ- के आफिस खर्चो की बारी आएगी, तब कहीं जाकर यह तय हो सकेगा कि इतना विस्तार कर उसे प्राप्त क्या हुआ। केबल टी-वी- ऑपरेटरों की भी यही स्थिति है। उसे भी प्रति सैट्टॉप बाक्ॅस क्या प्राप्त हुआ। क्योंकि अपने नैटवर्क की मैन्टीनैंस के साथ- साथ बिजली के किराये भरने के आलावा उसके ऑफिस के खर्चे भी तय है, कर्मचारियों की सैलरी निबटाने के बाद एम-एस-ओ- अगर सौ-सवा-सौ रूपए में ऑपरेटर को निबटा देना चाहता है तो सरकार का हिस्सा निकाल देने के बाद पे चैनलों को वह कितने में निबटाएगा यह महत्वपूर्ण है क्योंकि उसके भी बाकी खर्चे फिक्स है। मानाकि कैरिज और विज्ञापनों से भी एम-एस-ओ- को प्राप्ती होती है, यह ना हो तो वह भी पूरी तरह से उपभोक्ताओं से की जाने वाली उगाही पर ही निर्भर हो जाएगा, तब मुश्किले और भी बढ़ जाएगी।
आवश्यक है कि सभी हिस्सेदार सिर्फ अपने-अपने फायदे की ना सोचे बल्कि सर्वहित की सोचे तब यह केबल टी-वी- एक व्यवसाय की तरह से हो सकता है जबकि अभी तो अपनी- अपनी झोली भर लेने के चक्कर में सबके बीच तनातनी चल रही है।
पंजाब के केबल टी-वी- ऑपरेटर हो या फिर तमिलनाडू के कहीं भी शान्ति नहीं है। शिकायतों की कहीं कोई कमी नहीं है। झगड़ने के और भी अनेक कारण है। अतः सबके बीच बेहतर सुखद पूर्ण तालमेल की जरूरत है। पैसा उपभोक्ता की जेब से ही आएगा, तभी सब में बंट पाएगा। उपभोक्ता से वसूली बढ़ाए बिना आपसी झगड़े निबट पाने बहुत कठिन होंगे। लुधियाना मीटिंग काफी लम्बी हो गई, जबकि आज जम्मू पहुचानी थी यात्र। जम्मू में दूरदर्शन केन्द्र में आपरेटरों एंव दूरदर्शन अधिकारियों की मीटिंग भी फिक्स थी, वहां कल सुबह की मीटिंग रखी हुई है। इसी बीच जानकारी मिल रही है कि जम्मू भी भयंकर बाढ़ की चपेट में आ गया है। प्राकृतिक आपदा का कहर भारी बाढ़ के रूप में पूरे जम्मू-कश्मीर पर टूटा है। इस सदी की सबसे भयंकर बाढ़ आई है, पूरे जम्मू व कश्मीर में। जम्मू जाने के रास्ते भी क्षतिग्रस्त हो चूके है। जम्मूतवी पुल भी बाढ़ में बह गया है अतः वहां के हालात बहुत ज्यादा बिगड़ गए है। जम्मू-कश्मीर में आई भयंकर बाढ़ के कारण जम्मू नहीं जा सकी यात्र। लुधियाना में ही के-पी-एस- बाबा की बेटी की शादी को भी अटैण्ड किया, उन्हे ढ़ेर सारी बधाई शुभकमनाएँ देकर यात्र
सीधे पठानकोट पहुंची। पठान कोट दूरदर्शन केन्द्र में मीटिंग रखी गई थी। दूरदर्शन चैनलों के प्रसारण पर पठानकोट दूरदर्शन केन्द्र को भी कोई शिकायत नहीं मिली, क्योंकि पठानकोट में भी फास्टवे लुधियाना की ही फीड चलाई जा रही है। फास्टवे के प्रतिनिधी राजेन्द्र कुमार मेहता स्वंय दूरदर्शन केन्द्र मीटिंग में पहुंचे जहां दूरदर्शन अधिकारी सतपाल (।म्) जी के साथ केबल टी-वी- एक्ट का पालन करने पर बैठक हुई। केबल टी-वी- ऑपरेटर पठान कोट की ओर से केशव चन्दर सिंह ने प्रतिनिधित्व किया। थोड़ी बहुत शिकायतों का निवारण कर यात्र अगले पड़ाव की ओर बढ़ी तो पठान कोट केबल टी-वी- ऑपरेटरों के प्रधान राजकुमार गुप्ता से भी भेंट हुई। आपरेटरों की समस्याओं पर चर्चा के बाद यात्र पठान कोट से पालमपुर सन्दीप कक्कड़ से एंव मण्डी मे शरद मल्होत्र से भेट कर शिमला पहुंची जहां दूरदर्शन केन्द्र में मीटिंग रखी गई थी। इसी मार्ग में एक मीटिंग दूरदर्शन केन्द्र धर्मशाला में भी लक्षमन कुमार (क्ल क्पत) के साथ अन्य ऑपरेटरों की उपस्थिती में हुई। धर्मशाला दूरदर्शन केन्द्र मे केबल ऑपरेटर ललित शर्मा, अश्वनी ठाकुर, विजय कुमार, ओकारराना एंव विपुल भगत आदि शामिल रहे। यहां से आगे के वृतान्त के लिए कृप्या अगले अंक की प्रतीक्षा कीजिए।

शिमला से पटना (भाग 3)
प्रकृतिक आपदा से जूझ रहे जम्मू व कश्मीर के हालात काफी खराब है, तमाम मार्ग अवरूद्ध हो गए है, लोग जहां थे वही फंस कर रह गए है, जबकि भारी जानमाल का नुकसान होने की भी खबरें वहां से लगातार आ रही है, लेकिन सेना ने वहां सेवा के लिए मोर्चा सम्भाल लिया है। देश के गृह मन्त्री श्री राजनाथ सिंह के दौरे के बाद तुरन्त ही, माननीय प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का वहां जाना बताता है कि स्थितियां बहुत गम्भीर है। ऐसी विषम स्थितियों में चाह कर भी यात्र अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रमानुसार जम्मू व कश्मीर नहीं जा सकी जबकि दिल्ली से रवाना होने के बाद यात्र का 5 सितम्बर को पहला हाल्ट लुधियाना तो 6 सितम्बर को दूसरा हाल्ट जम्मू में था। जम्मू से ऊधमपुर-किश्तवार अनन्तनाग होते हुए 7 सितम्बर को तीसरा हाल्ट श्रीनगर में था। 8 सितम्बर को श्रीनगर से पुंछ राजोरी नौशेरा से वैष्णो देवी दर्शन कर 9 सितम्बर को वहां से कटरा जम्मू होकर पठानकोट हाल्ट करना था। वहां से नूरपुर, शहपुर धर्मशाला, पालमपुर, हमीर पुर होते हुए बिलासपुर हाल्ट लेना था। बिलासपुर से 11 सितम्बर को शिमला पहुँचनी थी यात्र, लेकिन जम्मू व कश्मीर में ना जाने के कारण हमारे पूर्व निर्धारित यात्र कार्यक्रम बिगड़ गया। लुधियाना से रवाना होने के बाद जम्मू ना जाकर 6 सितम्बर को सीधे पठानकोट हाल्ट मारना पड़ा जबकि 9 सितम्बर को वहां पहुँचनी थी यात्र। पठानकोट में 10 सितम्बर को होने वाली मीटिंग को 7 सितम्बर को बुलाया गया, लेकिन पठानकोट से आगे किस तरह से बढ़ा जाए यह एक बड़ा सवाल बनकर खड़ा हो गया, क्योकि यात्र के आगे के कार्यक्रमों के लिए सभी को सूचना दे दी गई है। पठान कोट से आगे बढ़ने से पूर्व दिल्ली से कुछ जरूरी सामान लेकर पठानकोट पहुंचे तिलकराज को वापिस दिल्ली के लिए विदा कर मीटिंग लेते हुए सीधे धर्मशाला मैक्लोरगंज पहुंची। मैक्लोरगंज दलाईलामा का केन्द्र है, जहां विश्वभर से आने वाले उनके श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। मैक्लोरगंज व धर्मशाला दोनो ही विश्वभर के पर्यटकों को आकर्षित करते है अतः यहा होटल्स की कोई कमी नही है। यहां का मौसम और वादियां बहुत खूबसूरत है। प्राकृति की इसी खूबसूरती में मित्र रवि भटनागर जी का एक होटल द बेला हाईटस पठानकोट से अगला पड़ाव बना। द बेला हाईटस पूरी तरह से तमाम आधुनिक सुंविधाओं से सुसज्जित होने के साथ वहां एक बहुत अच्छी लोकेशन पर स्थित था। इस होटल में ऊपर-नीचे आने-जाने के लिए लिफ्रट भी लगी थी एंव इसकी छत पर बने रैस्=ाां से प्राकृति के सौन्दर्य के नजारें हर क्षण बदलते फोटोग्राफी के लिए अद्भुत थे। रात्रि विश्राम कर अगले दिन प्रातः धर्मशाला के दूरदर्शन केन्द्र में मीटिंग से निबट कर सीधे मण्डी के लिए रवाना हुई यात्र लेकिन समय अब अतिरिक्त हो गया था अतः प्राकृतिक सौन्दर्य की गोद में रात्रि विश्राम जोगिन्दर नगर में स्थित हिमाचल टूरिज्म का पर्यटन निवास यूएचएल में किया। हिमाचल टूरिज्म के विश्राम स्थल का नाम यूएचएल एक जिज्ञासा पैदा करता था अतः सुबह जानकारी मिली कि यहां से ऊपर इस नाम से एक नदी निकलती है जो ऊपर ही ऊपर आगे तक चली जाती है उसी नदी के नाम पर यहां के विश्राम स्थल का नाम भी रखा गया।
जोगिन्दर नगर से पहले पालमपुर के ऑपरेटर संजीव जी से भी भेंट की गई, क्योंकि इण्डष्ट्री के बदलते दौर में हिमाचल में अभी भी वह हैथवे की मौजूदगी बनाए हुए है। पेशे से संजीव जी चार्टेड अकाउनटेन्ट हैं, लेकिन केबल टी-वी- में वह नए नहीं है। पालमपुर से सीधे मण्डी पहुंची यात्र, जहां मण्डी के ऑपरेटर शरद मल्होत्र द्वारा यात्र का गर्मजोशी के साथ स्वागत किया गया। मण्डी मीटिंग के बाद यात्र मनाली की और रवाना हुई। मण्डी की ओर से होते हुए खूबसूरत वैली कुल्लू पहुंची यात्र। कुल्लू के आपरेटरों से मिलकर तकलीपुल में अजय शर्मा द्वारा यात्र का जोरदार स्वागत किया गया, उन्होंने ही मनाली में यात्र विश्राम की तैयारी की। मनाली के एक खूब सूरत होटल स्नोक्रस्ट में आरामदायक विश्राम किया। यह होटल वहां के बाजारों की किच-किच से बहुत दूर था। इस होटल में पहुंचना आम टूरिस्ट के लिए बहुत ही कठिन है, लेकिन जिसकी वहां पहले से ही बुकिंग है वह भी बिना वाहन के वहां नहीं पहुंचना चाहेगा। बहुत ही खूब सूरत बादियों से घिरा हुआ काफी खड़ी चढ़ाई के बाद ऊपर स्थित है। होटल स्नोक्रस्ट प्राकृति के बहुत खूबसूरत नजारे यहां से दिखाई देते है। मनाली स्वंय में बहुत खूबसूरत प्राकृतिक सौन्दर्य से भरा हुआ है। यहां के लोग भी उतना ही आकर्षण रखते है। यहां के एक पुराने केबल टी-वी- ऑपरेटर इक्बाल सिंह शर्मा से हुई मुलाकात भी इस यात्र के लिए विशेष स्मृतियों में शामिल है। इकबाल भाई एक ब्राहमण परिवार के सदस्य है वह एडवैंचर स्वभाव के है। उनके एडवैंचर किस्से आपके समय के बीतने का आभास भी नहीं होने देगे। शिमला के लिए उन्होंने हमारे एडवैचर स्वभाव के हिसाब से एक नया मार्ग नागर, बंजार, सोझा, अनि, लुहरी, सोंज, नरकण्डा के रास्ते थियोग होते हुए कुफरी से शिमला सुझाया।
इकबाल सिंह शर्मा द्वारा सुझाए गए मार्ग पर मनाली से शिमला के लिए शुरू हुई यात्र का हरेक पल, हरेक किलोमीटर नए एडवैंचर से ढैर सारी यादों के साथ सदैव हमारे साथ रहेगा। हम कोशिश करेंगे कि भविष्य में केबल टी-वी- व्यवसाय में संलग्न अपने अन्य मित्रें को भी ऐसे एडवैंचर टूर का हिस्सा बनाएँ। देवदार के घने व्यावान जंगल के बीच से होकर गुजरता हुआ यह मार्ग वाकई साहसिक
धुमक्कड़ों के लिए ही बना हुआ है। वहां की यादें अदृभुद है, लेकिन ड्राईविंग में पूर्ण निपुण एंव अनुभवी ही इस मार्ग से सफलता पूर्वक सफर कर सकते है। मनाली से रवाना होने पर मार्ग के दोनो ओर लगे सेबों के वृक्ष बार-बार आकर्षित कर रहे थें एंव सेब से लदे वृक्षों से तोड़कर किस तरह से इन्हें दूरदराज बैठे उपभोंक्ताओं तक पहुंचाया जाता है, यह देखना व जानना भी इस यात्र का सुखद हिस्सा बना। भाई इकबाल सिंह शर्मा एक ब्राहमण परिवार से है, उन्होंने बताया कि यहां (मनाली) हिडम्बा का मन्दिर है जो कि हिडम्ब राक्षस कुल की थी। हिडम्बा-भीम के बारे में महाभारत में पूरा वर्णन है, उनका पुत्र घटोत्कच था जिसने महाभारत के दौरान कौरवों पर कहर ढ़ाया था। कुल्लू के महाराजा ने यह मन्दिर बनवाया था। दशहरा पर हिडम्बा रथ की सवारी निकाली जाती है, और बलि चढ़ाई जाती है। यहां पूर्व में भैसे की बलि चढ़ाई जाति थी, लेकिन अब बकरे की बलि दी जाती है।
यहीं गुरू वशिष्ट का कुण्ड (गर्म पानी का) है एंव गौतम ऋषि का मन्दिर है। ऋषि व्यासमुनि कुण्ड भी यहीं है। यहां का नाम मनु ऋषि से मनाली पड़ा था। यहां साण्डिल ऋषि मन्दिर भी है एवं जमदग्नि ऋषि (परशुराम पुत्र) मन्दिर, भृगु ऋषि लेक, ऋषि पराशर मन्दिर व लेक (क्लोटिंग आयरलैण्ड जो सदैव तैरता रहता है) यहीं भगवान शिव पुत्र कार्तिकेय मन्दिर भी है एवं मां गायत्री का मन्दिर भी है। मां रेनु का (परशुराम की मां) का स्थान भी हिमाचल में ही है इसीलिए देव स्थान कहा जाता है। मनाली में भाई इकबाल से बहुत सारी जानकारियां समेट कर उनके सुझाए मार्ग का आनन्द लेते हुए यात्र विश्राम स्थल ‘हाटो’ हमें मिल गया। ‘हाटो’ एक अच्छी लोकेशन पर स्थित है, लेकिन यह विभाग यदि प्राइवेट सैक्टर के सुपुर्द हो जाए तो बहुत कुछ बदल सकता है। बारहाल नारकण्डा से यात्र सीधे दूरदर्शन केन्द्र शिमला पहुंची, जहां सभी प्रतीक्षारत थे। शिमला दूरदर्शन केन्द्र में वहां के दोनो एम-एस-ओ- को निमन्त्रित किया गया था, लेकिन वहां केवल एक एम-एस-ओ- किशन सिंह चन्देल ही बिलास पुर से पहुंचे हुए थे। शिमला के प्रमुख एम-एस-ओ- मुकेश मल्होत्र जी को हमने मीटिंग में आने के लिए फोन किया तो वह शीघ्र ही स्वंय आ गए जबकि दूसरे एम-एस-ओ- खन्ना जी की फीड़ पंजाब के फास्टवे नैटवर्क से ही चलती है। दूरदर्शन अधिकारियों में श्री अमित टण्डन सहित अन्य अधिकारी भी मीटिंग में उपस्थित थे। माननीय मन्त्री श्री प्रकाश जावडेकर जी का सन्देश सुनने के बाद दोनो पक्षों के बीच बड़े सोहार्दपूर्ण माहौल में मीटिंग हुई। एक दूसरे की समस्याओं को समझने व सुलझाने पर सकारात्मक शुरूआत हुई। दूरदर्शन प्रोग्रामिंग हैड शिमला द्वारा रखी गई समस्याओं पर हिमाचल के एम-एस-ओ- श्री मुकेश मल्होत्र ने ट्रांसमिशन पर आने वाली समस्याओं को बड़े विस्तार से दूरदर्शन अधिकारियों के सम्मुख अपनी बात रखी। कुछ ऐसी समस्याएँ भी शिमला मीटिंग में सामने आई जिनका समाधान दिल्ली से ही हो सकेगा, लेकिन पहली बार एक अच्छी शुरूआत वहां उस मीटिंग से हो गई। मीटिंग के बाद वहां के दूसरे एम-एस-ओ- खन्ना जी से भेंट कर यात्र सोलन पहुंची जहां कसौली से आए दूरदर्शन अधिकारी प्रतीक्षा कर रहे थे। कसौली दूरदर्शन अधिकारी श्री राजेश कुमार ने बताया कि यहां के केबल टी-वी- ऑपरेटर पूर्णतया एक्ट का पालन करते हुए दूरदर्शन चैनलों का प्रसारण कर रहें है, नोप्रोब्लम। वहां के ऑपरेटरों का धन्यवाद कर यात्र सीधे चण्ड़ीगढ़ पहुंची।
हमेशा की ही तरह इस बार भी चण्डीगढ़ में रात्रि विश्राम हिमाचल भवन में हुआ। रात्रि में यात्र का स्वागत दिव्या व टशन चैनल के मालिक भाई सन्दीप बंसल ने किया। सन्दीप भाई के साथ चण्डीगढ़ में यात्र विश्राम का अधिक समय व्यतीत कर अगली सुबह एक नए पड़ाव की और यात्र बढ़ी। चण्डीगढ़ से आगे पंचकुला में भाई राजेश मलिक यात्र की बेसब्री से प्रतीक्षा कर रहे थे, लेकिन दूरदर्शन केन्द्र चण्डीगढ़ में दूरदर्शन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एम-एस-ओ- भी विशेष मीटिंग के लिए यात्र की प्रतीक्षा में थे। हिमाचल भवन से सीधे दूरदर्शन केन्द्र चण्डीगढ़ पहुंची यात्र वहां सुमित गोयल एंव अन्य दूरदर्शन अधिकारियों द्वारा यात्र का स्वागत किया गया। सभी के साथ बहुत ही सौहार्द पूर्ण वातावरण में एक सकारात्मक मीटिंग वहां हुई, जिसमें प्रोडकशन (कन्टेट्स) वालों ने भी भाग लिया। चण्डीगढ़ भी फास्टवे के ही सिग्नल टैलिकास्ट किए जाते है अतः फास्टवे नैटवर्क पहले से ही केबल टी-वी- एक्ट के अनुसार दूरदर्शन के चैनलों का भी प्रसारण कर रहा है। दोनो पक्षों के बीच हुई यह मीटिंग आपसी सम्बन्धों को मजबूत रखने की दिशा में एक बड़ी पहल साबित होगी जिसके भविष्य में बेहतर परिणाम आंएगे, जिसका लाभ दूरदर्शन चैनलों को प्राप्त होगा इसके साथ चण्डीगढ़ में इकोप्लान्टेशन भी की गई यह जानकर बहुत अच्छा लगा। चण्डीगढ़ दूरदर्शन केन्द्र में चण्डीगढ़ के मनमोहन सिंह बाजवा जी ने फास्ट वे का प्रतिनिधित्व किया। दूरदर्शन अधिकारियों से शुभकामनाएँ प्राप्त कर यात्र पंचकुला पहुंची जहां राजेश मलिक (नम्रता इण्डष्ट्री) अन्य साथियों के साथ प्रतीक्षा कर रहे थे। पंचकुला मीटिंग के बाद यात्र सीधे देहरादून के लिए रवाना हो गई। इस मार्ग पर कोई मीटिंग नहीं रखी गई, लेकिन बीच-बीच में केबल टी-वी- ऑपरेटरों द्वारा यात्र का स्वागत किया गया। यात्र की प्रतीक्षा देहरादून दूरदर्शन केन्द्र में भी की जा रही है। वहां भी एम-एस-ओ- के साथ मीटिंग बुलाई गई है दूरदर्शन अधिकारियों के द्वारा। देहरादून दूरदर्शन केन्द्र में देहरादून के एम-एस-ओ- शामिल हुए। मीटिंग आयोजन आज छुट्टी होने के बावजूद भी किया गया, वहां दूरदर्शन अधिकारी मनमोहन सिंह ने यात्र का स्वागत किया एंव ऑपरेटरों के साथ विशेष बैठक में भाग लिया। दूरदर्शन केन्द्र देहरादून में मीटिंग निबट जाने के बाद भी तकरीबन ढ़ाई-तीन घण्टे वहां बेकार हो गए, क्योंकि गाड़ी की चाबी गाड़ी के अन्दर रह गई और गाड़ी लोक हो गई। गाड़ी को अनलाक करवाना भी अब सरल कार्य नही रह गया है। पहले एक मैकेनिक को लाया गया जो स्वंय हार मानकर चला गया। बाद में दो और मास्टर आए उन्होंने बामुश्किल किसी तरह से एक नई चाबी तैयार की तब कहीं जाकर गाड़ी का लाक खोला जा सका लेकिन इस बीच सभी एम-एस-ओ- सहित दूरदर्शन अधिकारी श्री मनमोहन जी भी वहीं साथ रहे और सहयोग देते रहे। देहरादून से आगे बढ़ना पहले से ही लेट हो चुका था, अतः बीच में स्वागत कार्यक्रमों को रद करना पड़ा, क्योंकि रास्ता आज का अभी काफी लम्बा था। देहरादून से सीधे हरिद्वार दूरदर्शन केन्द्र पहुंची यात्र, जहां छुट्टी होने के बावजूद भी दूरदर्शन आधिकारी श्री आर-के- सिंह अन्य साथियों सहित उपस्थित थे। केबल टी-वी- ऑपरेटर एम-एस-ओ- के साथ दूरदर्शन अधिकारियों की मीटिंग के बाद यात्र सीधे नजीबाबाद,धामपुर, अफजलगढ़ होते हुए सीधे राम नगर पहुंची। राम नगर में एक दिन परिवार पोते आरव एंव पोती माही के साथ व्यतीत किए जाने का भी पहले से ही इस यात्र के हिस्से के रूप में तय किया गया था। अनुराग सपरिवार सबको साथ लेकर दिल्ली से राम नगर आ रहा था, जबकि हमें देहरादून से रामनगर पहुंचना था। हम देहरादून व हरिद्वार की मीटिंग निबटाकर रूद्रपुर में दिल्ली से आने वालों की प्रतीक्षा कर रहें थे, लेकिन अनुराग की गाड़ी रूद्रपुर पहुंचने से पूर्व ही पंचर हो गई थी,अतः हम भी उनके पास पहुंचे और सबके साथ यात्र रामनगर की एक खूबसूरत रिसोर्ट में पहुंची।
परिवार के साथ एक दिन मौजमस्ती के बाद अमन भी आगे की लम्बी-कठिन यात्र के लिए पूर्णरूप से ताजा हो गया था। आरव-माही ने अब तक की थकावट को छूमन्तर कर दिया था। अगले ही दिन रामनगर से आगे की और चल पड़ी यात्र। नैनीताल में भाई नदीम खान (बाबी भाई) के साथ गहन चर्चा के बाद रूद्रपुर होते हुए सीधे मुरादाबाद पहुंची यात्र। मुरादाबाद में रात्रि भोज के बाद दिल्ली वाले दिल्ली के लिए रवाना हो गए और चेतना यात्र अपने गतंव्य की ओर। मुरादाबाद में ऑपरेटरों के साथ मीटिंग के बाद वहां के प्रमुख एम-एस-ओ- फिरासत रवान के द्वारा यात्र का भव्य स्वागत किया गया। वहां से सबकी शुभकामनाएँ समेटकर यात्र लखनऊ के लिए बढ़ चली। लखनऊ में दूरदर्शन अधिकारियों के साथ मीटिंग डैन एन्जाय आफिस बुलाई गई थी। तय समय पर दूरदर्शन अधिकारी (लखनऊ) श्रीमति सुरजीत, श्री वास्तव एंव श्री आर-के-द्विवेदी के-एस-चौहान एंव विकास कटियार डैन एन्डाय सहित मीटिंग में उपस्थित रहे। दोनो पक्षों ने बड़ी गम्भीरता के साथ मीटिंग के महत्व को समझा एंव दूरदर्शन चैनलों को एक्ट के अनुसार ही वह प्रसारित कर रहे है। औमेश्वर सिंह का कहना था कि डिजीटल हो जाने के बाद दूरदर्शन के 24 चैनल ना चलाए जाने का कोई कारण ही नहीं बनता है। एनॉलाग में जरूर थोड़ी परेशानियां कही-2 हो सकती है, लेकिन डिजीटल में स्पेस की कोई कमी नहीं रही। लखनऊ डैन एन्जाय की मीटिंग में उत्तर प्रदेश के अन्य शहरों के एम-एस-ओ- व ऑपरेटरों को भी भाई औमेश्वर सिंह ने बुलाया हुआ था। दूरदर्शन अधिकारियों द्वारा इस प्रयास का खूब सराहा गया एंव अगली बार मीटिंग दूरदर्शन केन्द्र में रखने के लिए आग्रह किया लखनऊ मीटिंग के बाद यात्र कानपुर होते हुए सीधे इलाहाबाद पहुंची। इलाहाबाद में गाड़ी का एक व्हील प्रोब्लम बन गया। लगातार लम्बी दूरी की ड्राईविंग से एक व्हील दूसरी बार प्रोब्लम बन गया, जबकि दिल्ली के ट्रोयटा सर्विस सैन्टर से ही गाड़ी का हरेक काम करवाकर यात्र पर निकला गया था। बाकायदा ब्रैकशू ड्रम भी टोयटा के सर्विस सैन्टर में डाला गया था, लेकिन मनाली पहुंचने से पूर्व ही एक व्हील गर्म हो गया। मैकैनिक को दिखलाया तब उसने बताया कि सैटिंग ठीक तरह से नहीं की गई थी, अतः उस मैकेनिक ने सिर्फ सैटिंग ठीक की और यात्र चलती रहीं वही व्हील इलाहाबाद पहुंच कर बहुत ज्यादा गर्म हो जाने के कारण पूरी तरह से अड़ गया। रात्रि विश्राम के बाद सुबह ठण्डा हो जाने पर व्हील गाड़ी के साथ चलने तो लगा लेकिन बिना प्रोब्लम को सोल्व किए यात्र को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता था। इलाहाबाद में आज विश्वकर्मा पूजा के कारण कोई भी वर्कशाप खुली नहीं थी व ना ही कोई मैकेनिक उपलब्ध था। वाराणसी के आलोक भाई से सहयोंग की अपील की तो इलाहाबाद स्थित टोयटा कम्पनी के सर्विस सैन्टर से हमारी बात तो हो पाई लेकिन विश्वकर्मा पूजा के कारण प्रोब्लम सोल्व होने के आसार नहीं दिखें। इसी प्रोब्लम को साथ लिए-लिए आपरेटरों की मीटिंग सन्तोष भाई के आफिस में हुई। मीटिंग के साथ-2 किसी मिस्त्री की खोज भी इलाहाबाद में जारी थी, क्योंकि इलाहाबाद के टोयटा सर्विस सेंटर से स्पष्ट कह दिया गया था कि आज विश्वकर्मा पूजा के कारण किसी मैकेनिक को टूल उठाने के लिए कहना ठीक नहीं होगा। टोयटा कम्पनी के सर्विस सैन्टर द्वारा दिया गया यह जवाब बता रहा था कि समस्या बड़ी गम्भीर और जटिल है। इसे सोल्व किए बिना यात्र इलाहाबाद से आगे नहीं बढ़ाई जा सकती थी अतः इलाहाबाद में किसी मुस्लिम मैकेनिक की तलाश की गई तब एक केबल टी-वी- ऑपरेटर लालू खान द्वारा एक मैकेनिक को लाया गया, जिसने ठीक वही बात की जो इससे पूर्व मनाली के पास सुनने को मिली थी कि सैटिंग ठीक नहीं की गई और उस मैकेनिक ने सैटिंग ठीक कर दी अतः यात्र इलाहाबाद से अब आगे बढ़ने के लिए तैयार हो चुकी थी। इलाहाबाद में एम-एस-ओ- सन्तोष गुप्ता का डैस लायसैंस भी कैसिल किया गया है। इसके पीछे का सच अलग से लिखने वाला है अतः फिर कभी फिलहाल इलाहाबाद के सभी ऑपरेटरों से यात्र के लिए शुभकामनाएँ लेकर उत्तर प्रदेश से बिहार के लिए रवाना हो गई यात्र। गाड़ी की व्हील प्रोब्लम के कारण तकरीबन पूरा दिन ही इलाहाबाद में आज का बीत गया अतः इलाहाबाद से वाराणसी के रास्ते सीधे पटना पहुंची यात्र। वाराणसी के आपरेटरों के साथ केवल फोन के माध्यम से ही मीटिंग हो पाई। पटना पहुंचते-पहुंचते देर रात हो चुकी थी। अगली सुबह दूरदर्शन केन्द्र पटना में आपरेटरों की मीटिंग बुलाई हुई थी। पटना में तो कोई शिकायत अब दूरदर्शन चैनलों के लिए नहीं रह गई है, क्योंकि पटना डिजीटाईजेशन पर चला गया है, लेकिन बिहार के अन्य क्षेत्रें मे एनॉलाग प्रसारण ही हो रहा है, वहां दूरदर्शन चैनलों के लिए केबल आपरेटर पूर्णतया एक्ट का पालन नहीं कर रहे है, ऐसा पटना दूरदर्शन अधिकारी श्री दीपक कुमार व अन्य अधिकारियों ने बताया। बहुत ही सकारात्मक रही पटना की मीटिंग सभी एम-एस-ओ- के प्रतिनिधि मीटिंग में शामिल हुए एंव सबकी शुभाकामनाएँ लिए यात्र पटना से आगे के लिए बढ़ चली। आगे वृतान्त के लिए अगले अंक की प्रतीक्षा करें।
शिमला के प्रमुख एम-एस-ओ- मुकेश मल्होत्र जी को हमने मीटिंग में आने के लिए फोन किया तो वह शीघ्र ही स्वंय आ गए जबकि दूसरे एम-एस-ओ- खन्ना जी की फीड़ पंजाब के फास्ट वे नैटवर्क से ही चलती है। दूरदर्शन अधिकारियों में श्री अमित टण्डन सहित अन्य अधिकारी भी मीटिंग में उपस्थित थे। माननीय मन्त्री श्री प्रकाश जावडेकर जी का सन्देश सुनने के बाद दोनो पक्षों के बीच बड़े सोहादेपूण माहौल में मीटिंग हुई। एक दूसरे की समस्याओं को समझने व सुलझाने पर सकारात्मक शुरूआत हुई।

चेतना यात्रा (भाग 4)
पटना से बिलास पुर (छत्तीसगढ़)
दिल्ली से बिहार की राजधानी पटना पहुंचने के लिए यह ‘चेतना यात्र-10’ हरियाणा, पंजाब, हिमाचल, उत्तराखंड, चण्डीगढ़ व उत्तर प्रदेश का दौरा पूर्ण कर चुकी है। जम्मू एंव कश्मीर का दौरा वहां आई भंयकर बाढ़ के कारण नहीं हो सका, लेकिन यात्र सम्पूर्ण भारत के दौरे पर है। यात्र में लिख पाना बहुत कठिन हुआ करता है क्योंकि दिनभर की दिनचर्या बहुत थकाऊ होती है। रात्रि विश्राम के बाद सुबह से फिर आगे के कार्यक्रम तय होते है, वहां समय से पहुंचना और समय की लय को बनाए रखना बहुत कठिन होता है। इलाहाबाद से पटना का लम्बा सफर कर देर रात जब होटल में पहुंचते है तो जरूरी नहीं कि भोजन भी मिले। ऐसी स्थिति के लिए ब्रैड-बटर, खीरा,प्याज,टमाटर भी गाड़ी में रखा जाता है, लेकिन ज्यादा तर पूरा सामान साथ नहीं होता है, क्योंकि ब्रैड और बटर सभी जगह उपलब्ध नहीं होता है और यह दोनो चीजें ज्यादा देर के लिए सफर में साथ रखने से खराब हो जाती है। पटना का प्रबन्ध वहां के एम-एस-ओ- भाई सुशील कुमार द्वारा किया गया था, अतः दिक्कत नहीं आई।
पटना दूरदर्शन केन्द्र में मीटिंग करने के बाद यात्र सीधे लखीसराय पहुंची। लखीसराय के दूरदर्शन केन्द्र में केबल टी-वी- आपरेटर बड़ी सख्ंया में काफी देर से प्रतीक्षा कर रहे थे। उनके साथ मीटिंग मे समय थोड़ा ज्यादा बीत गया, सवाल-जवाब भी कुछ ज्यादा ही हो गए और लखीसराय से आगे बढ़ने का भी समय नहीं रह गया। लखीसराय से आगे जमुई होते हुए देवघर जाना है, मार्ग बहुत बढ़िया नहीं कहा जा सकता है। बात सड़कों की करें तो यह पता ही नहंीं चलता कि सड़को में गडढ़े है या फिर गड्ढ़ों में ही सड़के है। जिस पर नक्सलवादियों ने बन्द भी बुलाया हुआ है। उनकी बन्द की घोषणा का मतलब बन्द ही होता है यहां। अतः अन्धेरा हो जाने के बाद लखीसराय से आगे के सफर के लिए सभी ने मना किया, तो रात्रि विश्राम के लिए लखीसराय में ही रूकना तय किया गया, लेकिन रूका कहां जाए---\ यहां तो ऐसा कोई होटल भी नहीं है जहां रात गुजरे, खाने के लिए तो अभी सोचना भी शुरू नहीं किया था। समय बहुत बलवान होता है, हर किसी को उसी के अनुसार ही चलना होता है। लखीसराय के ही एक केबल टी-वी- ऑपरेटर ने बताया कि एक होटल है, चलिए मेरे साथ वहां मेरी ही केबल भी लगी हुई है। वहां दूरदर्शन केन्द्र से केवल दूरदर्शन चैनलस का ट्रासमीशन ही किया जाता है, लेकिन केबल टी-वी- ऑपरेटरों के ट्रांसमिशन में दूरदर्शन चैनलों का प्रसारण किया जा रहा है या नहीं उस पर निगरानी भी वह रखते है। विनोद कुमार लखीसराय दूरदर्शन केन्द्र को देखते है। वहां मात्र 35 चैनल का एनॉलाग कन्ट्रोल रूम लगा हुआ है, जिससे कई केबल टी-वी- ऑपरेटर जुडे हुए है।
ऑपरेटरों ने बताया कि दूरदर्शन केन्द्र में लाईट फेल हो जाने पर कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है अतः ट्रांसमिशन कई-कई घण्टों बन्द रहता है। ऐसे में केबल टी-वी- ऑपरेटर क्या करें---\ मात्र 35 चैनलों में दूरदर्शन के सभी चैनलों का प्रसारण कर पाना सम्भव नहीं है। तब ऑपरेटरों को बताया गया कि एनॅालाग मोड में मात्र 5 चैनलों का ही प्रसारण प्राईम बैण्ड पर किया जाना अनिवार्य होता है अतः आपको दूरदर्शन के सभी चैनलों का प्रसारण नहीं करना है। लखीसराय में आपरेटरों द्वारा दूरदर्शन केन्द्र के प्रति तमाम खमियों का जिक्र किया गया जिन्हें सुधारने के लिए उन्होनें मांग की। ऑपरेटरों के केबल कनैक्शन भी बहुत कम है। इनमें से कई ऑपरेटर 50 कनैक्शन के आस-पास वाले भी है, लेकिन डैस के बारे में जानने के लिए वह भी बहुत उत्सुक दिखाई दिए। बारहाल एक केबल टी-वी- ऑपरेटर के साथ जिस होटल में पहुंचे, वहां की प्रशंसा करनी होगी, क्योकि होटल ज्यादा छोटा होने के बावजूद भी बहुत छोटे-छोटे 10ग10 के कमरों के साथ अटैच्ड बाथरूम इंग्लिश एंव भारतीय कमोड दोनो साथ-साथ लगाए गए थे। एयर कन्डीशन वाला रूम हमें दिया गया जिसका पानी पाइप के द्वारा बाथरूम के दरवाजे में ही अटकाया हुआ था। बाथरूम का दरवाजा बन्द करे तो पानी कमरे में ही बहता था, लेकिन कुल मिलाकर होटल को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करने के लिए काफी प्रयास किया गया था। हालाकि वहां खाने की कोई सुविधा नहीं थी, जबकि राहगीरों के लिए वहां खाटों के रूप में तख्त भी बिछाए हुए थे। खाने के लिए भी ऑपरेटर एक रैस्त्र में लेकर गया जो आर्डर पर ही सब कुछ बनाता था। लखीसराय में सुरक्षित रात्रि विश्राम कर सुबह फिर से यात्र आगे बढ़ी। लखीसराय से जमुई होते हुए देवघर का मार्ग पीछे गुजरे मार्ग से थोड़ा बेहतर है, लेकिन नक्सलियों द्वारा बुलाए गए बन्द का प्रभाव इस क्षेत्र में भी होता है। पूर्व निर्धारित समय से थोड़ा लेट चल रही है यात्र लेकिन बिना रूके लगातार जारी है। अतः देवघर में प्रतीक्षा कर रहे ऑपरेटरों को ज्यादा लम्बी प्रतीक्षा करनी पड़ी। देवघर के प्रमुख केबल टी-वी- ऑपरेटर कार्तिक ठाकुर के पिताजी की मृत्यु हो गई है, अतः उन्होंने उनके संस्कार के लिए जाना है, लेकिन वह हमारी प्रतीक्षा में देवघर में ही रूके हुए है, जबकि पिता जी की मृत्यु उनके परिवार में किसी अन्य शहर में हुई है जहां उन्हें जाना है। उनसे हमने आग्रह भी किया कि आप हमारी प्रतीक्षा ना करें, चले जाएँ लेकिन वह हमसे मिल लेने के बाद ही वहां से रवाना हुए। देवघर बाबा (शिव)का स्थान है। बैजनाथ धाम की शिवभक्तों में बड़ी मान्यता है। यहां देश के कौने-कौने से शिवभक्तों का आना लगा रहता है। कांवडियों का तो यहां बहुत बड़ा मेला लगता है। देवघर में दूरदर्शन केन्द्र के स्थान पर ही मीटिंग बुलाई जिसमे देवघर के दोनो ऑपरेटर कार्तिक ठाकुर (निजी कन्ट्रोल रूम) एंव भारत ठाकुर (फीड पटना एंव दूरदर्शन अधिकारी संजीव कुमार सहित अनेक अधिकारी व ऑपरेटरों ने भी भाग लिया। देवघर मीटिंग के बाद शीघ्र ही धनबाद दूरदर्शन केन्द्र में मीटिंग ली। छोटी-माटी समस्याओं के लिए दोनों दूरदर्शन कर्मचारी एंव आपरेटरों के बीच सामंजस्य ही आवश्यक था, जो यात्र से किया गया, बाकी समस्याओं का सामाधान तो केवल कन्ट्रोल रूम से ही हो सकता है। धनबाद में भी था। देवघर एक तीर्थ स्थान है तो धनबाद कोयले की खान और बोकारो स्टील। यह क्षेत्र प्राकृतिक सम्प्दा से लबालब भरा हुआ है। कोयला चोरी कुछ लोगो के लिए उनकी दिनचर्या में शामिल है। वह रोजाना अपनी-अपनी साइकिलों पर लादकर जिस तरह से कोयला लाते ले जाते दिखते है, उसे चोरी नहीं बल्कि उनकी एक दिनचर्या एंव धनबाद की संस्कृति भी कहा जा सकता है। कोयला ले जाते साईकिल वालों से सरकारी कर्मचारियों का वसूली रसूक एक अनावश्यक प्रक्रिया प्रतीत होता है। परन्तु सुबह से शाम तक वहां साईकिल पर कोयला ढ़ोते लोग बाहर वालों के लिए आकर्षण का केन्द्र होते है, जबकि स्थानिय निवासियों के लिए तो उनकी दैनिक दिनचर्या का ही वह भी एक हिस्सा बन चुका है। एक साइकिल पर इतना वजन पूरे फैलाव के साथ लादना ही अपने आप में अद्भुद लगता है और जब उस साईकिल को किसी चढ़ाई पर पूरा जोर लगाकर साईकिल वाला चढ़ाता चला जाता है, तब उस साईकिल को एक मोटर साईकिल सवार का पैर लगाकर धकेलते हुए सहयोंग देना भी भले ही देखने वाले को मदद दिखता हो, लेकिन वह मदद भी उस व्यवसाय का ही एक हिस्सा ही होता है। हमें यह भी मालूम हुआ कि बाकायदा इस कार्य में बड़े-बड़े ठेकेदार सहभागी होते है।
धनबाद से बोकारो पहुंची यात्र का जोरदार स्वागत किया गया। मीटिंग बोकारों दूरदर्शन केन्द्र में रखी गई, जो कि उन्हीं दूरदर्शन कर्मचारी संजीव कुमार ने आयोजित की थी जिन्होने देवघर में भी बुलाई थी। बोकारों के भाई अजय सिंह सोशल मीडिया पर कॉफी सक्रिय रहते है। उन्होंने ही वहां के केबल टी-वी- ऑपरेटरों का प्रतिनिधित्व किया। बड़ी संख्या में केबल टी-वी- ऑपरेटरों का वहां आना इस बात का प्रमाण है कि अब ऑपरेटरों में कुछ जानने और समझने की जिज्ञासा बढ़ती जा रही है, लेकिन समझ कब सकेंगे यह कह पाना बहुत कठिन है। बोकारो मीटिंग के बाद यात्र सीधे रांची पहुंची। राची झारखण्ड की राजधानी होने के साथ-साथ डैस सिटी भी है। रांची भी पूर्णतया डिजीटल पर चला गया है। यहां भी मन्थन जी-टी-पी-एल- एंव डैन के नेटवर्क चल रहें है। डैन व जी-टी-पी-एल- की फीड यहां कोलकाता से आ रही है जबकि मन्थन का कन्ट्रोल रूम लगा हुआ है। दूरदर्शन अधिकारी श्री चन्द्र शेखर द्वारा दूरदर्शन केन्द्र में ही मीटिंग रखी गई। डिजीटल टैक्नॉलाजी में दूरदर्शन के सभी चैनलों को कैरी करने में केबल टी-वी- ऑपरेटरों को कोई परेशानी भी नहीं है। केबल टी-वी- ऑपरेटरों की ओर से राना अमिताभ सिंह (जी-टी-पी-एल-) इस क्षेत्र को देखते है, डैन के सुरेन्द्र दुबे एंव मथंन के सन्दीप मिश्रा आदि रांची डिजीटाइजेशन में काम कर रहे है। रांची मीटिंग निबटाने के बाद यात्र चान्दील होते हुए सीधे जमशेद पुर की ओर बढ़ी। यह मार्ग पूरी तरह से सामान्य नहीं कहा जा सकता है, क्योंकि बहुत ही ज्यादा संख्या में यहां हैवी वाहनों का आवागमन होता है। जमशेद पुर को टाटा नगर भी कहा जाता है टाटा नगर पूरी तरह से टाटा की जागीर है, वहां के निवायसी भी अधिकांश टाटा के ही कर्मचारी है, लेकिन टाटा नगर की प्रगति निरन्तर जारी है। देर रात यात्र जमशेद पुर पहुंची। भाई गुडडू गुप्ता ने प्रवीण भाई एंव अन्य ऑपरेटरों को एकजुट कर पूरे शहर का एक सांझा कन्ट्रोल रूम वहां लगा लिया है। इससे पहले यहां कई नेटवर्क चल रहे थे। स्वंय गुड्डू गुप्ता सिटी केबल से जुडे हुए थे, जबकि प्रवीण मन्थन से, हलीम भाई डैन, तो अशोक भडानी जी-टी-पी-एल- एंव गोपाल मन्थन चलाते थे। इन सबके बीच एक इण्डिपैन्डैंट ऑपरेटर अशोक रैन्गोसिया भी टाटानगर में हुआ करते थे, लेकिन इन सबको एक साथ मिलाकर ज्ठच्स् (ट्रस्टलाइन ब्राडबैण्ड सर्विस प्रा-लि-) बना दिया गया है। डिजीटल कन्ट्रोल रूम भी लगा दिया गया है एंव सभी पे चैनल भी चल रहे हैं, अब जरूरत सिर्फ डैस लायसेंस की ही रह गई है। यह बहुत अच्छी बात है कि अलग-अलग एक दूसरे से बिल्कुल भिन्न राय रखने वाले एक-दूसरे के साथ सालों से प्रतिस्पर्धा रखने वाले केबल टी-वी- ऑपरेटर अब आपस में जुड़कर सांझा कन्ट्रोल रूम चलाने पर सहमत हो गए है। जबकि अपने आप में वह सब धुरन्धर ही है।
जमशेरपुर से यात्र पुरूलिया पहुंची, जहां केबल टी-वी- ऑपरेटर यात्र का स्वागत करने के लिए प्रतीक्षा रत थे। मि-अतुनूराय पुरूलिया को सम्भालते है, जबकि डिजीटल फीड वहां सिटी केबल की आसनसोल से आ रही है। तकरीबन 175 आपरेटर पुरूलिया जिले में कार्यरत है, बहुत गरीबी भी है इस क्षेत्र में मात्र 120-130/- रूपए प्रतिमाह केबल टी-वी- सब्स्क्रप्शन यहां लिया जाता है। पुरूलिया से आगे बढ़कर जब बाकुरा पहुंची यात्र तो वहां कई ऑपरेटर यात्र का स्वागत करने के लिए प्रतीक्षा में थे। उनके अतिआग्रह पर उनके अफिस जाना पड़ा, जहां उन्होंने यात्र के स्वागत का इन्तजाम रखा हुआ था। वहां से शुभकामनाएँ लेकर यात्र सीधे दुर्गापुर पहुंची। भाई स्वप्नेन्दु मुस्तफी दुर्गापुर में ही नैटवर्क चलाते है। दुर्गापुर ऑपरेटरों के साथ मीटिंग के बाद यात्र सीधे कोलकाता के लिए रवाना हो गई, क्योंकि कोलकाता दूरदर्शन केन्द्र में वहां के एम-एस-ओ- के साथ मीटिंग बुलाई गई थी। यात्र थोड़ी लेट चल रही थी, देर रात तक दूरदर्शन केन्द्र मे वहां के अधिकारियों सहित एम-एस-ओ- का ठहरे रहना अपने आप में आश्चर्यजनक था, लेकिन यही सच था, वहां सब यात्र के पहुंचने की प्रतीक्षा कर रहे थें। कोलकाता एक डैस सिटी के साथ-साथ देश के चार महानगरों में से एक है। डैस के प्रथम चरण में देश के चारों महानगरों दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता एंव चैन्नई मे एक नवम्बर 2012 से डैस लागू करने की अधिसूचना जारी की गई थी, जिसके अनुसार दिल्ली व मुम्बई में तो एक नवम्बर 2012 से एनॉलाग प्रसारण बन्द हो गया था, लेकिन कोलकाता में त्योहारो का समय होने के कारण एक नवम्बर को नहीं, लेकिन बाद में हो गया था। जबकि चैन्नई अभी भी विवादास्पद है। कोलकाता एक बड़ी आबादी वाला बड़ा शहर है। यहां अण्डरग्राउण्ड मैट्रो भी चलती है और समुन्द्र पर फेरी भी, यहां खूब सारी पुरानी बसें भी चलती हैं, यहाँ अग्रेजो के समय से चलती आ रही ट्राम भी चलती है। यहां आज भी आदमी को ढ़ोता है, क्योंकि कभी अग्रेजो के राज में शुरू की गई आदमियों को बैठाकर सवारी करवाने वाली बग्गियां, जिन्हें आदमी ही खीचते है, वह आज भी प्रचलन में है। उन बग्गियों पर बड़ी शान के साथ सवारियां बैठती है और उन सवारियों को खीचते ले जाते मानव बग्गी को देखकर आश्चर्य भी होता है, लेकिन कोलकाता की संस्कृति में बसा हुआ है वहां का ट्रासर्पोटेशन सिस्टम। अपनी-अपनी गाड़ियों मोटर साइकिलों स्कूटर साइकिलों की तो बात ही अलग है, लेकिन कोलकाता में सार्वजनिक ट्रास्पोर्टेशन की बात सारे देश से निराली है। विजय दशमी का पर्व यहां का एक बहुत बड़ा उत्सव होता है। देश नव दुर्गा देवी पूजा के लिए बड़े-बड़े पण्डाल सजते है। शायद ही ऐसा कोई शख्स होता होगा जो इस पर्व मे शामिल नहीं होता हो, वर्ना तो पूरा बंगाल ही नहीं बल्कि उड़ीसा व झारखण्ड में भी बगांल की पूजा का पूरा नजारा देखने को मिलता है। महाराष्ट्र-गुजरात जिस तरह से नवरात्रें में गरबा में व्यस्त होता है वैसे ही पूरा बगांल दुर्गा पूजा में व्यस्त होता है। इसके लिए काफी पहले से तैयारियां शुरू हो जाती है। पण्डाल कैसा बनाना है और उसके लिए पैसा कैसे जुटाना है, आर्किस्ट्रा कौन सा व कहां से लाना है सारा इन्जताम बड़े स्तर पर किया जाता है। सब मिलकर सारी व्यवस्था करते है, जैसे कि उत्तर भारत में दशहरा के अवसर पर रामलीलाओं का आयोजन किया जाता है। ऐसे छुट्टी भरे त्यौहार के वातावरण में चेतना यात्र वहां पहुंची उसके लिए समय निकालना किसी के लिए भी सरल नहीं, लेकिन सभी ने पूरा समय दिया।
दूरदर्शन केन्द्र में सिटी मन्थन आदि के प्रतिनिधि मीटिंग में शामिल रहे, जबकि कोलकाता में सिटी मन्थन के अतिरिक्त जी-टी-पी-एल- के सी-बी-एल, डी-जी- केबल डैन, मेघबाला, बसारा, हैथवे, सुष्टी सहित एक-दो और एम-एस-ओ- भी काम कर रहे है। कोलकाता डैस सिटी होने के साथ-साथ डैस एरिया की सीमाओं के विवाद के कारण भी कुछ की समस्याएँ है, लेकिन या=ाा को कोलकाता पहुंचने में देर काफी हो चुकी थी और सभी को त्यौहार की तैयारी में पहुंचने की भी जल्दी थी अतः विस्तार से बाते नहीं हो सकी। हांलाकि इस तरह की एक पहल हुई उसके प्रति दूरदर्शन अधिकारी काफी कृतज्ञ दिखाई दिए। दूरदर्शन मीटिंग से यात्र सीधे एक बर्थडे पार्टी में पहुंची जहां सिटी केबल के सुरेश सेतिया यात्र का स्वागत करने के लिए प्रतीक्षा में थे। वहीं पर मुद्दतो बाद देबाशीष डे से भी भेंट हुई। सिटी के अनुराग भाई के बटे की जन्मदिन पार्टी में आर्शीवाद दे कर कोलकाता में भाई सुरेश सेतिया की मेजबानी में विश्राम किया। अगली सुबह कोलकाता से रवाना होने से पूर्व वहां के एल-सी-ओ- के संगठन पश्चिम बंगाल केबल ऑपरेटर सग्रांम सोसायटी के आफिस में रतन जैयसवाल एंव अन्य ऑपरेटरों से भेंट कर यात्र अगले पड़ाव की ओर बढ़ चली। कोलकाता से यात्र
सीधे भुवनेश्वर पहुंची। भुवनेश्वर में ओरटैल नैटवर्क की प्रमुख श्रीमति जग्गी पाण्डा के साथ इण्डष्ट्री की भावी सम्भावनाओं एंव माननीय प्रधानमन्त्री जी के ड्रीम प्रोजेक्ट डिजीटल इण्डिया पर विचार विमर्श के साथ-साथ माननीय मन्त्री सूचना व प्रसारण श्री प्रकाश जावडेकर जी का सन्देश भी सुनाया गया। ओर टैल मीटिंग के बाद दूरदर्शन केन्द्र भुवनेश्वर में मीटिंग हुई, जहां ओरटैल प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। भुवनेश्वर से प्रसारित डी-डी- उड़िया चैनल पर एक कार्यक्रम दर्शक फोरम का भी प्रसारण किया जाता है जिसमें केबल टी-वी- ऑपरेटरों को भी दर्शक के सवालों के जवाब देने के लिए निमन्त्रित किया जाता है। इसी तरह से एक कार्यक्रम बीवर्स लैटर भी प्रसारित किया जाता है। जिसमें केबल टी-वी- ऑपरेटरों को भी शामिल किया जाता है। भुबनेश्वर में ही उदय भान (पूर्व हिन्दी सह सम्पादक) से भी भेंट हुई क्योंकि अब वह सरकारी सेवा में भुवनेश्वर में ही रहते है। भुवनेश्वर मीटिंग के बाद यात्र सम्बलपुर के लिए रवाना हो गई, लेकिन इसी मार्ग पर राधा रवोल दूरदर्शन केन्द्र में भी वहां के केबल टी-वी- ऑपरेटरों को बुलाया हुआ था अतः उनके साथ भी केबल एक्ट के अनुसार दूरदर्शन चैनलों का प्रसारण एंव कोई भी ऐसा चैनल जिसको भारत सरकार से डाऊनलिंक परमीशन ना मिली हो नहीं चलाया जाना चाहिए के बारे में विस्तार से जानकारी दे कर यात्र सीधे सम्बलपुर पहुंची। सम्बलपुर दूरदर्शन केन्द्र में मीटिंग बुलाई गई थी, वहां सभी यात्र की प्रतीक्षा कर रहे थे। सम्बलपुर में औरटैल के साथ सलंग्न होकर केबल टी-वी- चल रहा है। यहां की शिकायतें भी दूसरे एनॉलाग कन्ट्रोल रूम जैसी ही है। दूरदर्शन चैनलों को एनॉलाग प्रसारण करने वाले नैटर्वक पर शिकायतें अधिकांश शहरों में देखने को मिली, क्योंकि एनॉलाग में चैनलों को प्रसारित करने के लिए लिमिटेशन होती है जबकि डिजीटाईजेशन में वह सारी कमिया स्वंय ही दूर हो जाती है। सम्बलपुर से पूर्व राधाखोल के बाद बौद में भी दूरदर्शन केन्द्र में एक मीटिंग हुई थी, जहां अभी एनॉलाग कन्ट्रोल रूम ही लगा हुआ है। सम्बलपुर से आज एक विशेष दिन की शुरूआत है अपने देश के लिए जबकि मेरे लिए आज दो-दो खुशियों का दिन है। आज 24 सितम्बर है जो बेटे अनुराग का जन्मदिन होता है, लेकिन देश के लिए आज का दिन बहुत महत्वपूर्ण हो गया है क्योकि आज हमने मंगल मिशन पर सफलता प्राप्त कर ली है। मंगल ग्रह पर मंगलयान भेजने की शुरूआत तो काफी दिन पहले की जा चुकी थी, लेकिन लाखों मील दूरी तय कर आज उस यान को निर्विघ्न पूर्ण सफलता के साथ मंगल ग्रह में प्रवेश करवाया गया। यह हमारे देश के लिए विज्ञान की दुनिया में बहुत बड़ी एतिहासिक उपलब्धि है, जिसके लिए स्वंय प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी जी वैज्ञानिकों के साथ मौजूद रहे। सारी दुनिया ने हमारी इस सफलता को नतमस्तक होकर स्वीकारा। आज के इस शुभदिन पर पूरा देश गर्व से खुशियां मना रहा है। माननीय प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने इस सफलता पर अपने बधाई भाषण मे देशवासियों को यह सन्देश भी दिया है कि जिस तरह आप क्रिकेट मैच के जीत पर खुशियां मनाते हो उससे भी कहीं बहुत बड़ी उपलब्धि है यह जो हमारे वैज्ञानिकों ने हमे दी है, अतः देशवासियों को पूरे हर्षोल्लास के साथ देशभर में इस सफलता के लिए खुशियां मनानी चाहिए। नवरात्रें की भी आज शुरूआत हुई है, पहला नवरात्र है आज और पुत्र अनुराग का जन्मदिन भी, मेरे लिए तो कई गुना अधिक खुशी मनाने का दिन है आज।
सम्बलपुर से आगे का मार्ग उड़ीसा, छत्तीसगढ़ का बार्डर क्षेत्र हो जाता है। इस क्षेत्र में भी अक्सर नक्सलवादी घटनाएँ होती रहती है। बिलासपुर दूरदर्शन केन्द्र में मीटिंग के बाद यात्र सीधे छत्तीसगढ़ में रायपुर पहुंची जहां छत्तीसगढ़ के प्रमुख आपरेटर श्री अशोक अग्रवाल द्वारा स्वागत किया गया। अग्रवाल जी का नैटवर्क रायपुर के साथ-साथ कोरबा, जगदलपुर, बिलासपुर, दुर्ग मिलाई, मनेन्द्रगढ़, मन्जेजी, तिल्ला, बलोदाबजार, झाटापाड़ा, सूरजपुर एंव राजनन्द गांव में भी है। छत्तीसगढ़ के बड़े ऑपरेटर के साथ-साथ कई चैनलों की डिष्ट्रीब्यूशन भी वह सम्भालते है। मीडिया के क्षेत्र में उनकी भूमिका वहां खासा वजन रखती है। इसके अलावा कई अन्य व्यवसाय में भी वह संलग्न है।
रीरायपुर में मीटिंग के बाद यात्र बिलासपुर पहुंची। बिलासपुर के प्रैस क्लब में सभी ऑपरेटरों एंव पत्रकारों के साथ यात्र पर चर्चा हुई, वहीं बिलासपुर दूरदर्शन केन्द्र के अधिकारियों के साथ भी मीटिंग की, लेकिन यहां तक पहुंचते-पहुंचते गाड़ी का वही पहिया जो कि मनाली से पहले बिगड़ा था, जिसे बाद में इलाहाबाद में भी ठीक करवाना पड़ा था, वही पहिया यहां भी अपनी वही प्रोब्लम के साथ अड़ गया है।
एक टायर में पंचर भी हो गया है, अतः पहले पंचर लगवा कर फिर उस बिगड़ैल पहिए के इलाज के लिए योग्य मिस्त्री को तलाशा। भाई अशोक अग्रवाल जी के सहयोग से एक सही मिस्त्री मिला और इस पहिए का सही इलाज किया गया, ब्रेकशू भी बदले गए एंव मिस्त्री ने हमे यह आवश्वासन भी दिया कि अब इस पहिए में आपकी यात्र में प्रोब्लम नही आएगी। गाड़ी ठीक करवाने के बाद आगे का सफर रात में करने वाला नहीं है, अतः बिलासपुर में ही रात्रि विश्राम किया। यहां सिटी केबल के प्रमुख ऑपरेटर बबलू भाटिया से भी भेंट की एंव अन्य ऑपरेटरों के साथ भी भावी सम्भावनाओं पर चर्चा हुई। यहीं पर कमल दुबे भी दूरदर्शन की रिपोर्टिग देखते है एंव कई अन्य चैनलों के भी वही स्टिंगर है। यहां पर उनसे भी लम्बी चर्चा हुई। दशहरा के अवसर पर यहां भी बड़े-बड़े भव्य पण्डाल झंकिया सजती है, खूब भीड़ सब जगह उमड़ी हुई है। कोरबा से आए केबल टी-वी- ऑपरेटर गुरमीत सिंह सिंधू से भी भेंट हुई। उन्होंने सिटी केबल के तरूण बंसल एंव डीजी केबल के नितिन गुम्बर सहित सुबोध कटिहार (बिलासपुर ऑपरेटर एसों प्रेजीडेंट) से भी बिलासपुर में भेंट हुई। सभी के साथ मोदी जी ड्रीम प्रोजेक्ट ‘डिजीटल इण्डिया’ पर विस्तार से चर्चा हुई। यहां से आगे का रास्ता थोड़ा और कठिन हो जाता है, क्योंकि आगे छत्तीसगढ़ से मध्य प्रदेश बार्डर आदिवासियों का क्षेत्र है। वहां की सड़के और बाकी स्थितियां कैसी होगी यह वही से गुजरने पर ही जान पड़ेगा, अतः आगे का वृतान्त जानने के लिए अगामी अंक की प्रतीक्षा कीजिए, फिलहाल यात्र बिलासपुर में ही है।
दूरदर्शन केन्द्र में सिटी मान्थन आदि के प्रतिनिधी मीटिंग में शामिल रहे, जबकि कोलकाता में सिटी मन्थन के अतिरिक्त जी-टी-पी-एल- के सी-बी-एल, डी-जी- केबल डैन, मेघबाला, बसारा, हैथवे, सुष्टी सहित एक-दो और एम-एस-ओ- भी काम कर रहे है। कोलकाता डैस सिटी होने के साथ-साथ डैस एरिया की सीमाओं के विवाद के कारण भी कुछ की समस्याएँ है, लेकिन यात्र को कोलकाता पहुंचने में देर काफी हो चुकी थी और सभी को त्यौहार की तैयारी में पहुंचने की भी जल्दी थी अतः विस्तार से बाते नहीं हो सकी। हांलाकि इस तरह की एक पहल हुई उसके प्रति दूरदर्शन अधिकारी काफी कृजज्ञ दिखाई दिए।

चेतना यात्रा (भाग 5)
बिलासपुर से मैंसूर
छत्तीसगढ़ से आगे अब मध्य प्रदेश के लिए रवाना हुई है यात्र। पूरा बार्डर क्षेत्र दोनो ही राज्यों का उपेक्षा का शिकार है, इस क्षेत्र में आदिवासियों की बहुतायत है। मन तो करता है कि इन आदिवासियों के बीच कुछ समय बिताया जाए, इनके बारे में जाना जाए। इनके सस्ंकार परम्पराएँ सामान्य से काफी कुछ अलग हटकर है, लेकिन बहुत ज्यादा मेहनत कश है, इनके गठीले शरीर पर सजे आभूषण इनकी संस्कृति के बारे में और जानने के लिए आकर्षित करते है। सुबह बिलासपुर के अशोक अग्रवाल जी के विशाल निवास स्थान से विदा लेकर यात्र जबलपुर के लिए रवाना हुई। यह मार्ग जंगलों से होते हुए अमर कण्टक होकर निकलता है। अमरकष्टक की अपनी धार्मिक महिमा है, यहां धार्मिक श्रद्धालुओं के आने का तांता लगा रहता है। जैनियों का भी तीर्थ स्थान इधर है। यह क्षेत्र अपना अलग आकर्षण रखता है। इसी मार्ग पर डिण्डोरी भी एक छोटा सा कस्बा पड़ता है। डिण्डोरी के केबल टी-वी- ऑपरेटर यात्र का स्वागत करने आ पहुंचे, तब आगे शाहपुर के ऑपरेटर भी आगे स्वागत के लिए प्रतीक्षा में खड़े है। डिण्डोरी के ऑपरेटर ने बताया कि अलग से कुछ समय निकाल कर आईएगा, तब यहां के आदिवासियों के बारे में बहुत कुछ विचित्र जानने को मिलेगा। इस क्षेत्र के आदिवासियों का जीवन बहुत साइन्सटिफिक है। इनके पास प्रकृति के अनेक रहस्य जानने के लिए है आदि-आदि। डिण्डोरी से आगे बढ़ी यात्र तो आगे शाहपुरा टाऊन के ऑपरेटरों ने स्वागत किया, उनसे विदा लेकर सीधे जबलपुर पहुंची यात्र।
जबलपुर पहुंचते-पहुंचते रात काफी बीत चुकी थी अतः वहां रात्रि विश्राम के लिए तो एक अच्छा होटल म-प्र्र-टूरिज्म नाम का मिल गया लेकिन भोजन के लिए समय ओवर हो चुका था। भोजन ना भी मिले तब भी ब्रैड बटर आदि का बन्दो बस्त हमारे साथ था, लेकिन देर से पहुंचने के बावजूद भी वहां भोजन का प्रबंध कर ही लिया। जबलपुर में यूं तो अपने कई है लेकिन हमारी कोशिश यही होती है कि अपने व्यक्तिगत आवश्यक्ताओं के लिए किसी से भी मदद ना ली जाए। पप्पू चौक्से, शेखर अग्रवाल, सुरेन्द्र दुबे, नीलेश भाई सहित अनेक प्रियजन जबलपुर में है, लेकिन इस यात्र में मीटिंग बुलाने की जिम्मेदारी दूरदर्शन केन्द्र जबलपुर को दी हुई थी, अतः हमारा प्रयास यही था कि दूरदर्शन अधिकारियों को अपनी कोशिशें स्वतन्त्र रूप से करने दी जाए। सुबह दूरदर्शन केन्द्र जबलपुर मीटिंग में हैथवे एंव सैल (पप्पू चौक्से) के अतिरिक्त कोई अन्य एम-एस-ओ- उपस्थित नहीं थे, जबकि यहां भास्कर ग्रुप का बी टी-वी-, यू-सी-एन- (नागपुर) सहित सिटी केबल भी है। जबलपुर डैस सिटी है, अतः यहां एनॉलाग प्रसारण नहीं होता है बल्कि पूर्णतया डिजीटाइजेशन पर चला गया है जबलपुर। दूरदर्शन केन्द्र जबलपुर के भी डिजीटाईजेशन में अपने चैनलों को लेकर कोई प्रोब्लम नहीं है, फिर भी एम-एस-ओ- के साथ दूरदर्शन केन्द्र के अधिकारियों का ताल-मेल होना आवश्यक है। उसका प्रयास इस मीटिंग से शुरू हो गया है जो कि बाद में भी जारी रहेगा।
दूरदर्शन केन्द्र जबलपुर में मीटिंग के बाद केबल टी-वी- ऑपरेटरों के साथ एक मीटिंग हैथवे के ऑफिस में बुलाई गई थी, जिसमें डैस की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा हुई एंव भावी सम्भावनाओं पर डिजीटल इण्डिया को लेकर लम्बी चर्चा के बाद चौक्से परिवार पहुंच कर उनको हुए पित्रशोक पर संवेदनाएँ प्रकट की। वहां से अगले पड़ाव के लिए निकलने मे काफी देर हो गई, क्योंकि जबलपुर से चलकर यात्र को आज सीधे नागपुर पहुंचना है। आज का यह मार्ग भी पूर्णतया मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र का बार्डर क्षेत्र है। हांलाकि छत्तीसगढ़ में रायपुर से सीधे नागपुर जाना ज्यादा सरल रहता, लेकिन मध्य प्रदेश यात्र से फिर पूरी तरह से अछूता रह सकता था, अतः यात्र के रूटमैप में जबलपुर एंव भोपाल भी था। मध्य प्रदेश में बान्धवगढ़ भी रूटमैप में था, लेकिन जानकारी मिली कि अभी तो बान्धवगढ़ खुला ही नहीं है, अतः रूट में थोड़ा सा चेन्ज किया गया। जबलपुर से नागपुर पहुंचते-पहुंचते एक टायर पंचर हो चुका है अतः फिलहाल स्टेप्नी के बिना चला रहे हैं गाड़ी।
नागपुर दूरदर्शन केन्द्र में मीटिंग रखी हुई थी, बाद में टायर का पंचर लगवाना रविवार के कारण थोड़ा मुश्किल हुआ, लेकिन नागपुर से हैदराबाद पहुंचने की जल्दी में नागपुर ऑपरेटरो के साथ मीटिंग नहीं रखी, क्योंकि नागपुर में दिल्ली से पहुंचे सामान की भी गाड़ी में सैटिंग बनानी जरूरी थी। दिल्ली से आए रेलवे पार्सल्स को रेलवे स्टेशन से लेकर अपने पास तो सुभाष बान्ते ने रख लिए थे, लेकिन उन्हें खोलकर गाड़ी में सैट करने में काफी पसीने बहाने पड़े अमन को, वह पर गर्मी वाकई काफी ज्यादा थी नागपुर में आज का सफर भी काफी लम्बा है और सुना है कि सड़को की स्थिती भी कुछ ठीक नहीं है, अतः जल्दी निकलना चाहिए, लेकिन नागपुर पहुंच कर जल्दी निकल पाना सम्भव नहीं हो पाता है। लगभग शाम हो गई जब सुभाष बान्ते, नरेन्द्र ठाकरे आदि यात्र को विदा करते-करते स्वंय नागपुर के बाहर तक आ गए, वहीं उनके साथ थोड़ा खा-पीकर यात्र को आगे बढ़ाया क्योंकि सुबह से भी कुछ खाने की फुर्सत नहीं मिल सकी थी और आगे के सफर में भी कुछ मिलने वाला नहीं है। नागपुर से हैदराबाद का मार्ग वाकई बहुत ज्यादा खराब स्थिती में है। अतः हैदराबाद आधीरात के भी बहुत बाद में पहुंचना हुआ। आधी रात के बाद हैदराबाद पहुंचने पर होटल ढूंढने में काफी समय बेकार हुआ, लेकिन एक अच्छी बात थी कि भोजन पैक करवा कर रखवा दिया गया था वहा। हैदराबाद की व्यवस्था भाई सेवा सिंह जी ही देख रहे थे, जबकि वह स्वंय मुम्बई गए हुए थे। सेवा सिंह जी ने वहां की जिम्मेदारी हरीष जी की लगाई थी जिन्होंने होटल बुक करवाकर भोजन भी पैक करवा कर रखवा दिया था।
दूरदशर््न केन्द्र हैदराबाद में वहां के एम-एस-ओ- के साथ मीटिंग रखी गई थी। हैदराबाद भी पूरी तरह से डिजीटल हो गया है डैस के द्वितीय चरण के अड़तीस शहरों में हैदराबाद भी शामिल है। तकरीबन छः एम-एस-ओ- अभी काम कर रहे है, लेकिन कल को इनकी संख्या में बढ़ोतरी होने की सम्भावनाओं से इन्कार नहीं किया जा सकता है। यहां डैस एरिया को लेकर भी थोड़ा कन्फ्रयूजन है, लेकिन ऐसा प्रयास दूरदर्शन अधिकारियों के साथ एम-एस-ओ- का मिलना पहली बार हुआ है जिसकी सराहना यहां हर केाई कर रहा है। अभी हाल ही में तो आन्ध्रप्रदेश में से एक और प्रदेश तेलगांना को निकाला गया है अतः तेलंगाना का अपना एक चैनल भी पिछले ही शनिवार को शुरू किया गया है। सप्तागिरी नाम का यह चैनल भी अन्य प्रादेशिक चैनलों की तरह चौबीस घण्टों का है। इसी तरह एक चैनल विजयवाडा से भी सप्तागिरी आन्ध्र चलता है। तेलंगाना प्रदेश का यह चैनल सभी एम-एस-ओ- प्रसारण करें इस आग्रह के साथ मीटिंग निबटने पर वहां के केबल टी-वी- ऑपरेटरों द्वारा बुलाई गई मीटिंग लेकर हरीष भाई के साथ लंच कर यात्र आगे के पड़ाव कीओर बढ़ चली। दशहरा पर्व की यहां धूमधाम से शुरूआत हो चुकी है। यहां भी दशहरा पर विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। आज अपने वाहनों को साफ करने एंव सजाने पर लगे हुए है लोग। केले के पेड़ एंव पेठा यहां की पूजा में विशेष महत्व रखते है। वाहनों की सजावट में भी केले का विशेष इस्तेमाल यहां किया जाता है।
हैदराबाद से रवाना हो कर यात्र महबूूूब नगर दूरदर्शन केन्द्र पहुंची जहां मीटिंग बुलाई गई थी। महबूबनगर में अभी एनॉलाग प्रसारण ही हो रहा है अतः दूरदर्शन चैनलों को प्रोपर तरह से वहां ऑपरेटर नही चला रहे है। अभी मात्र 86 चैनल वहां प्रसारित किए जा रहे है, जबकि नजदीकी टाऊन को सीमा के ऑपरेटर को भी वहां बुलाया गया था, जो कि कुल 45 चैनल ही चला रहा है सभी आपरेटरों को केबल टी-वी- एक्ट की जानकारी एवं एक्ट का पालन करने का आग्रह कर यात्र कुरनूल दूरदर्शन केन्द्र पहुंची। कुरनूल में भी वही हाल है मात्र 98 चैनल एनॉलाग पर यहां चल रहे हैं लेकिल डिजीटल की भी पूरी तैयारी कर रखी है। दूरदर्शन केन्द्र कुरनूल के अधिकारी दक्षिणामूर्ति सहित अन्य के साथ केबल टी-वी- ऑपरेटरों की मीटिंग काफी सकारात्मक रही। कुरनूल के केबल टी-वी- आपरेटरों की एसोसिएशन भी बनी हुई है, उसके प्रमुख रमेश ने अन्य ऑपरेटरों सहित आल इण्डिया आविष्कार डिश एण्टिना संघ को भी ज्वाईन किया। यहां के आपरेटरों से दूरदर्शन केन्द्र कुरनूल को कोई शिकायत भी नहीं है। बड़े सोहार्द पूर्ण वातावरण में मीटिंग होने के बाद रात ज्यादा हो गई अतः यहीं पर रात्रि विश्राम का निर्णय लिया गया। अगली सुबह से ही पहली मीटिंग नान्दियाल में रखी हुई है। यहां के केबल टी-वी- ऑपरेटर एन- जया चन्द्र रेड्डी एंव लखेन्द्र रेड्डी ने डिजीटल कन्ट्रोल रूम लगाया है। उनके हैडेण्ड पर ही दूरदर्शन केंद्र नान्दियाल के अधिकारी एन- प्रभाकर रेड्डी को भी निमन्त्रित किया गया था, अतः भव्य स्वागत सतकार के बाद नान्दियाल में केबल टी-वी- आपरेटरों के आफिस में ही एक बड़ी मीटिंग रखी गई। ऑपरेटरों द्वारा यात्र के स्वागत के लिए विशेष प्रबन्ध किया गया था। उन्होंने बाकायदा वहां बड़े-बड़े हार्डिंग भी यात्र के स्वागत के लिए लगाए हुए थे। ऐसे हार्डिंग कई अन्य शहरों में यात्र के स्वागत में लगे हुए मिले।
नान्दियाल में दशहरा के अवसर पर रामलीला का भी आयोजन हुआ करता है, लेकिन यहां उत्तर भारत में होने वाली रामलीलाओं से बिल्कुल अलग होते है आयोजन यहां किसी भी एक प्रसंग अर्थात जैसे सत्यवादी हरिशचंद्र पर या फिर कर्ण के किसी विशेष प्रसंग पर या फिर लक्ष्मण परशुराम संवाद पर अर्थात प्रतिदिन किसी भी एक प्रसंग को लेकर इनका आयोजन होता है अपनी ही भाषा में, एंव कलाकारों को उनकी कला के प्रति पुरस्कृत भी किया जाता है, उनकी ड्रेसेस व मेकअप की बहुत तैयारी की जाती है एंव दूरदराज क्षेत्रें से परिवार भारी सख्ंया में देखने के लिए आते है। नान्दियाल मीटिंग के साथ-साथ मीडिया से भी यात्र पर बात कर यात्र के अगले पड़ाव के लिए बढ़ी यात्र। नान्दियाल से अगल है। दशहरा के साथ-साथ हो अक्टूबर की भी छुटियां शुरू हो गई है। इसी के साथ-साथ तमिलनाडू की मुख्यमन्त्री जयललिता की गिरफ्रतारी हो जाने के कारण माहौल थोड़ा ठीक सा नहीं है, वैसे भी तमिलनाडू में केबल टी-वी- पूरी तरह से वहां की सरकार के नियन्त्रण में है। केबल टी-वी- ऑपरेटरों के कन्ट्रोल रूम पर तमिलनाडू सरकार का विशेष रिवेन्यू इन्स्पेक्टर बैठता है। वहां प्रति कनेक्शन मात्र 70/- रूपए तय किया हुआ है एंव 70/- रूपए सरकार के आरासु केबल को जमा करवाना होता है। मात्र 50/- रूपए वहां के केबल टी-वी- ऑपरेटरों के हिस्से मे आता है, उसमे ही उसे सारे खर्चे उठाने होते है।
जयललिता की गिरफ्रतारी हो जाने के कारण तमिलनाडू में हालात थोडे से सामान्य नहीं प्रतीत हो रहे है, जबकि दशहरा पूजा के हिसाब से बाजारों में पूरी रोनक है, लेकिन कहीं-कहीं सड़को के किनारे कुर्सियां डाले सैकड़ों समर्थक शान्तिपूर्वक अनशन पर बैठे दिखाई देते है। कई जगह काले कपड़ों में तो कहीं कई समर्थकों को अपना मुण्डन करवाते हुए भी देखा। उनकी नेता जेल में है तो यह सब तो एक सामान्य सी प्रतिक्रिया है उन लोगों की, क्योकि अभी शीध्र ही जब कोर्ट खुलेंगी तब उनकी जमानत पर भी सुनवाई होनी है इसलिए उनके समर्थक शान्तिपूर्वक अपना विरोध दर्ज करवा रहे है। अब पूरी तरह से छुट्टी का माहौल है दो अक्टूबर के साथ दशहरा भी आ गया है जिस पर बीच में शनि-इतवार भी है इस लिए सबकी लम्बी छुट्यिां पड़ गई है।
यात्र आन्ध्र से चलकर तमिलनाडू होते हुए देर रात पोण्डिचेरी पहुंच गई। लम्बा सफर करते हुए यात्र जब पोण्डिचेरी पहुंची तब बहुत ज्यादा देर तो नहीं हुई थी, लेकिन साढ़े ग्यारह-बारह बज रहे थे। होटल जयराम में रूम तो बुक करवा दिया था, लेकिन उन्हें खाना पैक रखने के लिए भी बोला गया था, जो उन्होंने नहीं रखा था। रिशेप्शन पर अटैण्डैन्ट बिल्कुल भी कोपरेटिव नहीं था, उसने यह भी मदद नहीं की कि इस समय भोजन कहां मिल जाएगा यह भी बता दे। वह फौरन सो जाना चाहता था, जल्द बाज़ी में जो रूम दिया वह भी ठीक नहीं था, उनका बाथरूम का दरवाजा बन्द किए जाने पर उसे खोलने के लिए होटल के सिक्योरिटी मेैन को बुलाना पड़ा तभी खुला। रूम चेंज करने के लिए भी उस अटैण्डैन्ट ने असमर्थता दर्शा दी, बारहाल 1 सुबह होटल जयराम के मालिको से रात की शिकायत दर्ज करवाई लेकिन रात में खाने के लिए पोण्डिचेरी में काफी घूमना हो गया।
सिनेमा शो भी अभी-अभी छूटा था अतः हमें उम्मीद थी कि कुछ ना कुछ तो भूखे पेटों को मिल ही जाएगा, लेकिन काफी मुश्किले बढती जा रही थी। एक होटल अपनी गैस चूल्हे बन्द कर सफाईयाँ करवा रहा था, वहां से उनके पराठे व साम्भर तो हमने पैक करवा ही लिए, साथ मे थोड़ी सी बिरयानी के रूप में कुछ चावलों का कुछ बना भी पैक करवा लिया जिन्हें वह पराठे कह रहे थे वह कुल्चा जैसा कुछ था, जिसे खाने का मतलब कुछ भी हो सकता था साथ में साम्भर के रूप में उन्होंने जो भी दिया, वह हमने सिर्फ ले लिया था, बिल्कुल ठण्डा, जिसे खाने की बिल्कुल हिम्मत नहीं पड़ रही थी। अतः भोजन की तलाश में थोड़ा और घूमे तो पता लगा कि थोड़ी दूर पर एक हास्पिटल है उसके सामने एक दुकान है वहां खाने के लिए गर्म-गर्म कुछ मिल सकता है। वहां पहुंचे तो भीड़ पूरी थी, बिल्कुल भी फुर्सत नहीं थी, उसे वह चाऊमिन, एग चाऊमिन एंव चिकन चाऊमिन भी बनाने में लगा हुआ था। उसका तवा साफ करवा कर हमने अपने चावल गर्म करवाते हुए एग बिरयानी बनवाया और साथ में अपनी ब्रैड निकाल कर ब्रैड आमलेट बनवा कर खाया भोजन के बाद फिर होटल पहुंच कर बाथरूम का दरवाजा खुला ही रख रात गुजारी।
दूरदर्शन केन्द्र पोण्डिचेरी में सुबह ही मीटिंग रखी हुई थी, वहां सभी एम-एस-ओ- को निमन्त्रित किया गया था, लेकिन सलीम भाई को वह भूल गए थे। दूरदर्शन केन्द्र पोण्डिचेरी में जब यात्र पहुंची तो वहां पूजा चल रही थी। विजय दशमी की पूजा जिसमें उपकरणो कैमरा आदि भी पूजा के लिए रखे हुए थे। मन्त्रेचारण के साथ पारम्परिक वेशभूषा में दो पण्डित पूजा करवाने में लगे हुए थे। पूजा में नारियल भी फोड़ा गया और पेठा भी नजर के नजरबट्टू की तरह एंव केले का भी पूजा में विशेष महत्व हाेता है, बाद में आरती भी सबने ली। इसके बाद मीटिंग की शुरूआत हुई। एक बहुत अच्छा अनुभव हुआ पोण्डिचेरी में साथ में दशहरा के अवसर पर घर परिवार से दूर होने के बावजूद भी घर से इतनी दूर दक्षिण के किनारे पर होते हुए विजय दशमी की पूजा में शामिल होने का अवसर मिल गया। पोण्डिचेरी दूरदर्शन केन्द्र में यहां के सभी पांचो एम-एस-ओ- शामिल थे। एनॉलाग डिजीटल दोनो ही यहां चल रहे है। अभी डैस के अर्न्तगत नहीं शामिल हुई है पोण्डिचेरी यह तीसरे चरण में शामिल हो जाएगी। पोण्डिचेरी वालों में भी थोड़ा सा भय तो दिखाई देता है कि तमिलनाडू की ही तरह यहां भी ना हो जाए क्योंकि यहां तमिलनाडू का प्रभाव ज्यादा है। दशहरा के साथ
गान्धी जयन्ती की छुट्टियां शुरू हो चुकी है एंव जयललिता जी के जेल में होने के कारण तमिलनाडू के हाल सामान्य नहीं कहे जा सकते है। इसलिए मीटिंग से निबटकर होटल मे ही मो-सलीम की पत्नी से भेंट की उन्हे रात की परेशानियों से अवगत करवाकर अगले पड़ाव के लिए बढ़ चली यात्र। गान्धी जयन्ती के अवसर पर पोण्डिचेरी से निकल कर तमिलनाडू में जयललिता जी के लिए लोगों का शान्तिपूर्वक किया जा रहा विरोध कई जगह देखने को मिला कहीं भी हिंसक या उग्र विरोध नहीं मिला, लेकिन सड़कों के किनारे कुर्सियों पर लोग विरोध में दूर तलक अनशन पर बैठे दिखाई दे रहें थे। कहीं-कहीं काले कपड़ों में तो कही-कही लोग सड़कों पर अपना मुण्डन भी करवा रहे थे, बाकी सब पूर्णतः सामान्य ही था। दशहरा उत्सव के लिए बाजार पूरी तरह से सजे हुए थे और खरीदारों की भीड़ भी। पोण्डिचेरी से तमिलनाडू की यात्र में भोजन की समस्या इस क्षेत्र में आनी ही थी अतः साथ में ब्रैड-बटर आदि तो रख लिए थे, लेकिन खीरा, टमाटर नहीं रख सके थे, जिन्हें लेने के लिए कई बाजारों में रूक कर हमने खीरा ढूढ़ा लेकिन कही भी नहीं मिला। शायद इस क्षेत्र में खीरा नहीं होता हो। इसलिए वैज सैण्डविच बनाने के लिए तो सामान ही नहीं था, लेकिन एक्सप्रैस हाइवे पर चढ़ने से पूर्व एक ढ़ाबा सा दिखाई दिया तब उस ढ़ाबे वाले को अपनी ब्रैड-बटर देकर ब्रैड आमलेट बनवा कर खाएं, चाय पी और यात्र आगे बढ़ कर सीधे मदुरई जाकर रूकी। मदुरई तमिलनाडू का एक बड़ा व धार्मिक आस्था वाला शहर है। यहां प्रसिद्ध मीनाक्षी टैम्पल है। मदुरई पहुंचते-पहुंचते भी रात काफी हो चुकी थी, लेकिन एक अच्छे होटल में रात्रि विश्राम के साथ-साथ भोजन भी मिल गया।
लोगो के रंग बिरंगे आकर्षक वस्त्र एक-दूसरे से बहुत भिन्न थे एवं सबकी पूजा मे एक अलग तरह का जोश था। कन्याकुमारी पहुंचने तक थोड़ी देर हो चुकी थी, अतः वहां बीच समुन्द्र में बनी स्वामी विवेकानन्द जी की मूर्ति तक जाना नहीं हो सका, क्योंकि वहां जाने वाली फेरी का समय खत्म हो चुका था। वही रूककर सूर्यास्त होते हुए कैमरे में कैद किए एंव प्राकृतिक घटा का आनन्द लिया लहरों के थपेड़ों को पृथ्वी से टकरा टकरा कर दिए जा रहे सन्देश को बहुत कुछ समझने की कोशिश की और फिर वहां से यात्र केरल के लिए रवाना हो गई लेकिन इस बीच आने वाले अनेक छोटे-छोटे तमिलनाडु के कस्बों में दशहरा उत्सव की अनोखी घटा भी कैमरे में कैद करते हुए यात्र आगे बढ़ती रही। तमिलनाडु से केरल पहुंच जाने के बाद दशहरा उत्सव का छोटा सा कार्यक्रम भी कहीं नहीं दिखाई दिया जबकि दोनो राज्यों की सीमाएँ एक-दूसरे से बहुत दूर या अलग नहीं है। हांलाकि रात्रि पहर तो कन्याकुमारी से ही शुरू हो चुका था, लेकिन केरल में दशहरा पर्व नहीं मनाया जाता है। केरल में ओनम का पूर्व मनाया जाता है। ओनम के रूप में गाय के मुख के साथ दो बड़े पुतले वहां खड़े कर रोजाना वहां पूजा की जाती है, उसे ही देखने के लिए लोगों की भीड़ वहां आती है।
लोगो के रंग बिरंगे आकर्षक वस्त्र एक-दूसरे से बहुत भिन्न थे एवं सबकी पूजा मे एक अलग तरह का जोश था। कन्याकुमारी पहुंचने तक थोड़ी देर हो चुकी थी, अतः वहां बीच समुन्द्र में बनी स्वामी विवेकानन्द जी की मूर्ति तक जाना नहीं हो सका, क्योंकि वहां जाने वाली फेरी का समय खत्म हो चुका था। वही रूककर सूर्यास्त होते हुए कैमरे में कैद किए एंव प्राकृतिक घटा का आनन्द लिया लहरों के थपेड़ों को पृथ्वी से टकरा टकरा कर दिए जा रहे सन्देश को बहुत कुछ समझने की कोशिश की और फिर वहां से यात्र केरल के लिए रवाना हो गई लेकिन इस बीच आने वाले अनेक छोटे-छोटे तमिलनाडु के कस्बों में दशहरा उत्सव की अनोखी घटा भी कैमरे में कैद करते हुए यात्र आगे बढ़ती रही। तमिलनाडु से केरल पहुंच जाने के बाद दशहरा उत्सव का छोटा सा कार्यक्रम भी कहीं नहीं दिखाई दिया जबकि दोनो राज्यों की सीमाएँ एक-दूसरे से बहुत दूर या अलग नहीं है। हांलाकि रात्रि पहर तो कन्याकुमारी से ही शुरू हो चुका था, लेकिन केरल में दशहरा पर्व नहीं मनाया जाता है। केरल में ओनम का पूर्व मनाया जाता है। ओनम के रूप में गाय के मुख के साथ दो बड़े पुतले वहां खड़े कर रोजाना वहां पूजा की जाती है, उसे ही देखने के लिए लोगों की भीड़ वहां आती है।
कन्या कुमारी से केरल पहुंचने में फिर रात ज्यादा हो चुकी थी, अतः त्रिवेन्द्रम पहुंचते-पहुंचते होटल व भोजन दोनों समस्याओं से दो चार होना पड़ा होटलों में भीड़ एक दम से बढ़ती जा रही थी, क्योंकि भारी सख्ंया में वहां लोग परिवार सहित छुट्टियँा बिताने पहुंच रहे थे। यह देख कर आश्चर्य हो रहा था कि अच्छा सा दिखाई देने वाले होटल में जाते ही पता लगता था कि फुल है। किसी शहर में ऐसा हमें पहली बार देखने को मिला क्योंकि ऐसे कई होटलों से वापिस आना पड़ा। होटल के साथ-साथ भोजन के लिए भी समय बीतता जा रहा था, अतः तय हुआ कि हम भी बटकर काम करें। हमने अपनी दो पार्टिया बना दी एक होटल के लिए तो दूसरी भोजन तलाश कर पैक करवा कर ले आने के लिए। आखिरकार जो होटल मिला उसमें खाना मिलता ही नहीं था, लेकिन खाने के लिए तो हमने अपना बन्दो बस्त कर ही लिया था। त्रिवेन्द्रम केरल का एक अच्छा और बड़ा शहर है। यहां सुबह दूरदर्शन केन्द्र में मीटिंग बुलाई हुई है। आज दो आक्टूबर है यानिकि महात्मा गान्धी जी की जयन्ती है, जबकि कल दशहरा है।
केरल में केबल टी-वी- बहुत ही सलीके से चलाते हैं ऑपरेटर। यहां पर ऑपरेटरों की यूनिटी पूरे देश के केबल टी-वी- ऑपरेटरों के लिए एक मिसाल है। तकरीबन 3000 हैडेण्ड अभी भी केरल में होगे, जबकि 250 से अधिक तो लेाकल चैनल चलाए जाते है। एशियानैट, डैन, सिटी सहित केबल टी-वी- ऑपरेटरों का संगठित के-सी-सी-एन- (ज्ञब्ब्छ) एंव के-सी-सी-एल (ज्ञब्ब्स्) नैटवर्क अनेक शहरों में चलता है। केबल टी-वी- ऑपरेटरों की दो एसोसिएशन है, दोनो के अलग-अलग नैटवर्क है। इनमें एक गोविन्दम एंव दूसरे जयदेवगन प्रमुख है जिनकी केबल टी-वी- ऑपरेटरों में अच्छी रैस्पैक्ट है। दूरदर्शन केन्द्र त्रिवेन्द्रम की मीटिंग में आए ऑपरेटरों के लिए भोजन का भी इन्तजाम किया गया था। एक अच्छी मीटिंग त्रिवेन्द्रम दूरदर्शन केंन्द्र में हुई। केरल में एनॉलाग कन्ट्रोल रूम तो सभी जगह लगे हुए है, जबकि डिजीटल फीड सभी को पहुंचती है। अतः दूरदर्शन चैनलों के लिए कोई समस्या नहीं है। त्रिवेन्द्रम मीटिंग के बाद यात्र सीधे कोची के लिए रवाना हो गई क्योंकि कोची दूरदर्शन केन्द्र में यात्र के स्वागत के लिए प्रतीक्षा की जा रही है। केरल के शहरों के नाम अलग है जैसे त्रिवेन्द्रम को तिरूवंतपुरम कहा जाता है, इसी तरह कोच्ची को इरनाकुलम भी कहा जाता है। त्रिवेन्द्रम में एशियानैट-डैन एंव के-सी-सी-एन- का ही नैटवर्क चलता है। वहां से केरल के प्राकृतिक सौन्दर्य को निहारते हुए यात्र कोच्ची पहुंची। कोच्ची दूरदर्शन केन्द्र में भी काफी ऑपरेटर प्रतीक्षा कर रहे थे। यहां एशियानैट, डैन, सिटी केबल के-सी-सी-एन- सहित भूमिका क्लीयरविजन टैन(जमद) एंव आर एण्टरटैन नैटवर्क आदि भी प्रचलन में है। तकरीबन सभी डिजीटल सेवा दे रहें है, अतः दूरदर्शन चैनलों के लिए समस्या नहीं है।
देशभर में आज दशहरा पूजन हो रहा है, लेकिन केरल में ऐसा कहीं भी नहीं प्रतीत हुआ कि इनका दशहरा उत्सव से कोई ताल्लुक भी है। हम यहां वह तलाशने की कोशिश कर रहे थे कि यहां के हिन्दु किस तरह दशहरा मनाते है, लेकिन दशहरा मनाने जैसा कहीं कुछ नहीं दिखाई दिया बल्कि एक शहर से गुजरते हुए राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के दो व्यक्ति पूर्व गणवेश में एक स्कूटर पर जाते हुए दिखाई दिए आगे बढ़ने पर कुछ और पूर्ण गणवेश संघ के व्यक्ति देखे गए, लेकिन दशहरा उत्सव की कोई झलक नहीं दिखलाई दी। इसी बीच सड़क के किनारे दो बड़े से पुतले जिनका सिर गाय के मुख जैसा था, लेकिन काफी ऊंचा पुतला जैसे दो बैलों की जोड़ी बनाई गई हो दिखाई दी तब वहां रूक कर उनके बारे में और जानकारी ली गई।
मालूम हुआ कि यह शिव पावर्ती की अराधना के लिए ओनम होता है। ओनम बनाने में कई दिन लग जाते हैं यह विश्व का नम्बर वन ओनम है। इसकी ऊँचाई वजन आदि सबसे ज्यादा है इसे गिनीजरिकार्ड में दर्ज करवाने के लिए भी उन्होंने उन्हें इन्वाइट किया है। प्रतिदिन यहां आकर श्रद्धालु पूजन करते है एंव बाद में सब मिलकर इसे रस्सियों से खींचकर यहां यात्र निकाली जाती है। कोच्ची से यात्र सीधे त्रिशूर पहुंची। त्रिशूर दूरदर्शन केन्द्र में कल सुबह मीटिंग रखी हुई है। केरल में जिस तरह से हरियाली ही हरियाली दिखाई देती है इतनी देश के किसी अन्य राज्य में नहीं दीखती है। रात्रि विश्राम कर सुबह त्रिशूर दूरदर्शन केन्द्र में काफी बड़ी संख्या में ऑपरेटर आए हुए थे। मीटिंग बहुत ही सकारात्मक रही यहां भी एशिया नैट, सिटी, डैन एंव के-सी-सी-एन- के नैटवर्क है, जो कि डिजीटल फीड चला रहें है। यहां दूरदर्शन चैनलों को लेकर भी कोई शिकायत नहीं है एंव दूरदर्शन कर्मचारी भी मिलन सार है, सभी आपस में मिलते भी रहते है। त्रिशूर मीटिंग से निबट कर यात्र सीधे काजिकोड जिसे कालीफट भी कहते है के लिए रवाना हो गई। आज सारे रास्ते बाज़ारों में आज खूब भीड़ नजर आ रही है क्योंकि कल ईद है। ईद के कारण इस क्षेत्र में अच्छे होटलों में कोई भी रूम उपलब्ध नहीं है, क्योंकि यहां के ज्यादातर परिवार तो बाहर काम करते है जो ईद पर वापिस आते है, उनमें से अनेक ऐसे भी होते है जिनके लिए होटलों मे बुकिग पहले ही हो चुकी होती है।
जबकि आज यात्र को जी जोड़ से आगे बढ़ कर सुल्तान बतेरी विनयाड पहुंचेगी। सुल्तानबतेरी विनयाड एक हिल स्टेशन है, यही से रिजर्व फारेस्ट भी शुरू हो जाता है। यह फारेस्ट केरल कर्नाटक एंव तमिलनाडू तीन राज्यों में बंटता है, काफी बड़ा फारेस्ट एरिया है। कोच्ची के बाद केाजीकोड (कालीकट) पहुंची यात्र, जहां यात्र के स्वागत में होडिंग भी लगाए गए थे। भारी सख्ंया में ऑपरेटर वहां यात्र की प्रतीक्षा में थे। कोजीकोड में के-सी-सी-एन- की जगह के-सी-सी-एल- एंव एशिया नैट,डैन केसीएल व विनयाड कम्युनिकेशन नैटवर्क थे, जो सभी डिजीटल मोड पर है अतः दूरदर्शन चैनलों के लिए कोई परेशानी नहीं है। के-सी-सी-एन- प्रमुख के गोविन्दम के द्वारा रात्रि विश्राम हेतु सुल्तानबतेरी के एक होटल में हमारे लिए समय रहते बुकिंग करवा दी गई थी, अन्यथा रात्रि विश्राम के लिए प्रोब्लम होना तय था। सुबह से ही इर्द की चहल-पहल वहां सब तरफ दीख रही थी। हमारे साथ में एक सहयोंगी ईद वाला भी था, अतः वह ईद की नमाज़ पढ़ कर आया तब वहां से यात्र आगे बढ़ी। सुल्तानबतेरी में ही के-गोविन्दम भी मिलने आ गए। उनके साथ-साथ रिजर्व फाटेस्ट देखने के लिए हम पहुंचे लेकिन लेट हो जाने के कारण फारेस्ट में जाने की अनुमति नहीं मिल सकी अतः गोविन्दम से विदा लेकर केरल से कर्नाटक की और बढ़ चली यात्र। केरल के फारेस्ट मार्ग से होते हुए यात्र सीधे मैसूर पहुंचीं। मैसूर में भी ईद का माहौल था। मैसूर से आगे के सफर के लिए हम आपको अगामी अंक पर ले जाना चाहेंगे, कृप्या प्रतीक्षा करें यात्र अभी जारी है।
हैदराबाद से रवाना हो कर यात्र महबूूूब नगर दूरदर्शन केन्द्र पहुंची जहां मीटिंग बुलाई गई थी। महबूबनगर में अभी एनॉलाग प्रसारण ही हो रहा है अतः दूरदर्शन चैनलों को प्रोपर तरह से वहां आपरेटर नही चला रहे है। अभी मात्र 86 चैनल वहां प्रसारित किए जा रहे है, जबकि नजदीकी टाऊन को सीमा के आपरेटर को भी वहां बुलाया गया था, जो कि कुल 45 चैनल ही चला रहा है सभी आपरेटरों को केबल टी-वी- एक्ट की जानकारी एंव एक्ट का पालन करने का आग्रह कर यात्र कुरनूल दूरदर्शन केन्द्र पहुंची। कुर्नल में भी वही हाल है मात्र 98 चैनल एनॉलाग पर यहां चल रहे हैं लेकिल डिजीटल की पूरी तैयारी किए है। दूरदर्शन केन्द्र कुरनूल के अधिकारी दक्षिणामूर्ति सहित अन्य के साथ केबल टी-वी- आपरेटरों की मीटिंग काफी सकारात्मक रही।

चेतना यात्रा (भाग-6)
मैसूर से जबलपुर
चेतना यात्र 10 देश के बिल्कुल नीचे अथार्त मां भारती के चरणो मे शीश नवा कर वापिसी के रास्ते पर आ चुकी है। यानिकि कन्याकुमारी से केरल होते हुए कर्नाटक पंहुच गई है। केरल में त्रिवेन्द्रम-कोच्ची, त्रिशूर-कोजीकोड से लेकर सुल्तानबतेरी वृतान्त तक आपको पूर्व स्मृतियोें में छोडा था, वंहा से आगे का मार्ग पूरी तरह से जंगल का है। बहुत बड़ा विशाल फारेस्ट वायनाड बान्दीपुर एंव अन्नामलाई रिजर्व फारेस्ट यानिकि केरल का वायनाड, कर्नाटक का प्रसिद्ध बान्दीपुर एंव तमिलनाडू का अन्नामलाई रिजर्व फारेस्ट इसी मार्ग पर है। यही से ऊटी के लिए भी मार्ग जाता है और ऊटी मैंसूर मार्ग भी बहुत खूबसूरत है यह मार्ग जहां प्राकृतिक की विशेष कृपा हैं एंव इस मार्ग पर कही भी आपको जंगली जानवरो हाथी-हिरन भालू-जंगली भैंसे से लेकर टायगर भी मिल सकता हैै। इस मार्ग से गुजरते हुए यात्र केरल से कर्नाटक में एंट्री कर टीपू सुल्तान के नगर मैंसूर पहुंची। मैंसूर की अपनी खूबसूरती है जोकि आज भी अपनी प्राचीन एतिहासिक पहचान को उसी तरह से बनाए हुए हैै। यंहा का दशहरा विश्व प्रसिद्ध हैं जिसे देखने दुनियाभर से लोग हर साल मैसूर आते है। मैसूर सिल्क का नाम पूरी दुनिया में बड़े अदब के साथ लिया जाता है। अभी कल ही दस दिन से चल रहा दशहरा उत्सव कार्यक्रम सम्पन्न हुआ है, अतः आज केरल-मैसूर से लोग वापिसी कर रहे है, क्योकि कई
छुट्टि के बाद कल से सबको अपने- अपने काम पर लग जाना होगा। आज ईद भी निबट जाएगी अतः कल से फिर सबको पूर्वत अपने काम पर लग जाना होगा। मैसूर में ऑपरेटरो के साथ भेट़ कर यात्र के बारे में भाई रंगानाथन के न्यूज चैनल के लिए बाइट दे कर यात्र बंगलोर के लिए बढ़ चली।
मैसूर-बंगलोर का रास्ता यूं तो मात्र एक से डेढ़ घण्टे का ही होता है लेकिन आज ढ़ाई बजे दोपहर को मैसूर से चले तो रात को नौ बजे के बाद बंगलौर पहुंच सकी यात्र बंगलौर पहुंचने वालो की आज बहुत ज्यादा भीड थी क्योकि छुटि् बिताकर आज वापिस जा रहे थे। बंगलौर मेें रखी गई मीटिंग रद्द कर देनी पड़ी लेकिन आज वहा एक विशेष कार्यक्रम में भी हमने पहुचने का वायदा किया हुआ था,अतः इतनी भीड़ को पार करते हुए हम वहा पहुंचने का प्रयास करते रहे जबकि लगातार बारिस भी बीच-बीच में होती रही डा- महेश जोशी के सुपुत्र के वैवाहिक रिशेप्शन कार्यक्रम में आज हमने पहुंचने का उनके साथ प्रोमिस किया था,अतः सारी बाधाओ को पार कर हमने वहां पहुच कर उन्हे बधाई दी, लेकिन शीघ्र ही वहां से विदा लेेकर रात्रि विश्राम के लिए भाई मंजू टी आर के साथ बंगलौर द क्लब में आश्रय लिया जबकि बारिश ने रुकने का नाम नही लिया। बंगलौर से अगले दिन जल्दी ही अगले पडाव की ओर चली यात्र क्योकि यहा रुकने का मतलब आगे तक का कार्यक्रम बिगड जाना था। जबकि दिल्ली से महीनाभर पूर्व यात्र आरम्भ होने के बाद अभी तक अपने पूर्व निर्धारित कार्य क्रमानुसार ही चल रही है। बंगलौर से सीधे टुमकुर होते हुए यात्र तिप्तूर पहुंची जहां सतीश अन्य ऑपरेटरों के साथ यात्र के स्वागत के लिए प्रतीक्षा कर रहे थे।
ऑपरेटरों के साथ मीटिंग के बाद यात्र चिकमगलूर के मार्ग पर आगे बढ़ रही थी, लेकिन जबर्दस्त बारिश थी जैसे तूफान ही आया हुआ हो, सड़को पर पेड़ गिरे पड़े थे ऊपर से हैवी रेन आगे बढ़ने का रास्ता ही रोके दे रही थी। तकरीबन सारे वाहन सड़कों पर खड़े हो गए थे। ऐसे तूफान में कोई आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था, लेकिन रूकने से तो काम नहीं चलेगा, यात्र को तो आगे बढ़ना ही होगा। अतः थोड़ी गति धीरे कर यात्र निरन्तर आगे बढ़ते हुए शिव मोगा पहुंच गई। शिव मोगा दूरदर्शन केन्द्र में मीटिंग रखी हुई थी जहां आस-पास क्षेत्रें से भी काफी ऑपरेटर पहुंचे हुए थे। दूरदर्शन केन्द्र शिव मोगा में एनॉलाग प्रसारण के कारण कुछ समस्याएँ सामने आई, लेकिन शीघ्र ही उन समस्याओं का समाधान कर दिया जाएगा ऐसा आश्वासन सभी ऑपरेटरों से लेकर दूरदर्शन केन्द्र के कर्मचारियों से यात्र ने विदाई ली, जबकि रात इतनी हो चुकी थी कि अब यहां से आगे बढ़ने का कोई लाजिक नहीं था। नवीन गूजर एंव नागेन्द्र भाई पहले से ही हमारे लिए किसी होटल में ठहरने की व्यवस्था कर चुके थे अतः शिव मोगा से अब कल ही यात्र अगले पड़ाव के लिए रवाना होगी। सुबह नवीन गूजर एंव नागेन्द्र आदि आपरेटरों से विदाई लेकर यात्र दावणगीरी के लिए रवाना हो गई जहां भाई जकीउल्लाह आदि पूरी एसोसिएशन के साथ यात्र के स्वागत की प्रतीक्षा में है। शिवमोगा तक पहुंचते-पहुंचते किस तरह से तूफानी बारिश ने यात्र का स्वागत किया था उसका वर्णन तो हम कर चुके है, लेकिन यह मार्ग भी कुछ ऐसा है कि जिसका जिक्र जरूरी है। सड़क के दोनो ओर इमली के पेड़ खड़े हुए है जिन पर इमली लदी हुई है, जबकि इस क्षेत्र में किसानों को कुछ नया करते देख जानने की उत्सुकता हुई कि आखिर वह कर क्या रहे है। उनके पास जाकर देखा तो वहां सुपारी निकाली जा रही थी। इस क्षेत्र में सुपारी की खेती होती है। खेती से हमारा मतलब है कि सुपारी यहां पर कुटीर उद्योग की तरह होती है। दूरतलक सुपारी के पेड़ नारियल के पेड़ों की ही तरह से खड़े है। सुपारी के पेड़ से सुपारी फलों को तोड़कर उन्हें काटकर उनमें से सुपारी निकालना, सुखाना, रंगना आदि का काम यहां जगह-जगह देखने को मिलता है। थोड़ी सी स्मृतिया सुपारी वाली कैमरे में कैद कर वहां खड़े इमली के पेड़ो पर से थोड़ी इमली भी तोड़ी और फिर सीधे दावणगीरी पहुंची यात्र। लेकिन दावणगीरी शहर में धुसते हुए एक नए तरह के फल वहां बीच पटरियों पर खड़े पेड़ों पर लटके दिखाई दिए। रूक कर उन पेड़ों से फलों को जानने की कोशिश की लेकिन कोई जानकारी नहीं मिल सकी। आश्चर्य की बात तो यह है कि सामान्य तौर पर पाए जाने वाले बड़े-बड़े खीरों से भी बड़े-बड़े यह फल उन पेड़ों पर लम्बी लताओं से लटके हुए है। एक-एक लता से कई-कई फल लटके हैं, जिनका वजन एक का कम से कम ढ़ाई तीन किलो से कम नहीं होगा, यानिकी एक-एक लता पर दस पन्द्रह किलों से भी बहुत ज्यादा वजन लटका हुआ एवं पेड़ पर ऐसी सैकड़ों लताएँ लटक रही हो, वह भी बहुत मजबूती के साथ, क्योंकि उन फलों को हाथ में लेकर जब तोडने का प्रयास किया गया, तब वह टूटे नहीं बल्कि लता को काटा गया। कुदरत के करिश्में भी अजीब होते है। हमने उस पेड़ व फल के फोटो फेसबुक पर भी डाले, लेकिन उनके बारे में जानकारी नहीं मिल सकी।
हमारे सहयोगी इमरान ने इसका नाम बालम खीरा बताया है, इसी जिज्ञासा के साथ यात्र दावणगीरी पहुंच गई। दावणगीरी केबल टी-वी- ऑपरेटर्स एसोसिएशन के जकी उल्लाह भाई यात्र के स्वागत के लिए अन्य ऑ परेटरों के साथ अपने नए शुरू किए गए कन्ट्रोल रूम में प्रतीक्षा कर रहे थे। उन्होंने नया डिजीटल क्न्ट्रोल रूम लगाया है। उनके साथ मीटिंग के बाद वहां से यात्र आगे हुब्बली के लिए बढ़ चली जहां पर भाई शब्बीर आदि यात्र के स्वागत की प्रतीक्षा में है। बारिश लगातार हो रही है, सुना है कि कोई तूफान आने की सम्भावनाएँ है। भारी बारिश में हुब्बली पहुंच कर शब्बीर भाई को फोन किया तब वह हाईवे पर ही लेने आ गए, उन्होंने भी यात्र के स्वागत-सम्मान का कार्यक्रम रखा हुआ था, वहां पहुंच कर भावी सम्भावनाओं पर आपरेटरों के साथ मीटिंग कर शीघ्र ही यात्र कर्नाटक से महाराष्ट्र की ओर बढ़ चली। फिर से यात्र एक्सप्रैस हाईवे पर कोल्हापुर की ओर बढ़ रही थी। अच्छा एक्सप्रैस हाईवे है यह घारवाड होते हुए रात में कोल्हापुर पहुंच ही गई यात्र।
कोल्हापुर मेें रात्रि विश्राम के लिए समय रहते व्यवस्था बना दी गई थी, इसलिए देर रात में पहुंचने पर भी परेशानी नहीं हुई। हमारे लिए इस यात्र में महाराष्ट्र का यह पहला शहर था। महाराष्ट्र में जयललिता की गिरफ्रतारी का कोई फर्क नहीं पड़ा, लेकिन पीछे दावणगीरी में हमे जानकारी मिली कि तमिलनाडू मे कर्नाटक के वाहनों में तोड़फोड़ की जा रही है, क्योंकि जयललिता की जमानत पर आज सुनवाई थी एंव कोर्ट ने उनको जमानत नहीं दी है, ऐसी खबरों का प्रसारण हो जाने के बाद वहां हो रही हिंसा की भी खबरें टी-वी- पर आ रही है। जबकि दावणगीरी से पूर्व शिवमोगा में जयललिता समर्थकों का खुशियां मनाते दिखला रहे थे टी-वी-, क्योंकि उन्हें गलतफहमी हो गई थी कि अम्मा को जमानत दे दी गई है।
कोल्हापुर में जी-टी-पी-एल- का भी नैटवर्क चलता है, उनसे सुबह मीटिंग कर एक राऊण्ड इस एतिहासिक शहर का लेकर शीघ्र ही यहां से आगे के लिए बढ़ चली यात्र क्योंकि सफर आज का भी बहुत लम्बा है, आज पूने में थोड़ा रूकने के बाद सीधे मुम्बई पहुंचनी है यात्र, जबकि कल भी शिवमोगा से आरम्भ हुई थी यात्र और लम्बी दूरी तय कर हैवी रेन के बावजूद भी कोल्हापुर पहुंची। इस बीच सभी मीटिंग भी ली गई। दूरदर्शन केन्द्र पूने द्वारा चेतना यात्र पर एक कार्यक्रम बनाया जाता है, अतः उन्होने यात्र की शूटिंग का कार्यक्रम पूने में रखा है। पूने मुम्बई हाईवे पर चढ़ने से पूर्व पूने में दूरदर्शन केन्द्र के कैमरा मैन को चेतना यात्र के बारे में बताते हुए फुटेज देकर यात्र पूने से मुम्बई के लिए रवाना हो गई। मुम्बई में दिल्ली से अनुराग पहुंचा हुआ है। यात्र भी टाइमली ही मुम्बई पहुंच गई। जुहू बीच पर ही एक साफ सुथरे होटल दे बीच गार्डन में मुम्बई विश्राम का प्रबन्ध अनुराग ने किया हुआ है। मुम्बई में इण्डष्ट्री पर प्रत्येक वर्ष होने वाली प्रदर्शनी का भी आयोजन इस बीच ही है। अतः अगला पूरा दिन सुबह से शाम तक वहीं कपडे में एक्ज़ीबीशन स्थान पर सभी से भेंट और चर्चा होती रही। अगले दिन सुबह पहली मीटिंग टाटा स्काई प्रमुख श्री हरित नागपाल जी के आफिस में लंच पर हुई, वहीं पर दूरदर्शन केन्द्र मुम्बई के अधिकारी भी बुला लिए गए थे। दूरदर्शन चैनलों को डीटीएच पर पूरी तरह से कानून के अनुसार नहीं चलाया जा रहा है, ऐसी शिकायत दूरदर्शन अधिकारियों की ओर से लगातार की जा रही थी अतः डीटीएच के क्षेत्र मे सबसे ज्यादा प्रचलित टाटा स्काई के श्री हरित नागपाल के साथ हुई बैठक विशेष महत्व रखती थी। श्री नागपाल जी ने लंच की भी व्यवस्था मीटिंग के साथ-साथ की हुई थी। बहुत ही सकारात्मक रही यह डीटीएच व दूरदर्शन मीटिंग।
टाटा स्काई के आफिस में हुई मीटिंग से दूरदर्शन केन्द्र मुम्बई के अधिकारी पूर्णतया सन्तुष्ट थे, इसके बाद एक मीटिंग मुम्बई के प्रमुख एम-एस-ओ- के साथ दूरदर्शन केन्द्र में रखी गई थी। मुम्बई के सभी एम-एस-ओ- तो नहीं लेकिन वहां के प्रमुख एम-एस-ओ- इन केबल व हैथवे के प्रतिनिधी मीटिंग में उपस्थित रहे। इस मीटिंग मे टैक्नॉलाजी पर भी कुछ विशेष चर्चा हुई जबकि मुम्बई तो पूरी तरह से डैस सिटी है अतः दूरदर्शन के चैनलों को प्रसारित करने में मुम्बई के ऑ परेटरों को कोई परेशानी नहीं है। परेशानी है तो पांच सितारा होटलों में चल रहे निजी नैटवर्क के कारण है। इनमें होटलों मे अपने एनॉलाग कन्ट्रोल रूम चल रहे है, जहां दूरदर्शन के सभी चैनल देखने को नहीं मिलते है। बारहाल दूरदर्शन केन्द्र मुम्बई की मीटिंग के बाद मुम्बई अन्धेरी के द क्लब पहुंच कर बी-सी-एस- रत्ना अवाडर््स के लिए उसको देखा। क्योंकि हर वर्ष इण्डष्ट्री पर किए जाने वाला बी-सी-एस- रत्ना अवार्ड्स इस बार दिल्ली से बाहर यदि मुम्बई किया जाए तब उसके लिए कोई बेहतर वैन्यु की तलाश तो अभी से ही शुरू करनी होगी। यात्र मुम्बई से आगे निकलने से पूर्व नागेश छाबड़िया के ऑफिस पहुंची जहां इण्डष्ट्री की भावी सम्भावनाओं पर लम्बी डिस्कशन के चलते काफी देर हो गई। नागेश भाई हिन्दुजा ग्रुप परिवार के दामाद होने के साथ-साथ केबल टी-वी- में एक बड़ा नाम भी है। पूर्व में इन केबल को वही सम्भालते थे, लेकिन इन केबल छोड़ने के बाद उन्होंने अपनी शुरू की है। महाराष्ट्र में उनके निजी कनैक्शन काफी हैं व कई शहरों में उनके नैटवर्क है। नागेश के साथ मीटिंग के बाद यात्र मुम्बई से अगले पड़ाव की ओर रवाना हुई। हालांकि मुम्बई में ही रात हो चुकी थी, लेकिन रात की सोचकर आगे नहीं बढ़ेगे तो पूर्वनिर्धारित कार्यक्रमानुसार नहीं पहुंचा जा सकेगा। नागेश के साथ मीटिंग से पूर्व अमन की रवानगी दिल्ली के लिए हुई, क्योकि अभी पिछले दिनों ही उसकी शादी हुई थी, यात्र पर तो वह हर साल होता ही है, लेकिन करवा चौथ उसकी पहली थी, अतः अनुराग ने अमन के स्थान पर यात्र की जिम्मेदारी को सम्भाला और अमन को दो दिनों के लिए दिल्ली भेजा गया, वह अहमदाबाद आकर यात्र को ज्वाइन करेगा एवं अनुराग अहमदाबाद से फ्रलाइट लेकर दिल्ली चला जाएगा। इस प्रकार पारिवारिक परम्पराएँ भी यात्र के साथ बनी रह जाएंगी। मुम्बई से निकलते-निकलते यात्र को देर हो गई थी अतः वहां से नाशिक पहुंचने में भी काफी रात हो गई। नासिक में अनुराग की सुसराल में सब प्रतीक्षा कर रहे थे। रात्रि विश्राम के बाद शीघ्र ही यात्र नासिक में सबसे विदा लेकर आगे के लिए बढ़ चली। नासिक से सापूतारा होते हुए यात्र सूरत पहुंची। सापूतारा यहां के लिए एक अच्छा हिल स्टेशन है। यहां का मार्ग अपना विशेष आकर्षण रखता है। दोनो ओर प्याज, टमाटर एंव अंगूर की फसल दिखाई देती है, लेकिन सड़क का हाल बढ़िया नहीं है। महाराष्ट्र में चुनाव का प्रचार अभी भी चल रहा है, अतः चुनावी सभाएँ, बैनर, होर्डिग, पोस्टर आदि की रंगत भी अपना ध्यान खींचती है। सापूतारा की अपनी खूबसूरती है और यह बिल्कुल महाराष्ट्र व गुजरात के बार्डर पर स्थित है। लेकिन गुजरात हिस्सा है। पूरा मार्ग हरियाली से हरा-भरा है एवं गुजरात में इसी मार्ग पर वहां के पिछडे़ व आदिवासी भी बसते है। यहां से होते हुए सूरत पहुंचने का गुजरात को लेकर एक अलग अनुभव होता है। इसी मार्ग पर रास्ते में एक जगह रूक कर साथ लेकर आए लंच को भी किया, उसके बाद सीधे सूरत पहुंची यात्र सूरत दूरदर्शन केन्द्र में मीटिंग रखी गई थी अतः सीधे मीटिंग में पहुंची सूरत के प्रमुख आपरेटरों व दूरदर्शन अधिकारियों के साथ मीटिंग के बाद यात्र सीधे बड़ोदरा पहुंची। बड़ोदरा पहुंचते-पहुंचते काफी देर हो चुकी थी अतः वहीं रात्रि विश्राम कर सुबह दूरदर्शन केन्द्र वड़ोदरा में मीटिंग कर जी-टी-पी-एल- के ऑफिस पहुंचकर यात्र के सन्दर्भ में ‘गो ग्रीन गो डिजीटल’ पर एक इन्टर्व्यू रिकार्ड करवाया। जी-टी-पी-एल- प्रमुख श्री कनक सिंह राणा के साथ भेंट वार्ता कर यात्र वडोदरा से अहमदाबाद के लिए रवाना हो गई। अहमदाबाद एयर पोर्ट से अमन को रिसीव किया, बाद में दूरदर्शन केन्द्र अहमदाबाद में मीटिंग लेकर वहां के अन्य आपरेटरों के साथ स्वागत-सत्कार मीटिंग के बाद अनुराग को एयरपोर्ट पहुंचा कर यात्र अहमदाबाद से आगे के लिए बढ़ चली। अहमदाबाद से निकलते हुए काफी देर हो चुकी थी, लेकिन फिर भी आज रात राजकोट पहुंच गई यात्र। राजकोट में रात्रि विश्राम के बाद सुबह दूरदर्शन केन्द्र राजकोट में मीटिंग लेकर यात्र जी-टी-पी-एल के राजकोट आफिस में स्वागत-सत्कार एंव सबसे भेंट वार्ता कर सीधे जूनागढ़ होते हुए सासनगीर की ओर बढ़ चली। जूनागढ़ के प्रवेश द्वार में एण्ट्री करने से ही यह पता लग जाता है कि आप किसी ऐतिहासिक शहर में जा रहे है। यहां हिन्दु, जैन, मुस्लिम एवं बौद्ध सभी के धार्मिक स्थल बने हुए है। सासण गीर पहुंचने के लिए इस मार्ग में जूनागढ़ गीर के पास वाला एक बड़ा शहर है। गीर वन के शेर तो पूरी दुनिया के लिए आकषर्ण का केन्द्र है। एशिया में शेर सिर्फ यहीं पाए जाते है। प्राकृतिक दृष्टिकोण से यह क्षेत्र अपनी विशेष पहचान रखता है। यहां इन दिनों भारी बारिश होकर चुकी है।
आमों में केसर यहीं होता है, कपास, सोयाबीन, चावल की भरपूर्ण खेती होती है। यहां शेरों के साथ-साथ एक अफ्रीकन प्रजाति के लोग भी गीर की धरोहर बन गए है, जिन्हें अंग्रजो के राज में यहां लाया गया था। सासनगीर एक रिजर्व नेशनल पार्क है, लेकिन यहां के शेर गावों में धुसकर मवेशियों को मार लेते है। इन्हें अपने खाने के लिए बहुत ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती है। गाँव वालों को मारे गए मवेशी का मुआवजा मिल जाता है, अतः उनका व्यवहार शेरों के प्रति शत्रुता पूर्ण नहीं होता है। सासणगीर के गाँवों में रहने वालों के साथ जंगलात कर्मचारियों का तालमेल बहुत बढ़िया होता है, बल्कि वन विभाग के कर्मचारियों द्वारा ग्रामीण वासियों को उनके जीवन में जानवरों के महत्व को लेकर भी जानकारियां दी जाती है। ऐसा सुनने को भी नहीं मिलता है कि यहां के शेरो ंको ग्रामीण वासियाेंं से कोई खतरा हो या फिर कोई शेर आदम खोर हुआ हो। गीर प्रवास के दौरान दीव से भी ऑपरेटर अरूण धर्मेश एंव वहां के अन्य ऑपरेटर भी यात्र के स्वागत के लिए सासण पहुंचे। गीर से यात्र सीधे मेहसाना के लिए रवाना हुई, क्योंकि वहां दूरदर्शन केन्द्र के कर्मचारियों की समस्याओं को सुनकर व समझ कर समाधान का प्रयास करना है। सासणगीर से मेहसाना का सफर काफी लम्बा है, लेकिन देर रात यात्र ठीक-ठाक मेहसाना पहुंच ही गई। मेहसाना-अहमदाबाद हाईवे पर स्थित एक रिसोर्ट में रात्रि विश्राम का प्रबन्ध मेहसाना के ऑपरेटर आशीष द्वारा किया गया था जबकि वह स्वंय मेंहसाना से कहीं बाहर गए हुए थे। वहां की दूरदर्शन अधिकारी श्रीमति आशा के अनुरोध पर विशेष तौर पर गीर से मेहसाना पहुंचना पड़ा, क्योंकि इस बार की जा रही चेतना यात्र को प्रसार भारती की ओर से यह जिम्मेदारी भी सुपुर्द की गई है कि दूरदर्शन चैनलों को लेकर केबल टी-वी- एक्ट का पालन करने के लिए भी ऑपरेटरों एंव दूरदर्शन कर्मचारियों के बीच ‘सम्वाद’ स्थापित करने का प्रयत्न करें। इसीलिए देशभर में यात्र के रूट में जो भी दूरदर्शन केन्द्र आते है, वहां पधारने के लिए आग्रह आता है।
मेहसाना में जी-टी-पी-एल- के ऑफिस में ऑपरेटरों एंव दूरदर्शन कर्मचारियों की मीटिंग रखी गई, जहां श्रीमति आशा की दूरदर्शन चैनलों पर परेशानी को समझते हुए समाधान हेतु जी-टी-पी-एल- कार्यालय अहमदाबाद भी बात की गई। सुधार के लिए उनका आश्वासन मिल जाने के बाद मेहसाना से यात्र राजस्थान के लिए रवाना हो गई। हाइवे बहुत बढ़िया बना हुआ है अतः उदयपुर पहुंचने में ज्यादा समय नहीं लगा। अजय पोरवाला द्वारा अन्य ऑपरेटरों सहित यात्र का गर्मजोशी से स्वागत-सत्कार किया गया। उदयपुर ऑपरेटरों के साथ इण्डष्ट्री की भावी सम्भावनाओं पर मीटिंग के बाद यात्र सीधे कोटा पहुंची, लेकिन कोटा के कपिल भाई ने यात्र के रणथम्बौर विजि के लिए सवाई
माधोपुर मे पूरा प्रबन्ध किया हुआ था। सवाईमाधोपुर अपने आप में एक ऐतिहासिक शहर है। यहां विश्व भर से वन्य प्राणी प्रेमी आते है। रणथम्बोर टाईगर रिजर्व पार्क विश्व विख्यात है। यहां के टाईगर बहुत शान्त स्वभाव के और जरा हैल्दी होते है। अगले दिन राथम्बौर का भी दो बार विजिट किया एंव टाईगर देखने काभी अवसर मिला। हमारा प्रयास है कि रणथम्बोर के शेरो पर एक डाक्यूमेंटरी बनाई जाए।
रणथम्बोर के बाद सवाईमा धोपुर में ही शाम हो गई है, जबकि यात्र अब आगे राजस्थान से मध्य प्रदेश जाएगी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी होकर गुना के रास्ते भोपाल होते हुए जबलपुर पहुंचनी है, क्योंकि जबलपुर में ईमान इण्डिया सम्मान कार्यक्रम का कल आयोजन होना है। केबल टी-वी- समुदाय का भारतीय समाज में सम्मान भी हो इसीलिए यह कार्यक्रम ईमान इण्डिया सम्मान दिल्ली से शुरू किया गया है। कोशिश की जा रही है कि देश के भिन्न शहरों में भी केबल टी-वी- आपरेटर ऐसा कार्यक्रम आयोजित करें, जिससे कि देशभर में केबल टी-वी- कम्युनिटी का समाज में सम्मान भी हो जबलपुर में पप्पू चौक्से द्वारा कार्यक्रम की शुरूआत की गई है। अतः उनके द्वारा इस वर्ष दूसरी बार यह प्रयास किया जा रहा है। उनके द्वारा आयोजित किए जाने वाले ईमान इण्डिया सम्मान जबलपुर के आयोजन में चीफ गैस्ट के रूप में हमें वहां पहुंचना है। अतः सवाई माधोपुर से आज शिवपुरी पहुंचने के लिए सबने नेगेटिव रिपोर्ट दी है। स्वंय शिवपुरी के केबल टी-वी- ऑपरेटरों ने भी यही सलाह दी है कि दिन छिपने के बाद यह रूट सुरक्षा की दृष्टि से ठीक नहीं रहेगा। इसलिए शिवपुरी ना जाकर पुनः वापिस कोटा जाना तय किया गया। रात्रि विश्राम कोटा में कर वहां से सुबह बारन होते हुए गुना के रास्ते सीधे सागर होकर जबलपुर पहुंची यात्र। वाकई यह मार्ग सबसे ज्यादा खराब वाला मार्ग कहा जाएगा। ना जाने क्यों यहां की सड़को का इतना बुरा हाल है। जबलपुर पहुंचते ही हमें सीधे दो टायर बदलबाने पड़े। इस मार्ग पर बीच-बीच में सड़के ही गायब है या फिर सड़क बीच मे से इस तरह कटी हुई है कि उसे पार ही नहीं किया जा सकता है, आपको मुख्य मार्ग छोड़कर सड़क को आगे जाकर फिर से पकड़ने के लिए खेतो मे उतरना पड़ता है। कहीं-कहीं सड़को के बीच पत्थरों को इस तरह से सजाया गया है कि आपकी ड्राइविंग और गाड़ी की नीचे की मजबूती दोनो की परीक्षा हो जाती है।
ऐसी सेड़को के लिए मध्य प्रदेश के निवासियों की सराहना की जानी चाहिए कि इतनी खराब सड़कों को बर्दास्त करते है। सड़को की बदत्तर स्थिती के चलते रात बीना में काटनी पड़ी, क्योंकि बीना पहुंचते-पहुंचते ही अच्छा खासा अन्धेरा हो चुका था, जबकि आगे का मार्ग कैसा होगा का कुछ मालूम नहीं था। गाड़ी बगैर स्टैपनी के चल रही थी और दूसरा टायर कभी भी जवाब दे सकता था, जबकि इस मार्ग पर टायर बदलवाना भी बहुत मुश्किल था। अतः रात्रि विश्राम बीना में करने का निर्णय लेना पड़ा।
यहां दो कन्ट्राेल रूम चल रहे है, दोनो ऑपरेटरों से भेंट की। बीना के जिस होटल में हाल्ट किया वह यहां का एक प्रकार से टाप होटल माना जाता है। कम से कम रेट में तो वह स्वंय को 5 स्टार से कम नहीं समझता है, लेकिन उसकी वास्तविकता बिल्कुल अलग है। एक रात गुजारना वहां मजबूरी थी, लेकिन सुबह होटल के मालिकों के लिए 30-35 शिकायतो का एक मुलिन्दा बांध कर जरूर हम छोड़ आए कि वह सुधार कर सकें नाम था मीलानी। बीना से आगे जबलपुर का रास्ता चकाचक था अतः समय रहते जबलपुर पहुंच गई यात्र, जाते ही सबसे पहले दो टायर बदलवाए। नए टायर बदलने के बाद टायरों को आगे-पीछे भी करवाया। गाड़ी के सायलेंसर की डोलची में भी किसी पत्थर ने अपना निशान छोड़ा है, लेकिन उसे दिल्ली पहुंचकर ही ठीक करवाएगें। जबलपुर में आगे की यात्र अभी ओर रोचक होने वाली है, उसके लिए आपको अगले अंक की प्रतीक्षा करनी होगी इस भाग में यात्र जबलपुर पहुंच गई है।
दूरदर्शन केन्द्र में सिटी मान्थन आदि के प्रतिनिधी मीटिंग में शामिल रहे, जबकि कोलकाता में सिटी मन्थन के अतिरिक्त जी-टी-पी-एल- के सी-बी-एल, डी-जी- केबल डैन, मेघबाला, बसारा, हैथवे, सुष्टी सहित एक-दो और एम-एस-ओ- भी काम कर रहे है। कोलकाता डैस सिटी होने के साथ-साथ डैस एरिया की सीमाओं के विवाद के कारण भी कुछ समस्याएँ है। लेकिन यात्र को कोलकाता पहुंचने में देर काफी हो चुकी थी और सभी को त्यौहार की तैयारी में पहुंचने की भी जल्दी थी। अतः विस्तार से बाते नहीं हो सकी। हांलाकि इस तरह की एक पहल हुई उसके प्रति दूरदर्शन अधिकारी काफी कृतज्ञ दिखाई दिए।

सम्पन्न (भाग-7)
चेतना यात्रा-जबलपुर से दिल्ली
मध्य प्रदेश में चेतना यात्र का प्रवेश कोटा राजस्थान से बारन होते हुए गुना से हुआ था, गुना का गुनाह पूर्व अंक में प्रकाशित किया जा चुका है, लेकिन यात्र जबलपुर पहुँचकर दो टायर बदलवा चुकी है। इससे पहले भी यात्र को कड़ी परीक्षा से गुजरना पडा है। इस बार यह यात्र दुबारा जबलपुर पहुची है, क्योकि केबल टी-वी- ऑपरेटर कम्युनिटी को ही समाज में आदर-सम्मान भी प्राप्त हो उसके लिए समाज में अच्छे काम करने वालो को तलाश कर उन्हे इण्डष्ट्री की ओर से सम्मानित किए जाने के लिए हमने दिल्ली से एक कार्यक्रम ‘ईमान इण्यिा सम्मान’ की शुरुआत की, जिसे देशभर के केबल टी-वी- ऑपरेटर अपने-अपने क्षेत्रे में भी आयोजित करे इस के लिए हम उन्हें प्रोत्साहित करते है। केबल टी-वी- आपरेटरो को राष्ट्रीय सस्ंथा ‘आल इंडिया आविष्कार डिश एण्टिना संघ’ द्वारा शुरू किए गए इस कार्यक्रम को आगे बढाते हुए जबलपुर के केबल टी-वी- ऑपरेटर भाई पप्पू चौकसे द्वारा ईमान इंडिया सम्मान प्रमुख जबलपुर कार्यक्रम का आयोजन पिछले वर्ष शुरू किया गया, जो अब दूसरे पायदान पर आ गया है, इसी कार्यक्रम के आयोजन का खास प्रचार-प्रसार भी उन्होने किया है एवं अच्छे सम्मानित व्यक्तियो को निमन्त्रित किया गया हैैै। सम्मान पाने वालो की लिस्ट तो मात्र सात की ही हैै, लेकिन चयन में कोई कमी नही की गई हैै। मंच सज्जा -संचालन सहित अतिथियो के स्वागत-सत्कार को भी सदैव याद किया जाएगा। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण जबलपुर के केबल टी-वी- दर्शको तक पहुंच रहा है। ओडियन्स में भी सज्जनों की भारी संख्या दिखाई दे रही है, पूर्णतः सफल प्रयास कहा जाएगा।
ईमान इंडिया सम्मान जबलपुर के लिए सम्मानित किए जाने वालों की ट्राफी दिल्ली से तिलक राज लेकर आए है। ईमान इंडिया सम्मान की ट्राफी एवं बैच दिल्ली में आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रम की तरह ही रखे हुए है, जिससे कि कार्यक्रम का मोल रूप बना रहे। जबलपुर के साथ-साथ शीघ्र ही देश के अन्य शहरों में ऐसे आयोजन किए जाए उसके लिए हम प्रयासरत है। जबलपुर कार्यक्रम सम्पन्न होने के तुरन्त बाद यात्र वहां से वापसी के लिए रवाना हो गई, जबकि ट्राफी सुपुर्द कर तिलक वापिस दिल्ली के लिए रवाना हो गया। ईमान इण्डिया सम्मान जबलपुर आयोजन की सफलता के लिए पप्पू चौक्से परिवार को बधाई देकर यात्र का रात्रि विश्राम सागर में हुआ। दीपावली निकट आ गई है, धनतेरस की बाजारों में खूब भीड़ दिखाई दे रही है। सागर से सीधे ग्वालियर की और बढ़ते हुए यात्र ने झांसी को भी हाईवे से ही पास किया क्योंकि पूर्व निर्धारित कार्यक्रमानुसार 20 अक्टूबर को यात्र ने दिल्ली पहुंचना है, जबकि 18 अक्टूबर को जबलपुर में ईमान इण्डिया सम्मान का आयोजन रख दिया गया था। अभी ग्वालियर, आगरा एंव जयपुर भी मीटिंग होनी है। सड़कों पर दीपावली की रौनक बढ़ती जा रही है। रास्ते में लोगो को अपने घरों की साफ सफाई करते हुए देखा जा सकता है। यह हाईवे अच्छा है, अतः समय से पूर्व ही ग्वालियर पहुंच गई यात्र। ग्वालियर में यात्र के स्वागत की भव्य तैयारियां की गई थी। स्वागत-सत्कार के बाद यात्र को लेकर एक प्रैस गोष्ठी भी रखी गई थी, जिसमें प्रिण्ट एंव इलैक्ट्रानिक दोनो मीडिया शामिल थे। ऑपरेटरों के साथ इण्डष्ट्री भावी सम्भावनाओं पर मीटिंग के बाद ग्वालियर से यात्र आगरा के लिए रवाना हो गई। यह मार्ग उतना चकाचक नहीं रहा अतः आगरा पहुंचते-पहुंचते रात हो गई, वहीं विश्राम के लिए होटल मरीना पहुंची यात्र। हालांकि है तो यह होटल 5 स्टार लेकिन कार्पोरेट डिस्काऊट के बाद बजट में आ जाता है, अच्छा होटल है। वहीं पर रात को आगरा के प्रमुख आपरेटरों के साथ मीटिंग रही। आज का रात्रिविश्राम इस यात्र का आखिरी रात्रि विश्राम है, क्योंकि कल तो यात्र ने दिल्ली पहुंच ही जाना है। दिल्ली से पूर्व आगरा के बाद जयपुर दूरदर्शन केन्द्र में भी मीटिंग रखी हुई है। आगरा में ताजमहल, लालकिला आदि ऐतिहासिक स्थलों के अतिरिक्त आगरा का पेठा भी होता है, अतः पेठे की पैठ में पहुंच कर वहां की तस्वीरों को कैमरे में कैद किया। दिल्ली के लिए वहां से थोड़ा पेठा पैक भी करवाया और फिर आगरा से यात्र के लिए रवाना किया आगरा के पारस जैन ने। पारस जैन वहां मेरे स्कूल के सहपाठी रह चुके है।
आगरा से भरतपुर, बान्दी कुई, दौसा मार्ग से होती हुई यात्र जयपुर पहुची। जयपुर में दीपावली की भारी भीड़ बाजारों में उमड़ी पड़ी थी, जबकि मैट्रो का काम चलने के कारण कई मार्ग डाइवर्ट किए हुए थे, अतः शहर में यात्र बहुत ज्यादा कठिन हो गई थी। सीधे दूरदर्शन केन्द्र जयपुर पहुंच कर मीटिंग अटैण्ड की। ऑपरेटरों की संख्या वहां कम थी, जबकि दूरदर्शन केन्द्र द्वारा निमन्त्रण तो सभी एम-एस-ओ- को दिया गया था। दूरदर्शन चैनलों के लिए वहां पूरी तरह से केबल टी-वी- एक्ट का पालन नहीं किया जा रहा है। ऐसी शिकायते दूरदर्शन केन्द्र की ओर से की गई, लेकिन दीपावली का त्यौहार एंव मीटिंग के कार्यक्रम का समय रहते तय ना हो पाने के कारण उन्हें प्रोपर तरीके से सूचित नहीं किया जा सका था, अतः मीटिंग भी अधूरी ही रही। यात्र की कवरेज दूरदर्शन के लिए की गई एंव जयपुर स्थित चैनल नम्बर वन की ओर से भी कैमरे फुटेज लेने पहुंचे। यह चैनल महिपाल निबाना सम्भाल रहे है। राजस्थान पर फोकस इस चैनल ने कम समय में अधिक पहुंच बनाई है, इसका पूरा श्रेय महिपाल की कार्यकुशलता को दिया जाएगा। आगरा से निकलते-निकलते शाम ढ़ल ही गई, जबकि आगरा से दिल्ली मार्ग पर काम चल रहा है, इसलिए अब यह हाईवे भी चकाचक नहीं रहा है। बीच-बीच में पड़ने वाले गांव कस्बों के बाजारों मे भारी भीड़ है। इसी भीड़ को चीरते हुए यात्र अपने गंतव्य की ओर बढ़ते हुए आधी रात के बाद ही दिल्ली पहुंच सकी। इतने दिनों देशभर में यात्र के बाद आपने परिवार में पहुंचने का आनन्द से भरा सुख कैसा होता है उसका वर्णन करने के लिए शब्दों की कमी हो गई है, लेकिन मिलते ही पोती माही एंव पोता आरव
सीधे अपने दादू की गोदी में चढ़कर थकी सी शक्ल को ऐसे देखने लगे जैसे समुन्द्र सी लहरे उनके अन्दर अनेक सवाल लिए उबाल मार रही हो। उनके गोदी मे चढ़ जाने के साथ ही दो महीने की यात्र की थकान छूमन्तर हो गई। तारीख 20 की जगह 21 अक्टूबर हो चुकी थी, अतः परिवार की प्रतीक्षा थोड़ी ओर लम्बी हो गई। घर-परिवार के लिए निर्विधन सकुशल पहुंचना ही सबसे बड़ी सन्तुष्टि होती है। अतः इसी सन्तुष्टि के साथ आज घर का खाना खाकर मन को भी सन्तुष्टी मिल गई। लेकिन अभी यात्र सम्पन्न नहीं हुई थी, क्योंकि यात्र को फ्रलैगाफ कर माननीय मन्त्री सूचना व प्रसारण मंत्रलय श्री प्रकाश जावडेकर जी ने रवाना किया था, उन्हें यात्र की पहुंच रिपोर्ट के बिना यात्र का सम्पन्न नहीं किया जा सकता था, अतः सुबह-सुबह श्री प्रकाश जावडेकर जी को जाकर यात्र के दिल्ली पहुंच जाने की रिपोर्ट दी। मन्त्री जी के द्वारा दिए गए एक विशेष सन्देश को देशभर में पहुंचा कर अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रमानुसार यात्र निर्विध्न पूर्ण सफलता के साथ दिल्ली पहुंच गई है, इसका उन्होंने गर्मजोशी के साथ स्वागत किया और ‘गो ग्रीन गो डिजीटल’ पर की जा ने वाली इस दसवीं चेतना यात्र को सम्पन्न किया। सूचना व प्रसारण एवं पर्यावरण वन मन्त्री श्री प्रकाश जावडेकर जी का प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के ड्रीम प्रोजेक्ट डिजीटल इण्डिया पर दिए गए विशेष वीडियों सन्देश का देशभर में पहुंचाने में विशेष भूमिका इस यात्र में निभाई गई। डिजीटल इण्डिया के लिए देशभर के केबल टी-वी- ऑपरेटरों एम-एस-ओ- एंव देशभर के तमाम दूरदर्शन केन्द्रों के सहित डीटीएच एवं केबल टी-वी- ऑपरेटरों को भी सन्देश दिया गया। मन्त्री जी के सन्देश को देशभर में पहुंचाने के लिए इलैक्ट्रानिक व प्रिण्ट मीडिया का भी पूरा सहयोग लिया गया। डिजीटल इण्डिया के साथ-साथ मन्त्री जी ने गो ग्रीन पर भी अपना विशेष सन्देश दिया था जो कि देश के कौने-कौने तक इस यात्र द्वारा पहुंचाया गया। अपने बच्चों को स्वस्थ वातावरण देने के लिए सबको अधिक वृक्षापण करना चाहिए एंव पानी की बर्बादी को रोकना चाहिए व बिजली की बचत करनी चाहिए, आदि सन्देश माननीय मन्त्री जी ने गो ग्रीन पर दिया था, जिसे चेतना यात्र के दौरान देशभर में पहुंचाने के साथ-साथ हमने सभी से एक शपथ भी ली कि 28 मार्च 2015 पृथ्वी दिवस के अवसर पर वह स्वंय तो एक घण्टे के लिए बिजली बचाने के अभियान में शामिल होकर बिजली से चलने वाले सभी उपकरणों को बन्द रखेगे एंव जहां तक उनकी पहुंच है वहां तक भी यह सन्देश देकर उन सबसे भी एक घण्टे के लिए बिजली का इस्तेमाल ना करने का आग्रह करेंगे।
देशभर के समस्त एम-एस-ओ- दूरदर्शन केन्द्र के केबल टी-वी- ऑपरेटरों सहित डी-टी-एच- के ऑपरेटर सभी मिलकर 28 मार्च 2015 को पृथ्वी दिवस के अवसर पर उर्जा बचाओ अभियान के अर्न्तगत एक घण्टे के लिए बिजली का इस्तेमाल नहीं करेंगे और जहां तक उनकी पहुंच है, वहां तक वह सभी को प्ररित करने का प्रयास करेंगे। एसी शपथ हमने देशभर में हुई मीटिंगों में सबसे ली है। अब देखना है कि आने वाली 28 मार्च 2015 को पृथ्वी दिवस के अवसर पर हमारा देश पृथ्वी को क्या उपहार देगा। अगर सभी ने अपनी शपथ को निभाया एंव उनके आग्रह को देशभर के तमाम टी-वी- दशर्को ने भी अपनाया तब एक घण्टे के लिए बिजली से चलने वाले उपकरणों मे यदि करोडो टेलिविजन सैट्टॉप बॉक्स फ्रिज, एयर कण्डीशन्स, स्टूडियोज, लाइटस आदि भी बन्द रखे गए तब भी करोड़ो यूनिट बिजली देश की बचेगी। सब कुछ सम्भव हो सकता है, आवश्यक्ता सिर्फ एक ईमानदार शुरूआत की हुआ करती है। पिछली यात्रओं में देशभर में लगाए गए पौधे अब बड़े हो रहे हैं, उन्हें देखकर बहुत खुशी मिलती है, खुशी तब और भी अपार हो जाएगी जब लोग उर्जा बचाने की जरूरत को समझने लगेगे। चेतना यात्र के द्वारा दिए गए मन्त्री जी के सन्देश के प्रति देशभर के लोगों का पृथ्वी दिवस के अवसर पर ऐसा सहयोग अद्भुत व अविश्मरणीय होगा। इस प्रकार उर्जा बचाने का एक मुख्य सन्देश हम पूरी दुनिया को पहुंचा सकेंगे। एक सितम्बर 2014 को मन्त्री जी द्वारा फ्रलैगाफ किए जाने से आरम्भ हुई यह ‘‘चेतना यात्र 10’’ दीपावली से दो दिन पूर्व 20 अक्टूबर 2014 को सफलता पूर्वक वापिस दिल्ली पहुंच गई, जिसे 21 अक्टूबर 2014 गर्मजोशी के साथ स्वागत कर माननीय मन्त्री श्री प्रकाश जवडेकर जी द्वारा सम्पन्न करवाया गया, लेकिन स्मृतियां अभी भी ढे़राें बाकी है जिनको शब्दों में नहीं पिरोया जा सका है। ऐसी ही यात्र प्रत्येंक वर्ष जारी रहें, इन्ही आशाओं के साथ चेतना यात्र 10 पाठकों को समर्पित है।
चेतना यात्र के द्वारा दिए गए मन्त्री जी के सन्देश के प्रति देशभर के लोगों का पृथ्वी दिवस के अवसर पर ऐसा सहयोग अद्भुत व अविश्मरणीय होगा। इस प्रकार उर्जा बचाने का एक मुख्य सन्देश हम पूरी दुनिया को पहुंचा सकेंगे। एक सितम्बर 2014 को मन्त्री जी द्वारा फ्रलैगाफ किए जाने से आरम्भ हुई यह चेतना यात्र 10 दीपावली से दो दिन पूर्व 20 अक्टूबर 2014 को सफलता पूर्वक वापिस दिल्ली पहुंच गई, जिसे 21 अक्टूबर 2014 गर्मजोशी के साथ स्वागत कर माननीय मन्त्री श्री प्रकाश जवडेकर जी द्वारा सम्पन्न करवाया गया।

चेतना यात्रा 10 की उपलब्धियाँ
"गो ग्रीन, गो डिजीटल"
तो ऐसी यात्रएँ अपने आप में ही विशेष उपलब्धि हुआ करती है, क्योंकि कोई भी सामान्य तरह से ऐसी यात्र करने की सेाच भी नहीं सकता है। प्रत्येक वर्ष अपनी गाड़ी से देश के कौने-कौने तक पहुँचना सरल कार्य नहीं है, लेकिन जब हर हिस्से में आप से जुड़े अपने लोग बैठे हो तब कठिनतम सफर भी आसान हो जाता है। एक केबल टी-वी- आपरेटर होने के नाते देशभर के ऑपरेटरों को जोड़ने व जगाने के लिए सन् 2005 में शुरू हुई चेतना यात्र निरन्तर हर वर्ष जारी है। इस वर्ष 2014 में की गई ‘गो ग्रीन, गो डिजीटल चेतना यात्र 10’ पूर्व में की गई यात्रओं से बिल्कुल अलग रहीं, क्योंकि इस यात्र में देश के सूचना व प्रसारण, पर्यावरण एंव संसदीय कार्य मन्त्री श्री प्रकाश जावड़ेकर जी स्ंवय यात्र से जुड़ गए। माननीय प्रधानमन्त्री श्री मोदी जी के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘डिजीटल इण्डिया’ के लिए माननीय मन्त्री श्री प्रकाश जावड़ेकर जी ने यात्र के माध्यम से एक विशेष सन्देश देश के कौने-कौने तक पहुँचाने के लिए दिया। मन्त्री जी ने गो डिजीटल पर प्रधानमन्त्री जी के डिजीटल इण्डिया पर सन्देश दिया तो गो ग्रीन पर देश वासियों के लिए पर्यावरण एंव वनों को बचाने के लिए सन्देश दिया। चेतना यात्र 10 देश वासियों के लिए मानीय प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के ड्रीम प्रोजेक्ट डिजीटल इण्डिया एंव पर्यावरण पर मन्त्री जी का विशेष सन्देश लिए थी। स्वंय मन्त्री जी ने फ्रलैगाफ कर यात्र की रवानगी की अतः पूर्व में की गई यात्रओं से यह यात्र बिल्कुल अलग थी। ‘गो ग्रीन गो डिजीटल’ चेतना यात्र 10 के लिए देशभर के सभी दूरदर्शन केन्द्रों को यात्र के रूटमेप के साथ विशेष पत्र प्रसार भारती प्रमुख दिल्ली से भेजा गया था। अतः देश के समस्त दूरदर्शन केन्द्रों पर यात्र को लेकर बहुत जिज्ञासा के साथ-साथ प्रतीक्षा भी की जा रही थी। क्योंकि 8 अगस्त 2014 को सूचना व प्रसारण मन्त्रलय में एक मीटिंग दूरदर्शन चैनलों को लेकर बुलाई गई थी, जिसमें केबल टी-वी- एक्ट के अनुसार केबल टी-वी- ऑपरेटरों द्वारा दूरदर्शन चैनलों को ना दिखलाए जाने पर विशेष मीटिंग स्वंय मन्त्री जी ले रहे थे, जहां केबल टी-वी- व्यवसाय की समस्याओं पर भी मन्त्री जी का ध्यानाकर्षण किया गया, लेकिन मन्त्री जी द्वारा समाधान के लिए ‘सम्वाद’ पर जोर दिया गया, वहीं से यात्र में सम्वाद के लिए एक नई पहल की शुरूआत हुई जिसके लिए स्वंय मन्त्री जी ने यात्र के साथ अपना एक विशेष सन्देश दिया एंव प्रसार भारती द्वारा देशभर के दूरदर्शन केन्द्रों को सम्वाद के विशेष निर्देश भी दिया गया। चेतना यात्र 10 के लिए भी यह एक बिल्कुल अलग अनुभव था, क्योंकि देशभर के केबल अी-वी- ऑपरेटरों के साथ दूरदर्शन अधिकारियों का सामंजस्य बैठाने का प्रयास करना एक बड़ी चुनोती थी, लेकिन परिणाम इतने सकारात्मक आएँगे इसका तो कतई अनुमान ही नहीं था। शुरूआत हरियाणा के रोहतक शहर से हुई, जो कि दिल्ली से निकलने पर यात्र का पहला पड़ाव था। हरियाणा में दूरदर्शन केन्द्र हिसार में है, लेकिन यात्र के रूट में हिसार नहीं है। अतः हिसार से दूरदर्शन अधिकारी श्री जिले सिंह जाखड़ भाई कैमरा टीम को लेकर रोहतक आ गए। सिटी केबल का कन्ट्रोल रूम वहां नरेश जैन सम्भालते है, उन्ही के स्टुडियों में ऑपरेटरों के साथ दूरदर्शन अधिकारियों की मीटिंग की गई, जिसमें सर्वप्रथम मन्त्री जी का सन्देश सुनाया गया, तत्पश्चात दिल्ली में हुई उस मीटिंग का हवाला देते हुए दूरदर्शन चैनलों को केबल टी-वी- एक्ट के अनुसार प्रसारण किए जाने की बात रखी गई। रोहतक एंव आस-पास क्षेत्रें से आए समस्त केबल टी-वी- ऑपरेटरों ने दूरदर्शन
अधिकारियों को आश्वस्त किया कि वह केबल टी-वी- एक्ट के अनुसार दूरदर्शन चैनलों को प्रसारित करने में कोई कोताही नहीं बरतेंगे। रोहतक में डिजीटल प्रसारण पर चैनलों के लिए स्पेस की उनके पास कोई कमी नहीं है। इस प्रकार बहुत ही सोहार्दपूर्ण माहौल में दोनो के बीच पहली बार बहुत ही सकारात्मक बात चीत हुई। दूरदर्शन अधिकारियों के साथ केबल टी-वी- ऑपरेटरों की विशेष बैठक को दोनो ने ही न्यूज के लिए भी कवर किया एंव प्रिन्ट मीडिंया के पत्रकारों को भी इस विशेष बैठक की जानकारी दी गई। रोहतक के बाद दूसरी मीटिंग लुधियाना में हुई, जहां दूरदर्शन केन्द्र जलन्धर से श्री सतीष भाटिया एंव राम किशन विशेष तौर पर मीटिंग के लिए लुधियाना पहुंचे। पूरे पंजाब में लुधियाना से ही फास्ट वे नैटवर्क का प्रसारण पहुंचता है। फास्टवे डिजीटल टैक्नॉलाजी पर प्रसारण सर्विस उपलब्ध करवा रहा है। अतः दूरदर्शन के सभी चैनलों का प्रसारण पूर्णतया केबल टी-वी- एक्ट के अनुसार किया जा रहा है। जलन्धर से आए दूरदर्शन अधिकारी श्री भाटिया जी डैस के लिए लुधियाना के नाडल ऑफिसर भी है। उन्हें फास्टवे प्रमुख श्री गुरदीप सिंह के साथ हुई यह मीटिंग बहुत ही सन्तोषजनक लगी। हांलाकि यात्र वहां देर शाम को पहुंची थी, अतः मीटिंग भी देर रात तक चली जिसमें दूरदर्शन अधिकारी शामिल रहे। ऐसी मीटिंग में सरकारी अधिकारियों का आफिस समय से अधिक समय लगाना वाकई इस सन्दर्भ में उनकी गम्भीरता को दर्शाता है। मीटिंग के बाद जलन्धर दूरदर्शन केन्द्र से श्री भाटिया जी विशेष तौर पर लुधियाना आए थे, जो रात में ही वापिस जलन्धर के लिए रवाना हो गए। लुधियाना के बाद यात्र का अगला पड़ाव जम्मू था, वहां जम्मू दूरदर्शन केन्द्र में मीटिंग बुलाई गई थी, वहां के श्री रवि कुमार लगातर यात्र की जानकारी ले रहे थे, लेकिन अकस्मात वहां आई भयंकर बाढ़ ने जम्मू का रास्ता रोक दिया। बाढ़ के कारण जम्मू एण्ड कश्मीर ना जाकर यात्र पठान कोट दूरदर्शन केन्द्र में ऑपरेटरों व दूरदर्शन अधिकारियों के साथ मीटिंग के लिए पहुंची। दूरदर्शन अधिकारी श्री सतपाल जी को पूर्व निर्धारित समय से पूर्व मीटिंग के लिए थोड़ी असुविधा तो हुई लेकिन दोनो के प्रयासों से वहां की मीटिंग भी पूर्णतः सफल रही क्योकि यहां भी फास्ट वे नैटर्वक लुधियाना की ही फीड आ रही है, अतः जो वहां से प्रसाण हो रहा है वही यहां भी उपलब्ध है, लेकिन फास्ट वे नैटर्वक के पठान कोट प्रतिनिधि मि- राजेन्द्र कुमार मेहता के साथ पठान कोट के अन्य ऑपरेटरों का सम्वाद दूरदर्शन केन्द्र पठानकोट के अधिकारी श्री सतपाल जी के साथ पूर्ण कर यात्र सीधे धर्मशाला दूरदर्शन केन्द्र पहुंची जहां दूरदर्शन अधिकारी श्री लक्ष्मन कुमार एंव ऑपरेटर बिपुल भगत, अश्विनी ठाकुर, ललित शर्मा,एंव विजय कुमार, कमल कांता आदि, यात्र की प्रतीक्षा में थे। हिमाचल प्रदेश में अधिकाश्ां केबल टी-वी- नैटवर्क अभी एनॉलाग टैक्नॉलाजी पर ही चल रहे है। उनकी प्रसारण संख्या भी कम चैनलों की है, अतः उनके ऐसे अनेक केबल टी-वी- ऑपरेटर ऐसे भी है जिन्हें मालूम भी नहीं है कि केबल टी-वी- एक्ट के अनुसार उन्हें कौन-कौन से व कितने दूरदर्शन चैनलों का प्रसारण करना अनिवार्य है। हिमाचल में अनेक केबल टी-वी- ऑपरेटरों को डिजीटल फीड शिमला के डिजीटल कन्ट्रोल रूम से पहुंचती है एंव एनॉलाग वह स्ंवय डालकर उपभोक्ताओं तक पहुंचाते है। अतः समस्याएँ तो है, जिनका निवारण पूरी तरह से तो डिजीटल (क्।ै) हो जाने पर स्वंय ही हो जाएगा, लेकिन जितने भी ऑपरेटर धमर्शाला दूरदर्शन केन्द्र में आए थे उन्हें यह स्पष्ट बता दिया गया कि कानून के अनुसार उन्हें दूरदर्शन के कौने-कौने से चैनलो को प्रसारित करना अनिवार्य है। हिमाचल में अनेक केबल टी-वी- ऑपरेटरों को डिजीटल फीड शिमला के डिजीटल कन्ट्रोल रूम से पहुंचती है एंव एनॉलाग वह स्वंय डालकर उपभोक्ताओं तक पहुंचाते है। अतः समस्याएँ तो है, जिनका निवारण पूरी तरह से तो डिजीटल (क्।ै) हो जाने पर स्वतः ही हो जाएगा, लेकिन जितने भी ऑपरेटर
धमर्शाला दूरदर्शन केन्द्र में आए थे उन्हें यह स्पष्ट बता दिया गया कि कानून के अनुसार उन्हें दूरदर्शन के कौने-कौने से चैनलों को प्रसारित करना अनिवार्य है। मन्त्री जी का सन्देश एंव सम्वाद का पूर्ण सम्मान करते हुए सभी ऑपरेटरों ने आश्वस्त किया कि वह स्वंय भी एंव अन्य ऑपरेटरों को भी एक्ट के अनुसार दूरदर्शन चैनलों को प्रसारित किए जाने के लिए प्रेरित करेंगे।
यात्र की अगली मीटिंग दूरदर्शन केन्द्र शिमला में हुई जहां दूरदर्शन अधिकारी श्री अमित टण्डन, मदन मोहन, सुनील भारद्वाज, राजेश कुमार आदि के साथ प्रोडक्शन से श्रीमती धारा सरस्वती एंव केबल टी-वी- ऑपरेटरों का प्रतिनिधित्व श्री किशन सिंह चंदेल कर रहे थे जो कि बिलासपुर से दूरदर्शन केन्द्र शिमला के बुलावे पर पहंचे थें। दूरदर्शन केन्द्र शिमला के अधिकारियों के निमन्त्रण को शायद गम्भीरता से नहीं लिया गया होगा, तभी वहां कोई अन्य प्रमुख केबल टी-वी- प्रतिनिधी नहीं था, अतः हमने वहां के प्रमुख एम-एस-ओ- श्री मुकेश मल्होत्र जी को तुरन्त मीटिंग में आने का आग्रह किया और वह शीघ्र ही मीटिंग में शामिल भी हो गए। मल्होत्र जी हिमाचल के मीडिया क्षेत्र में अधिकारियों की ओर से प्रोडक्शन विभाग से थे, श्रीमति धारा सरस्वती जी ने समस्या रखी कि शिमला दूरदर्शन केन्द्र से 3-7 कुल 4 घण्टे का प्रोग्राम बनाकर प्रसारण किया जाता है, लेकिन ऑपरेटर उसे समयानुसार नहीं दिखाते है, एंव प्रोग्राम प्रसारण हो जाने के बाद लोगो की टी-वी- स्क्रीन पर नो सिग्नल लिखा आता है जो कि बुरा लगता है।
पहली बार दूरदर्शन अधिकारियों के साथ हो रहे इस सम्वाद पर दूरदर्शन अधिकारी बहुत उत्साह एंव आशा से भरे हुए थे, जिसे ऑपरेटरों की ओर से कोई निराशा भी नहीं हुई, उसकी समस्या पर मुकेश मल्होत्र जी ने बताया कि किसी भी चैनल को डिजीटल टैक्नॉलाजी में प्रसारण के लिए डालने के लिए स्ट्रीमिंग में भी थोड़ा समय लगा करता है अतः दूरदर्शन केन्द्र द्वारा 3 बजे ट्रांस मिशन ऑन करते ही हमारे डिजीटल कन्ट्रोल रूम से प्रसारित होने लगे, सम्भव नहीं है, इसमें थोड़ा समय लगता है और रही प्रोग्राम के बाद नो सिग्नल लिखा होने की बात, उसके लिए तो दूरदर्शन केन्द्र को ही उस चैनल पर प्रोग्राम के बाद कुछ डालना होगा। इसका समाधान तो तभी सम्भव हो सकेगा, जब शिमला दूरदर्शन केन्द्र से भी हिमाचल के 24 घण्टे चैनल का प्रसारण होने लगेगा। मल्होत्र जी ने बताया कि हिमाचल में दूरदर्शन के लिए म्-6ए म्-8ए म्-9ए म्-11 एंव म्-12 पांच फ्रिक्वेंसी तो ले ही रखी है, इनके अतिरिक्त हमें पांच और फ्रिक्वेंसी दूरदर्शन को देना अनिवार्य है तब तक हम अन्य लोकप्रिय चैनलों को दशर्को तक कैसे पहुंचाए\ डिजीटल में तो हम कितने भी चैनल पहुंचा सकते है, लेकिन हिमाचल में जहां पूरी तरह से एनॉलाग ही चल रहा है, वहँा यह समस्या भी बहुत बड़ी है। इसके लिए ऐसे ट्रासमिशन जो किसी काम में नहीं आ रहे है, उन्हें बन्द किया जाना चाहिए।
शिमला से वापिसी में कसौली दूरदर्शन केन्द्र से श्री राजकुमार से सोलन में भेंट हुई, जिन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में तो फास्टवे नैटवर्क की डिजीटल फीड आती है अतः जो प्रोब्लम है वह दूरदर्शन के सभी चैनल एक्ट के अनुसार ही उपलब्ध है, जो की प्रोब्लम है। चेतना यात्र सीधे चण्डीगढ़ केन्द्र पहुंची, वहां सुमित गोयल जो कि चण्डीगढ़ के नोडल अधिकारी भी है, के साथ श्री जगजीत सिंह के साथ केबल टी-वी- आपरेटरों का प्रतिनिधित्व फास्टवे के श्री वरिन्दर सिंह एंव स-मनमोहन सिंह बाजवा ने किया। चण्डीगढ़ पूरी तरह से डिजीटल हो गया है, अतः दूरदर्शन के सभी चैनलों का प्रसारण यहां केबल टी-वी- एक्ट के अनुसार ही किया जा रहा है। चण्डीगढ़ दूरदर्शन केन्द्र के अधिकारीगण पर्यावरण को लेकर भी जागरूक दिखाई दिए, उन्होंने परिसर में कुछ औषधिय पौधे भी लगाए हुए है, एंव ग्रीनरी को बढ़ावा देने पर भी वहां अलग से जोर दिया जाता है। वहां से अगला पड़ाव देहरादून रहा, जहां छुट्टी का दिन होने के बावजूद भी दूरदर्शन केन्द्र में मीटिंग बुलाई हुई थी। श्री मनमोहन सिंह दूरदर्शन अधिकारी देहरादूर द्वारा केबल टी-वी- ऑपरेटरों की मीटिंग हुई जिसमें उत्तरांचल केबल नैटवर्क एंव ब्लूस्काई नैटवर्क के प्रतिनिधी शशिभूषण शर्मा एंव अफजल अहमद व विनय उपस्थित थे। देहरादून दूरदर्शन केन्द्र एक हाईपावर ट्रांसमिशन (भ्च्ज्) केन्द्र है। दूरदर्शन के चैनलों को लेकर यहां भी ऑपरेटरों से कोई शिकायत नहीं है, लेकिन इस तरह से रखी गई मीटिंग की प्रतीक्षा दोनो ही पक्षों को थी। देहरादून के बाद हरिद्वार दूरदर्शन केन्द्र में काफी केबल टी-वी- ऑपरेटर प्रतीक्षा में थे। हरिद्वार दूरदर्शन केन्द्र के अधिकारी श्री आर-के-सिंह, राणा, सतीव, एस-के-शर्मा आदि के साथ हरिद्वार के केबल टी-वी- ऑपरेटर व्रिजेन्द्र सिंह तोमर, दिनेश सुनेजा, भगवान दास, नरेन्द्र कुमार दल्ला, जोगिन्द्र पटेल, एंव जितेन्द्र कुमार गुप्ता (एम-एस-ओ-) भी मीटिंग में उपस्थित थे। यहां लोपावर ट्रांसमिशन (स्च्ज्) होता है, लेकिन दूरदर्शन चैनलों के लिए आपरेटरो ंसे कोई शिकायत दूरदर्शन अधिकारियों को नहीं है।
चेतना यात्र लम्बी दूरी तय कर लखनऊ पहुंची। लखनऊ में डैन एन्जाए अर्थात श्री औमेश्वर सिंह (एम-एस-ओ-) के कार्यालय में ही दूरदर्शन अधिकारियों को निमन्त्रित किया गया था। लखनऊ डैस सिटी है अतः पूर्णतः डिजीटल प्रसारण किया जा रहा है। दूरदर्शन केन्द्र लखनऊ से श्रीमति सुरजीत श्रीवास्तव के साथ श्री आर-के-द्विवेदी, के-एस-चौहान एंव विकास कटीहार मीटिंग में शामिल हुए जबकि उत्तर प्रदेश केबल टी-वी- के प्रमुख एम-एस-ओ- श्री औमेश्वर सिंह व अनिल कपूर के साथ उत्तरप्रदेश के भिन्न शहरों से आए अनेक ऑपरेटर भी शामिल हुए। दूरदर्शन चैनलों को लेकर लखनऊ में तो कोई शिकायत नहीं मिली लेकिन उत्तर प्रदेश में जहां एनॉलाग प्रसारण होता है वहां से ऐसी शिकायतें मिलती हैं कि नियमानुसार दूरदर्शन चैनलों का प्रसारण नहीं कर पा रहे हैं ऑपरेटर। औमेश्वर जी ने आश्वासन दिया कि ऐसी शिकायतों को दूर किए जाने के लिए वह पूरी कोशिश करेंगे। लखनऊ मीटिंग में यह भी तय हुआ कि ऐसी मीटिंग भविष्य में भी जारी रहेंगी। लखनऊ से यात्र इलाहाबाद होते हुए पटना पहुंची। इलाहाबाद में विश्वकर्मा डे की पूरी छुट्टी थी अतः वहां दूरदर्शन
अधिकारियों के साथ मीटिंग नहीं हो सकी, जबकि केबल टी-वी- ऑपरेटर एंव एम-एस-ओ- के साथ सिल्वरलाइन (एम-एस-ओ-) ऑफिस में मीटिंग रखी गई थी। इलाहाबाद भी डैस सिटी है अतः दूरदर्शन चैनलों को लेकर कोई शिकायत नहीं है। कुल पांच एम-एस-ओ- हैथवे, डैन, सिटी केबल, स्काई नैट एंव सिल्वरलाइन इलाहाबाद में केबल टी-वी- सेवा दे रहे है। पूरे उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद का स्थान केबल टी-वी- में कुछ अलग है। पटना दूरदर्शन केन्द्र में वहां के एम-एस-ओ- व ऑपरेटरों के साथ हुई मीटिंग में दूरदर्शन अधिकारियों में श्री दीपक कुमार एंव ध्रुव कुमार श्री वास्तव एंव श्री पी-एन- सिंह (स्टेशन डायरेक्टर डी-डी- बिहार) एंव एम-एस-ओ- अंजनी कुमार सिंह (दर्श), रन्जन कुमार (मोर्य), राना अमिताभ (जी-टी-पी-एल-) एंव नवीन कुमार व प्रकाश कुमार (सिटी मौर्या) शामिल थे। पटना से बिहार का एक चैनल डी-डी- बिहार चौबीस घण्टे प्रसारित किया जाता है। पटना भी डैस सिटी है अतः पटना में दूरदर्शन चैनलों को लेकर कोई श्किायत नहीं है, लेकिन पटना मीटिंग में कुल 27 केबल टी-वी- नैटवर्क की सूची दी गई जिनमें दूरदर्शन चैनलों को नियमानुसार नहीं प्रसारित किया जा रहा है। उनमें से मात्र 7 ऑपरेटरों के फोन नम्बर भी थे जबकि शेष 20 नैटवर्क एंव शहरों के ही नाम थे। उन ऑपरेटरों से सम्पर्क करने पर जानकारी मिली कि दूरदर्शन केन्द्र पटना द्वारा दिया गया ऑपरेटरों का डेटा बहुत पुराना है, जबकि वर्तमान स्थितियँा बदल चुकी है। अतः दूरदर्शन अधिकारियों को सुझाव दिया गया कि फिर से निरीक्षण करने की आवश्यक्ता है, केबल टी-वी- में अब बहुत कुछ बदल रहा है। पटना के बाद लखीसराय दूरदर्शन केन्द्र में वहां के केबल टी-वी- ऑपरेटरों के साथ हुई मीटिंग में ऑपरेटरों की दूरदर्शन केन्द्र के खिलाफ शिकायत मिली कि अक्सर यहां बिजली गुल रहती है लेकिन दूरदर्शन केन्द्र के इस ट्रांसमिशन केन्द्र से ट्रासमिशन ही बन्द रहता है, क्योंकि यहां बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है। दूरदर्शन अधिकारी विनोद कुमार ने बताया कि व्यवस्था तो है लेकिन खराब है आदि-आदि। लखीसराय के बाद देवघर दूरदर्शन केन्द्र में मीटिंग हुई, वहां दो नैटवर्क चलते है। उनमें एक कार्तिक ठाकुर का वहीं 100 चैनलों का कन्ट्रोल रूम लगा हुआ है। वह केबल टी-वी- एक्ट के अनुसार दूरदर्शन के पांचों चैनलो का प्रसारण कर रहे है, लेकिन दूसरे नैटवर्क बाबा दर्शन देवघर की धनबाद से सिटी केबल की फीड आ रही है अतः फीड में जैसा भी आ रहा है उसे ही वह आगे रीट्रांसमिट कर रहे है, उसकी कमी एम-एस-ओ- तक पहुंचाने और भविष्य में सुधार करने का आश्वासन ऑपरेटरों ने दूरदर्शन अधिकारियों को दिया। दूरदर्शन अधिकारी संजीव कुमार एंव आशुतोष बिमल सहित सभी ऑपरेटर भी मीटिंग में शामिल रहे।
इस मार्ग पर सड़को की स्थिती बहुत ज्यादा दयनीय है, लेकिन देवघर के बाद यात्र सीधे धनबाद दूरदर्शन केन्द्र पहुंची जहां ए-पी-सिंह, बी-बी- सिंह, जे-के- सिंह, पप्पू कुमार, पार्थ सार्थी व संजीव कुमार आदि दूरदर्शन कर्मचारियों के साथ अनेक केबल टी-वी- ऑपरेटर प्रतीक्षा रत थे।
धनबाद के ऑपरेटरों के साथ दूरदर्शन कर्मचारियों की इस तरह एक साथ यह भेंट पहली बार हो रही थी, लेकिन दूरदर्शन चैनलों को लेकर कोई शिकायत नहीं थी। धनबाद मीटिंग के बाद यात्र बोकारो पहुंची जहां दूरदर्शन केन्द्र बोकारों में केबल टी-वी- ऑपरेटर बड़ी सख्ंया में उपस्थित थे। बोकारो में केबल टी-वी- ऑपरेटरों के प्रमुख अजय कुमार सिंह ने चेतना यात्र-10 का प्रयोजन एंव माननीय मन्त्री जी का सन्देश सबको विस्तार से समझाया, जबकि संजीव कुमार, ए-पी-सिंह बोकारो दूरदर्शन केन्द्र की ओर से मीटिंग में शामिल थे। कोई समस्या नहीं, बहुत ही सोहार्द पूर्ण माहौल में दोनो के बीच मीटिंग हुई यही वहां की विशेष उपलब्धी रही।
यहां से सीधे रांची दूरदर्शन केन्द्र में मीटिंग हुई श्री चन्द्रशेखर दूरदर्शन केन्द्र रांची के वरिष्ठ अधिकारी एंव एम-एस-ओ- रांची अथवा उनके प्रतिनिधि उपस्थित रहे। रांची में डैन, जी-टी-पी-एल एंव मंथन सभी का नैटवर्क है, लेकिन मंथन का ही एक कन्ट्रोल रूम यहां है, बाकी की फीड कोलकाता से आ रही है। शिकायत कोई नहीं है, लेकिन आपस में दोनो के बीच सामजस्य स्थापित किए जाने की जरूरत थी, जिसकी शुरूआत इस मीटिंग से हो गई है। रांची के बाद आखिरी मीटिंग जमशेदपुर में वहां के एम-एस-ओ- के साथ हुई। उसके बाद यात्र सीधे पुरूजिया होते हुए बौकुरा, दुर्गापुर, वर्धमान के ऑपरेटरों से मिलते हुए देर शाम कोलकाता दूरदर्शन केन्द्र पहुंची। कोलकाता डैस सिटी है, यहां कुल दस एम-एस-ओ- का डिजीटल नैटवर्क चल रहा है। मीटिंग के लिए दूरदर्शन केन्द्र कोलकाता के अधिकारियों को ऑफिस टाईम के बाद देर तक प्रतीक्षा करनी पड़ी लेकिन अच्छी बात यह रही कि एम-एस-ओ- प्रतिनिधी भी मीटिंग में उपस्थित रहे। दूरदर्शन अधिकारी सुधीर चौधरी, रजत बोस, रविन्द्र चन्द्र दत्ता, शिलादित्य घोष आदि के साथ चन्द्रनाथ (मंथन), तापस कुमार दास (सिटी केबल) आदि भी शामिल रहे। दूरदर्शन चैनलों को प्रसारित तो किया जा रहा है लेकिन वह कर नुसार नहीं था। कोलकाता दूरदर्शन केन्द्र से 24 घण्टे डी-डी- बांग्ला का भी प्रसारण किया जाता है। यहां यह भी शिकायत मिली कि दूरदर्शन चैनलों को सी बैण्डडिश से रिसीव कर के यू बैण्ड से रिसीव कर प्रसारण किया जाता है जिससे कि चैनलो की क्वालिटी घट जाती है अतः सभी एम-एस-ओ- से आग्रह किया गया कि उन्हें केबल टी-वी- एक्ट का पूर्णतया पालन करना चाहिए। कोलकाता में दुर्गा पूजा की तैयारियां पूरे जोर से चल रही है। पूरी तरह से छुट्टी के मूड में होता है इन दिनों पूरा बंगाल। कोलकाता मीटिंग के बाद उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर के दूरदर्शन केन्द्र में मीटिंग हुई। भुवनेश्वर दूरदर्शन केन्द्र में श्रीमति जयन्ती मंजारी रति (डी-डी-जी- प्रोगाम) एल-के-प्रधान (डी-डी-जी-सी-ई), पी-के- महापात्र (डिपटी डायरेक्टर ई) एंव सी-एस-दास, ए-एम-राव सहित वहंसा के प्रमुख एम-एस-ओ- ओरटैल के वरिष्ठ प्रतिनिधी एंव दूसरे एम-एस-ओ- वैरायटी एण्टरटेन्मैंट के प्रतिनिधि डी न्यूरन दिवाकर प्रसाद दास (नोडल ऑफिसर), अरूण कुमार, सी-एस-नागेश्वर राव, दीपक कुमार, सुमांशु मोहन्ती प्रणब बन्धु आदि मीटिंग में शामिल रहे। भुवनेश्वर से 24 घण्टे डी-डी- उड़िया चैनल प्रसारित किया जाता है। इन चैनल पर दशर्को से जुड़ने के लिए दर्शक दरबार एंव रीवर्स लैटर्स जैसे कार्यक्रमों का भी प्रसारण किया जाता है।
ऐसे कार्यक्रमों में कई सवालों के जवाब देने के लिए केबल टी-वी- ऑपरेटरों को भी बुलाया जाता है। यहां भी शिकायत के-यू-बैण्ड से रिसीव किए जाने की ही मिली, जिसे एम-एस-ओ- ने सुधार भी लिया। भुवनेश्वर के बाद सीधे सम्बनपुर दूरदर्शन केन्द्र में मीटिंग रखी हुई है, लेकिन सम्बलपुर मार्ग में राधा खोल एवं बोद्ध में लो पावर ट्रॅासमिशन केन्द्रों में भी दूरदर्शन कर्मचारियों के साथ वह के केबल टी-वी- ऑपरेटरों से भी भेट हुई। राधा खोल में आशिष कुमार साहू एवं बोद्ध मे सत्यमदास दूरदर्शन कर्मचारियों सहित मुकुन्द प्रधान एंव पूर्णाचंद ऑपरेटरों से मिलते हुए यात्र सम्बलपुर दूरदर्शन केन्द्र पहुंची जहां श्रीमति का कोकालि पाल डिप्टी डायरेक्टर (प्रोगा) उमाकान्त साहू, एम-प्रधान दूरदर्शन कर्मचारियों के साथ केबल टी-वी- ऑपरेटर भी शामिल हुए। सम्बलपुर में भुवनेश्वर की फीड ही आ रही है, लेकिन वहां से केवल डिजीटल फीड ही सम्बलपुर पहुंचती है जबकि 96 चैनलों का एनॉलाग कन्ट्रोल रूम सम्बलपुर में ही लगा हुआ है। सम्बलपुर में दूरदर्शन चैनलों को लेकर मिली शिकायतो पर केबल टी-वी- ऑपरेटरों का ध्यान खींचा गया कि केबल टी-वी- एक्ट का पूर्णतया पालन करना प्रत्येक केबल टी-वी- आपरेटर की जिम्मेदारी है, अतः अपने प्रासरण में सुधार करें। सम्बलपुर के बाद छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में प्रैस क्लब में मीटिंग रखी गई थी, वहीं दूरदर्शन केन्द्र बिलासपुर से पीयूष कुमार झा भी उपस्थित रहे। मीटिंग के बाद यात्र मध्यप्रदेश के लिए रवाना हो गई। जबलपुर दूरदर्शन केन्द्र में श्री अविनाश दुर्गे (डिप्टी डायरेक्टर), डी-एन-द्विवेदी एंव टी-एच-अन्सारी मीटिंग में शामिल हुए जबकि अनेक केबल टी-वी- ऑपरेटरों सहित
एम-एस-ओ- प्रतिनिधि भी उपास्थित रहे। यहां भी कई एम-एस-ओ- का नैटवर्क है, लेकिन कन्ट्रोल रूम केवल एक ही सैल नैटवर्क का है। बाकी एम-एस-ओ- की फीड दूसरे शहरों से आ रही है। भास्कर की भोपाल से, यू-सी-एन- की नागपुर से, सिटी केबल की मुम्बई से हाथवे की इन्दौर से फीड आ रही है। डैस सिटी होने के कारण पूर्णतया डिजीटल प्रसारण यहां हो रहा है अतः दूरदर्शन चैनलों को लेकर कोई शिकायत भी यहां नहीं है। यहां से यात्र नागपुर दूरदर्शन केन्द्र पहुंची जहां दूरदर्शन अधिकारी एम- के डहाके, बी-बी- ठाकरे आदि के साथ भेंट कर यात्र हैदराबाद के लिए रवाना हो गई। क्योंकि नागपुर रविवार होने के कारण मीटिंग नहीं बुलाई जा सकी थी। हैदराबाद का यह मार्ग बहुत बुरी हालत में है, देर रात में नागपुर से हैदराबाद पहुंची यात्र। दूरदर्शन केन्द्र हैदराबाद में श्री रविकान्त बाबू, बी श्रीनिवास राव, एन-माधव रेड्डी के साथ वहां के एम-एस-ओ- बी वेनु गोपाल (हैदराबाद केबल डिजीटल), आरफारी (आर-वी-आर- इन्फ्रास्ट्रकचर), आई-आर-एस- रवि शंकर (हैथवे), आई-एस- रामाकृष्णन (सिटी केबल), एवं के-हरीश आदि मीटिंग में उपस्थित रहे। डैस सिटी होने के कारण दूरदर्शन चैनलों का प्रसारण तो हो रहा है, लेकिन उन्हें चैनलों के जोनर में नहीं रखा गया है । डैस एरिया को लेकर भी यहां कुछ कन्फ्रयूजन है अतः कहीं-कहीं एनॉलाग भी चलाया जा रहा है, वहां दूरदर्शन चैनलों के लिए केबल टी-वी- एक्ट का उल्लघन हो रहा है अतः सभी एम-एस-ओ- के साथ बहुत ही सौहार्द पूर्ण वातावरण में हुई यह मीटिंग एक सकारात्मक परिणाम के साथ सम्पन्न हुई। यहां अभी हाल में ही नया राज्य ‘तेलगाना’ बना है अतः दो दिन पूर्व ही 42 सितम्बर 2014 को एक नया चैनल सप्तागिरी तेलगाना का 24 घण्टे प्रसारण शुरू किया गया है, जिसका प्रसारण करना भी यहां के ऑपरेटरों के लिए अनिवार्या है, लेकिन तेंलगाना के केबल टी-वी- ऑपरेटरों को इस नए चैनल के बारे में मालूम ही नहीं है। इसी तरह से सप्तागिरी आन्ध्रा 24 घण्टे चैनल का प्रसारण विजयवाडा से शुरू किया गया है। हैदराबाद मीटिंग के बाद सीधे दूरदर्शन केन्द्र महबूब नगर में मीटिंग हुई जहां दूरदर्शन अधिकारी श्री पी-सत्या नारायण एन- दक्षिणा मूर्ति के साथ वहां के ऑपरेटर जी-एस-रेड्डी, नवीन कुमार के-सत्या नारायन, आदि मीटिंग में शामिल हुए। यहां अभी एनॉलाग टैक्नॅालाजी पर ही केबल टी-वी- चल रहा है लेकिन शीध्र ही डिजीटल की तैयारी में है केबल टी-वी- ऑपरेटर। केबल टी-वी- एक्ट के प्रति उनकी जिम्मेदारी की बात उन्हें समझाते हुए दूरदर्शन चैनलों मे से कौन से चैनलों का प्रसारण उनके लिए अनिवार्य है बताया गया। हांलाकि महबूब नगर दूरदर्शन केन्द्र को उनसे कोई शिकायत नहीं थी। यहां से आगे कर्नल दूरदर्शन केन्द्र में मीटिंग रखी गई थी, दूरदर्शन अधिकारी श्री एन दक्षिणामूर्ति के साथ केबल टी-वी- ऑपरेटरों की एसोसिएशन अध्यक्ष श्री जे-रमेश एंव रामाकृष्णा (सिटी केबल) सहित अनेक आपरेटर मीटिंग में शामिल हुए।
दूरदर्शन केन्द्र कुर्नूल को ऑपरेटरों से कोई शिकायत नहीं थी, लेकिन यात्र का प्रयोजन सहित उन्हें केबल टी-वी- एक्ट के प्रति जानकारी दी गई। कुर्नल मीटिंग के बाद अलगी मीटिंग के लिए नान्दयाल में प्रतीक्षा की जा रही थी, अतः शीध्र ही कुर्नूल से नान्दयाल पहुंची यात्र। नान्दयाल में यात्र का भव्य स्वागत किया गया, जगह-जगह यात्र के स्वागत के लिए होडिंग लगाए गए थे, एंव भारी सख्ंया में केवल टी-वी- ऑपरेटर वहां पहुंचे हुए थे। नान्दयाल में केबल टी-वी- अपरेटर श्री जया चन्द्र रेड्डी द्वारा डिजीटल कन्ट्रोल रूम लगाया गया थाग उन्हंीं के ऑफिस में ही वहां के दूरदर्शन अधिकारी श्री एन- प्रभाकर रेड्डी को निमन्त्रित किया गया था। डिजीटल होने के कारण दूरदर्शन चैनलों के प्रसारण पर कोई शिकायत भी नहीं थी। वहां डिजीटल के लिए डैस लायसेंस सहित अन्य जानकारियों पर उन्हें अपग्रेड कर यात्र वहां से अगले पड़ाव की ओर बढ़ चली। तमिलनाडू में केबल टी-वी- कार्य वहां की सरकार ही देखती है, अतः वहां की सरकार को केबल टी-वी- एक्ट के प्रति कुछ भी बात करना बेमानी लगता है। जबकि वहां की मुख्यमन्त्री की अभी-अभी गिरफ्रतारी होने के कारण वहां का महौल ठीक सा नहीं प्रतीत हो रहा है। अतः यहां से सीधे पाण्डिचेरी पहुंची यात्र। पाण्डिचेरी दूरदर्शन केन्द्र में विश्वकर्मा पूजा में शामिल होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ, वहां के सभी पांचो एम-एस-ओ- के साथ दूरदर्शन अधिकारी श्री वी- निवास वराधय भी मीटिंग में शामिल हुए। दूरदर्शन चैनलों को लेकर कोई शिकायत नहीं है। पाण्डिचेरी में डिजीटल के साथ-साथ एनॉलाग प्रसारण भी अभी चल रहा है, लेकिन वहां डिजीटल पर जाने की तैयारियां चल रही है। पाण्डिचेरी के एम-एस-ओ- ई- सतीश,के- सरावनम, ई-जे- मुरूगम- जी- सलेम आर र्पापूगंज एंव ए-मोहम्द, सलीम आदि के साथ पाण्डिचेरी में डैस की भावी सम्भावनाओं पर चर्चा हुई। पाण्डिचेरी के बाद यात्र तमिलनाडू के कुडॅलूर शहर पहुंची, वहां केबल टी-वी- ऑपरेटर के कन्ट्रोल रूम पर ही दूरदर्शन अधिकारी के साथ भेंट हुई। तमिलनाडू में केबल टी-वी- पूर्णतया वहां की सरकार के आधीन चलता है अतः केबल टी-वी- ऑपरेटर के ऑफिस में एक स्पेशल रिवेन्यु इन्स्पैक्टर आर- राजेन्द्रम भी उपस्थित रहे। वहां के केबल टी-वी- ऑपरेटर आर- मुरली द्वारा अभी कुल 90 चैनल एनॉलाग पर चलाए जा रहे है। लेकिन नियन्त्रण पूरी तरह से वहां की राज्य सरकार का ही है। कुडॉलूर जैसी ही स्थिती पूरे तमिलनाडू की है अतः यात्र तमिलनाडू से केरल त्रिवेन्द्रम दूरदर्शन केन्द्र पहुंची, वहां दूरदर्शन अधिकारी श्री आर-कृष्णा दास, एस- विजय कुमार के-एस- मोले सहित अन्य प्रमुख कर्मचारी एंव केबल टी-वी- ऑपरेटरों में कुल तीन एम-एस-ओ- एशिया नैट, डैन एंव के-सी-सी-एन- का नैटवर्क चलता है। यहां डिजीटल सेवा उपलब्ध है अतः दूरदर्शन चैनलों को लेकर कोई समस्या नहीं है। तीनो ंनैटवर्क के प्रतिनिधि मीटिग में शामिल रहे। केरल में केबल टी-वी- ऑपरेटरों की एसोसिएशन बहुत मजबूत होने के साथ को कोपरेटिव तरीके से केबल टी-वी- संचालन भी करती है, अतः दूरदर्शन केन्द्र त्रिवेन्द्रम की मीटिंग में वहां के अनेक प्रमुख ऑपरेटर भी शामिल हुए। दूरदर्शन केन्द्र की ओर से सभी के लिए भोजन की भी व्यवस्था की गई। यहां से सीधे कोच्ची दूरदर्शन केन्द्र पहुंची यात्र, जहां दूरदर्शन अधिकारी श्री के-गोपा कुमार के साथ केबल टी-वी- ऑपरेटर प्रतीक्षा रत थे।
ज्यादा नैटर्वक सर्विस दे रहे है, इनमें एशिया नैट, डैन, के-सी-सी-एन- के अतिरिक्त सिटी केबल, भूमिका, टैन, क्लिय विजन एंव आर- एण्टरटेमैंट नैटवर्क भी चल रहे है। सभी डिजीटल सेवा दे रहे है, अतः दूरदर्शन चैनलों को लेकर समस्या नहीं है। केरल में तकरीबन कुल मिलाकर 250 से अधिक लोकल चैनलों का प्रसारण किया जाता है, जबकि केबल टी-वी- ऑपरेटरों की दो एसोसिएशन को ऑपरेटिव तरीके में केबल टी-वी- का संचालन भी करती है। कोच्ची के बाद यात्र त्रिशूर दूरदर्शन केन्द्र पहुंची। त्रिशूर दूरदर्शन केन्द्र में पहले से ही काफी केबल टी-वी- आपरेटर आस-पास के क्षेत्रे से भी पहुंचे हुए थे।
यहां भी एशिया नैट, डैन सिटी केबल एंव के-सी-सी-एल- द्वारा केबल
टी-वी- सेवा उपलब्ध करवाई जाती है। डिजीटल प्रसारण के कारण दूरदर्शन चैनलों को लेकर कोई समस्या नहीं है। दूरदर्शन अधिकारी त्रिशूर श्री सुब्राहमयम् सहित बीजू एम-जी (केरला विजन लि-), सुरेश कुमार पी-पी-(के-सी-सी-एल-) प्रसाद एस-, ई-वी- अब्दुल गटूर, शाना वस टी- अनन्त राम के- आदि ऑपरेटर भी मीटिंग में शामिल हुए। त्रिशूर के बाद कोजीकोड दूरदर्शन केन्द्र पहुंची यात्र जहां यात्र के स्वागत में विशेष बैनर भी लगाए गए थे। कोजीकोड दूरदर्शन केन्द्र में पालककाड़ एंव आस-पास के अन्य शहरों के केबल टी-वी- ऑपरेटर भी पहुंचे हुए थे। यहां भी डिजीटल प्रसारण हो रहा है अतः दूरदर्शन चैनलों को लेकर कोई श्किायत नहीं है। केरल में यह आखिरी मीटिंग थी, यहां दूरदर्शन केन्द्रों में यात्र को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला एंव सभी मीटिंग्स में एम-एस-ओ- व केबल टी-वी- ऑपरेटरों की सख्ंया भी काफी रही। केरल के बाद कर्नाटक के लिए मैसूर से यात्र की शुरूआत हुई। मैसूर सें केबल टी-वी- की फीड बग्ंलौर से आ रही है और बंगलौर एक डैस सिटी है अतः यहां भी दूरर्शन चैनलों के लिए कोई समस्या नहीं है। बगंलौर पूर्णतया डैस हो गया है। यहां डैन, हैथवे, इन केबल, इम्पलैक्स, एक्ट, आल डिजीटल, केजिन, ई इन्फ्रास्ट्रकचर आदि नैटवर्क सेवा दे रहे है।
कर्नाटक के शिमोगा दूरदर्शन केन्द्र में मीटिंग रखी गई, जिसमे आस-पास के शहरों से भी ऑपरेटर शामिल हुए। शिमोगा दूरदर्शन केन्द्र की अधिकारी श्रीमति जीवा सहित अन्य दूरदर्शन कर्मचारियों के साथ केबल टी-वी- ऑपरेटरों की मीटिंग में केबल टी-वी- एक्ट के अनुसार दूरदर्शन चैनलों का प्रसारण किए जाने पर पूरी जानकारी दी गई। शिमोगा दूरदर्शन केन्द्र पर केबल टी-वी- ऑपरेटर नजदीकी शहरों से भी बड़ी सख्ंया में आए हुए थे। शिमोगा से दावणगिरी- हुबली आपरेटरों के साथ मीटिंग व स्वागत होते हुए यात्र का महाराष्ट्र में कोल्हापुर से प्रवेश हुआ। पूना में दूरदर्शन केन्द्र द्वारा यात्र की कवरेज की गई और फिर सीधे मुम्बई महानगरी पहुंची यात्र। मुम्बई दूरदर्शन केन्द्र की अधिकारी श्रीमति उज्जवला चन्द्रमोर को साथ लेकर टाटा स्काई
(डी-टी-एच-) के ऑफिस में उनके प्रमुख श्री हरित नागपाल के साथ मीटिंग हुई। नागपाल जी ने बताया कि अभी उनके डी-टी-एच- पर दूरदर्शन के 19 चैनलों का प्रसारण किया जा रहा है। अभी हमारे पास स्पेस नहीं है, हम इसके लिए तैयारी में है, शीघ्र ही शायद 3-4 महीनों में हमें कुछ स्पेस मिल जाने की उम्मीद है। जैसे ही हमे थोड़ा स्पेस मिलेगा हम दूरदर्शन के बाकी चैनलों को भी कैरी करेंगे। टाटा स्काई के प्रमुख श्री हरित नागपाल जी ने अपने ऑफिस में ही लंच भी रखा हुआ था।
टाटा स्काई के साथ मीटिंग के बाद दूरदर्शन केन्द्र मुम्बई मीटिंग रखी गई थी। मुम्बई दूरदर्शन केन्द्र की मीटिंग में मुम्बई के प्रमुख एम-एस-ओ- से यह बात रखी गई कि दूरदर्शन चैनलों के बारे में कुछ भी जानकारी के लिए किसी ऐसे अधिकारी का नाम हमें दिया जाना चाहिए जिसे टैक्निकल नोलिज भी हो।
इन केबल से आए उमेष चन्द दाल्वी ने बताया कि दूरदर्शन चैनलों में कभी-कभी ऑडियों की शिकायत मिलती है कि कभी ऑडियों कण्टेट्ंस के साथ मैच नहीं करती तो कभी-कभी उसमें एफ-एम- की ऑडियो मिक्स हो जाती है अतः हमें किसी दूरदर्शन अधिकारी का कान्टेक्ट दिया जाना चाहिए। दूरदर्शन अधिकारी श्रीमति उज्जवला चन्द्रामोर की शिकायत कि ऑपरेटर के-यू-बैण्ड से दूरदर्शन चैनलों को रिसीव करते है, को भी भविष्य में ना करने का आश्वासन दिया एंव होटलों में दूरदर्शन चैनलों का नहीं दिखाई देने पर एम-एस-ओ- की ओर से बताया गया कि मुम्बई में पूरी तरह से डिजीटल मोड में चल रहा है केबल टी-वी-, जिन होटलों मे भी केबल टी-वी- ऑपरेटरों द्वारा सेवा दी जा रही है, वहां दूरदर्शन चैनल भी उपलब्ध है, लेकिन कई बड़े होटलों में अपना एनॉलाग प्रसारण किया जाता है, उसके लिए सरकार को ही देखना होगा, उसके लिए केबल टी-वी- ऑपरेटरों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। मुम्बई दूरदर्शन केन्द्र की मीटिंग के बाद अन्य एम-एस-ओ- ऑपरेटरों से भेंट कर यात्र सूरत दूरदर्शन केन्द्र पहुंची, जहां दूरदर्शन अधिकारी श्री जितेन्द्र एस- हाण्डा, हरीष एन-पटेल के साथ सूरत एम-एस-ओ- के प्रतिनिधि उपस्थित थे। सूरत पूर्णतया डिजीटल पर है अतः दूरदर्शन चैनलों के लेकर कोई शिकायत नहीं है। सूरत की मीटिंग से निबट कर यात्र सिधे वड़ोदरा दूरदर्शन केन्द्र पहुंची जहां दूरदर्शन अधिकारी श्री आर-एच-शाह एंव संजय भट्ट एंव अनुराग भाटिया के साथ वहां के एम-एस-ओ- प्रतिनिधि मीटिंग में उपस्थित रहे। वडोदरा मे भी डिजीटल प्रसारण हो रहा है अतः दूरदर्शन चैनलों के लिए कोई शिकायत नही है। वडोदरा दूरदर्शन केन्द्र की मीटिंग के बाद अगली मीटिंग अहमदाबाद में है।
अहमदाबाद दूरदर्शन केन्द्र में दूरदर्शन अधिकारी श्री ए-के-गुप्ता, ओ-पी-बरवा, राहुल चिमन भाई महता, योगेश, अशोक व रसिक परमार आदि के साथ वहां के एम-एस-ओ- प्रतिनिधि भी शामिल हुए। अहमदाबाद दूरदर्शन केन्द्र से डी-डी-गिरनार का भी डी-डी- नेशनल पर कुछ समय के लिए प्रसारण होता है। डी-डी- गिरनार पर प्रसारित कार्यक्रमों ने दर्शको में खास लोकप्रियता हांसिल की है। अहमदाबाद भी एक डैस सिटी है अतः दूरदर्शन चैनलो को लेकर कोई शिकायत नहीं है। अहमदाबाद के बाद चेतना यात्र राजकोट होकर जूनागढ़ से सासणगीर पहुंची, वहीं दीव के ऑपरेटर भी पहचान गए, उनके साथ गीर में मीटिंग कर यात्र लम्बा सफर कर मेहसाना पहुंची, जहां दूरदर्शन अधिकारी श्रीमति आशा जी अपनी शिकायतों के साथ प्रतीक्षा में थी।
मेहसाना जी-टी-पी-एल- के ऑफिस में ही मीटिंग रखी गई थी, जहां अन्य केबल टी-वी- ऑपरेटरों को भी बुलाया गया था। आशा जी की शिकायत थी कि यहां केबल टी-वी- एक्ट के अनुसार दूरदर्शन चैनलों का प्रसारण नहीं कर रहे है, जबकि मेहसाना में अलग से कन्ट्रोल रूम नहीं है, यहां अहमदाबाद से फीड आ रही है। अतः अहमदाबाद कन्ट्रोल रूम को श्रीमति आशा जी की शिकायत दर्ज करवाते हुए उन्हें सुधार के लिए आग्रह कर दिया गया। अहमदाबाद के बाद यात्र का सफर तो राजस्थान-मध्यप्रदेश के भिन्न- भिन्न शहरों में काफी लम्बा रहा लेकिन दूरर्शन केन्द्र जयपुर में एक मीटिंग और हुई।
जिसमे दूरदर्शन अधिकारी श्री आर-एस-त्यागी, महेश सी- पालीवाल, एम-सी- बंसल सहित वहां के प्रमुख एम-एस-ओ- प्रतिनिधि भी शामिल हुए। डैस सिटी होेने के कारण दूरदर्शन चैनलों को लेकर ज्यादा शिकायत नहीं थी लेकिन चैनलों को जोनर में नहीं चलाया जा रहा है एंव बिलिंग नहीं की जा रही है, शिकायतों पर ध्यान देने का उन सबसे आग्रह कर जयपुर से सीधे दिल्ली पहुँच गई यात्र। कुल 50 दिनों में तकरीबन 27 हजार किलोमीटर की सफल यात्र कर दिल्ली में माननीय श्री प्रकाश जावडेकर जी सूचना व प्रसारण, पर्यावरण वन एंव संसदीय कार्य मन्त्री भारत सरकार को रिपोर्ट कर यह यात्र सम्पन्न हो गई।
"पहली बार दूरदर्शन अधिकारियों के साथ हो रहे इस सम्वाद पर दूरदर्शन अधिकारी बहुत उत्साह एंव आशा से भरे हुए थे, जिसे आपरेटरों की ओर से कोई निराशा भी नहीं हुई, उसकी समस्या पर मुकेश मल्होत्र जी ने बताया कि किसी भी चैनल को डिजीटल टैक्नॉलाजी में प्रसारण के लिए डालने के लिए स्ट्रीमिंग में भी थोड़ा समय लगा करता है"